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फसल बर्बादी पर दो और किसानों ने जान दी
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 08 May 2015 12:01 AM IST
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फसल बर्बादी पर गुरुवार को दो और किसानों ने फांसी लगाकर जान दे दी। एक घटना यहां के महोखर गांव में तो दूसरी मवई बुजुर्ग गांव में हुई। महोखर के लोगों ने घटना के बाद प्रशासन के उपेक्षात्मक रवैए से खफा पुलिस को कई घंटे तक शव छूने नहीं दिया। बाद में विधायक के हस्तक्षेप के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। वहीं दूसरी घटना में ससुराल आए किसान ने फांसी लगाकर मौत को गले लगा लिया।
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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह पहली मई को बांदा में किसानों की महापंचायत करने महोखर गांव ही आए थे। तब उन्होंने इसी गांव के किसानों से बातचीत कर फसल बर्बादी का जायजा लिया था। नसीहत दी थी कि बुंदेलखंड के किसान बहादुर होते हैं। संघर्ष करें, आत्महत्या न करें।
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गृह मंत्री की वह नसीहत गांव में सांतवे दिन ही बेदम हो गई। गांव के किसान विजय बहादुर उर्फ नाती सिंह (65) ने गुरुवार को सुबह साढ़े 9 बजे घर की अटारी में फांसी लगा ली। विजय बहादुर की पत्नी की कई वर्षों पहले ही मौत हो चुकी है।
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नौ साल की पोती दीपा अटारी पर आई तो बाबा को फंदे पर लटका देख शोर मचाया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर नीचे रखा। एसडीएम सदर प्रहलाद सिंह भी पहुंचे । चचेरे भाई राजबहादुर सिंह ने बताया कि विजय बहादुर कर्ज को लेकर चिंतित था।
इकलौते पुत्र कुलदीप सिंह ने बताया कि इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक, कालूकुआं शाखा में वर्ष 2012 में तीन लाख रुपये कर्ज लिया था। यह अब तक अदा नहीं हो सका। साहूकारों से भी डेढ़ लाख कर्ज ले रखा था। घटनास्थल पर प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह और प्रवास सोसायटी के आशीष सागर भी पहुंचे।
इनकी और मृतक के परिजनों की एसडीएम से जमकर नोकझोक हुई। परिजन डीएम के मौके पर आने की मांग पर अड़ गए और पुलिस को शव उठाने नहीं दिया। कई घंटे के बाद विधायक दलजीत सिंह मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
इस दौरान किसान नेता बैजनाथ अवस्थी, बलराम तिवारी, भाजपा नेता धीरेंद्र सिंह, कैप्टन सूर्य प्रकाश मिश्रा आदि पहुंच गए थे। उधर, सदर तहसील के मवई बुजुर्ग गांव (जारी) में अपनी ससुराल आए किसान रामबहोरी (45) पुत्र चुनबदिया ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
उसने डेढ़ बीघा निजी जमीन समेत 25 बीघा बटाई पर लेकर फसल बोई थी। पत्नी ने सुसाइड की वजह फसल बर्बाद होने का सदमा बताया है। किसान रामबहोरी पांच दिन पहले अपने पैतृक गांव जारी से ससुराल मवई बुजुर्ग गांव आया था। ससुर कल्लू ने बताया कि बुधवार की शाम घर के अन्य सदस्य काम पर गए हुए थे।
इसी बीच रामबहोरी ने घर के आंगन में लगे नीम के पेड़ में रस्सी बांधी और फांसी पर झूल गया। पत्नी उर्मिला ने बताया कि फसल इतनी भी नहीं हुई कि लागत निकल सके। इसके अलावा पिछले वर्ष पुत्र की शादी में साहूकार से लिए गए 40 हजार रुपये कर्ज अदायगी की भी चिंता थी।
इन्हीं सब तनाव और चिंताओं के चलते फांसी लगा ली। शव का पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया है। नायब तहसीलदार गिरिवर सिंह ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि मृतक की पत्नी को विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना से आर्थिक मदद दिलाई जाएगी।
युवती ने आग लगाई, पति बोला फसल का सदमा
बांदा। बबेरू थाना क्षेत्र के मुरवल गांव में युवती सियापती (25) पत्नी रामनरेश ने बुधवार की रात ससुराल में खुद को आग लगा ली। उसे नाजुक हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां गुरुवार को उसकी मौत हो गई। रामनरेश का कहना है कि उसके पास ढाई बीघा जमीन है।
इसी से घर का गुजारा होता है। अबकी गेहूं बोया था। बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि से फसल का भारी नुकसान पहुंचा। सिर्फ दो क्विंटल अनाज हाथ लगा। पत्नी ने इसी तनाव में आग लगा ली। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। रामनरेश के मुताबिक उसकी शादी पांच वर्ष पूर्व हुई थी। उसके तीन साल का एक बेटा है।