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सूखे ने बच्चों को थमा दिया फावड़ा

Mon, 20 Jun 2016 11:56 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा Updated Mon, 20 Jun 2016 11:56 PM IST
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 sookhe ne bachchon ko thama diya phaavada Dry the children handed shovel
नरैनी क्षेत्र के बड़ैछा गांव में मां के साथ मजदूरी करते किसान परिवार के मासूम भाई-बहन। - फोटो : अमर उजाला

करतल (बांदा)। सूखे के कारण बुंदेलखंड में किसानों की जो दुर्गत हुई है, उसकी बानगी जगह-जगह नजर आ रही है। छह बीघे के काश्तकार के घर फाकाकशी की नौबत आई तो घर के मासूम तक मनरेगा की मजदूरी में मां का हाथ बंटाने में जुट गए। तपती धूप में मां के मददगार बनकर रोजाना शाम को घर का चूल्हा जलाने की चिंता में पसीना बहा रहे हैं।

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नरैनी ब्लाक में इन दिनों चुनूबाद के पुरवा से पुंगरी मौजा से चकरोड का निर्माण कराया जा रहा है। यह काम मनरेगा से हो रहा है। मजदूर खंतियों से मिट्टी खोदकर सिर पर लादकर सड़क में डाल रहे हैं। इन्हीं मजदूरों में नौ साल की हिरनिया भी शामिल है।
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वह बडै़छा गांव के प्राइमरी स्कूल में पांचवीं कक्षा की छात्रा है। मां जशोदा के साथ बराबर हाथ बंटा रही है। उसका छोटा भाई दूरबीन पांच साल की उम्र में ही मां के साथ मजदूर बना है। नन्हें हाथों से मिट्टी के ढेले उठाकर सड़क पर डाल रहा है।
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खेलने और खाने के दिनों में मजदूरी की मशक्कत कर रहे मासूमों से जब पूछा गया कि वे इस शिद्दत की गर्मी में क्यूं जूझ रहे हैं? मासूमों का जवाब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए करारा तमाचा है। दोनों भाई-बहनों ने कहा कि घर में खाने को कुछ नहीं है। कोटेदार गल्ला नहीं देता।

गांव में कोई भीख भी देने के लायक नहीं है। पिता राजू घर में रहकर खाट पर पड़े बीमार बाबा की रात-दिन सेवा में लगे रहते हैं। ऐसे में मां पर ही घर का खर्च चलाने की जिम्मेदारी है। अकेले मजदूरी करता देख दोनों भी मां का हाथ बंटा रहे हैं। कमोवेश यही कहानी इसी सड़क पर काम कर रहे सात वर्षीय अंकित पुत्र कमलेश और अनिल पुत्र रामरतन की भी है। ये भी अपनी मां के साथ मजदूरी में लगे हैं।


 इस बारे में मुख्य विकास अधिकारी आरके सिंह ने कहा कि बच्चों से मजदूरी कराना गैरकानूनी है। ऐसे जरूरतमंद गरीब परिवार को मदद दिलाई जाएगी। इसके लिए बीडीओ और ग्राम प्रधान को निर्देश दिए जा रहे हैं।

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