{"_id":"9a5557d134433824e18c9d67b50e5f3a","slug":"snafu-in-the-bandit-ringleader-village-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दस्यु सरगना के गांव में ‘गोलमाल’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दस्यु सरगना के गांव में ‘गोलमाल’
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 06 May 2015 12:22 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इनामी दस्यु सरगना संग्राम सिंह के खौफ से अधिकारी उसके पैतृक गांव नौगवां नहीं जाते रहे। नतीजा, यहां विकास कार्यों में जमकर मनमानी हुई। तीन वर्षों में सिर्फ मनरेगा से मिट्टी के कामों मेें 60 लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर लिए गए।
विज्ञापन
86,000 रुपये शौचालयों की मरम्मत के नाम पर निकाले गए, जबकि शौचालय पूरी तरह जर्जर हालत में हैं। जिस रास्ते को हर साल गांव के लोग श्रमदान से बनाते हैं वहां सड़क निर्माण के नाम पर 52,000 रुपये निकाल लिए गए। समाजसेवी ने आरटीआई के तहत ग्राम पंचायत से खर्च का ब्योरा हासिल किया है।
विज्ञापन
नरैनी का नौगवां गांव दोआबा क्षेत्र में है। यहां कुछ दिन पहले तक इसी गांव के दस्यु संग्राम सिंह का खौफ छाया हुआ था। अब वह जेल में है। इसी बीच ग्राम पंचायत में मनरेगा से वर्ष 2010-11 में 23,21,653 रुपये, वर्ष 2011-12 में 21,63,729 रुपये और वर्ष 2012-13 में 15,97,378 रुपये खर्च कर डाले। इस भारी भरकम बजट से ज्यादातर समतलीकरण का काम हुआ।
विज्ञापन
सिंचाई कूप निर्माण और नाला खुदाई में भी लाखों रुपये खर्च हुए। समाजसेवी आशीष सागर दीक्षित को ग्राम प्रधान लालाराम और ग्राम पंचायत अधिकारी ने संयुक्त हस्ताक्षरों से उपलब्ध कराई सूचना में खर्च का ब्योरा दिया है। मनरेगा के अलावा राज्य वित्त आयोग से पूर्व माध्यमिक विद्यालय और प्राथमिक विद्यालयों में चार शौचालयों की मरम्मत पर 86,437 रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि शौचालयों जर्जर है।
प्राथमिक विद्यालय के शौचालयों के दरवाजे टूटे हैं। यह गंदगी से पटे पड़े हैं। 5वीं की छात्रा सुमन, संगीता आदि ने बताया कि शौचालय ऐसे है ही नहीं कि उनका उपयोग किया जा सके। ग्राम पंचायत में तीन वर्षों मेें 1,40,408 रुपये की भारी भरकम रकम प्रशासनिक व्यय के नाम पर निकाल ली गई। जन सूचना में इसका कोई ब्योरा नहीं दिया गया।
56,250 रुपये की लागत से वर्ष 2012-13 में बनाई गई गहबरा से देवी घाट नदी तक सड़क का नामोनिशान नहीं है। गांव के रामआसरे, विशाली, देवी सिंह, तेज बहादुर सिंह आदि का कहना था कि नदी तक जाने के लिए गांव के लोग हर साल श्रमदान से रास्ता बनाते हैं। ग्राम पंचायत ने कभी यहां सड़क नहीं बनाई।
हैंडपंपों की मरम्मत में वर्ष 2011-12 में 97,895 रुपये, वर्ष 2012-13 में 1,54,327 रुपये खर्च बताए गए हैं। समाजसेवी आशीष सागर का दावा है कि इस गांव के विकास कार्यों और खर्च हुई धनराशि की निष्पक्ष जांच करा ली जाए तो भारी भरकम घोटाला सामने आएगा।
यह गांव बेहद गरीब लोगों का है। उनके नाम पर काली कमाई की जा रही है। उधर, ग्राम प्रधान लालाराम और ग्राम पंचायत अधिकारी डी सिंह का कहना है कि सारे विकास कार्य पूरी ईमानदारी से कराए गए हैं। सबके बिल वाउचर और अन्य अभिलेख मौजूद हैं। घोटाले के आरोप गलत हैं।