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अब बारिश ने ढाया सितम, कराह रहा किसान, चित्रकूटधाम मंडल में हुई 36 मिमी बारिश

Sun, 01 Mar 2015 11:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Sun, 01 Mar 2015 11:22 PM IST
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Rain made disaster, 36 mm in board

पहले ओले और अब बारिश की मार से किसान कराह रहा है। फरवरी का महीना झमाझम बारिश के साथ रुखसत हुआ। वहीं मार्च के पहले दिन भी लगातार झमाझम बारिश हुई। चित्रकूटधाम मंडल में औसत 36 मिलीमीटर बारिश से खेतों में लबालब पानी भर गया।

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तापमान गिरने से ठंड की सुरसुरी बढ़ गई। दलहन, तिलहन व गेहूं समेत रबी की फसल को भारी नुकसान हुआ। हमीरपुर में सबसे अधिक 40 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई।

बुंदेलखंड में बेमौसम हो रही जबर्दस्त बारिश किसानों पर सितम ढा रही है। वहीं शहर और नगरीय इलाकों में जलभराव व कीचड़ से सराबोर सड़कें राहगीरों के लिए मुसीबत सबब बन गई हैं। पिछले साल की तरह इस वर्ष भी बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है।
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केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक शनिवार को बांदा में 6 मिलीमीटर, हमीरपुर में 14, महोबा में 9.6 तथा चित्रकूट में 7 मिलीमीटर बारिश हुई। वहीं रविवार को सुबह से रुक रुककर लगातार बारिश होती रही। बांदा में कुल 36, चित्रकूट में 38.5, हमीरपुर में 40 तथा महोबा में 33.8 मिलीमीटर बारिश हुई। 
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जनवरी व फरवरी माह में इस वर्ष कुल 120 मिलीमीटर बारिश हुई। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 को छोड़कर यह 1995 से अब तक की सर्वाधिक बारिश है। वहीं मंडल के चारो जिलों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी 4-5 डिग्री सेल्सियस की कमी आई है।

बबेरू, अतर्रा व नरैनी प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र में 24 घंटे से लगातार बारिश हो रही है। खेतों में लबालब पानी भरने से फसलों का भारी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल गिरकर जमींदोज हो गई।

कृषि वैज्ञानिक डॉ.मुलायम सिंह यादव के मुताबिक मसूर की फसल का 80 फीसदी तथा अन्य दलहनी व तिलहनी फसलों में करीब 50 से 60 फीसदी नुकसान हुआ है। फूल व पत्ती झड़ गई हैं।

किसानों के लिए कहर बनीं बेमौसम बारिश
बांदा। जबरदस्त बारिश ने ग्रामीण इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। खेतों में खड़ी चना, मसूर, लाही, अलसी, अरहर, मटर व गेहूं की फसलों के बचने की रही सही उम्मीद भी खत्म हो गई। खेतों में पानी भरने से गेहूं की फसल पसर गई है। मटर, मसूर व चना में लगे फूल झड़ जाने से उनके फलने की संभावना खत्म हो गई।

किसान जग प्रसाद मिश्रा (महोखर), नत्थूराम (पलरा), जगजीवन (गुरेह) व अतर्रा के राजेश द्विवेदी, ब्रह्मदत्त शुक्ल, शंभू धतुरहा आदि ने कहा कि खेती की जुताई व बुआई और फिर खाद में घर की पूंजी भी लग गई। अब बारिश और फसल की यह हालत देखकर लगता है कि दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो पाएगी।


गुल हो गई बिजली
बांदा/अतर्रा। मूसलाधार बारिश में जिले की बिजली आपूर्ति भी धड़ाम हो गई। दोपहर में गुल लाइट देर रात तक नहीं आई। भूरागढ़ समेत कई स्थानों पर एचटी लाइन टूटने से विभागीय अधिकारी व कर्मचारी परेशान रहे। अतर्रा में बिजली कटने से पेयजल आपूर्ति बाधित रही। उधर, बोर्ड व विश्वविद्यालयी परीक्षा की तैयारियों में जुटे परीक्षार्थियों की पढ़ाई भी बाधित रही।

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