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दुकानें बंद रखकर जताया विरोध
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Protests by keeping shops closed
- फोटो : BANDA
बांदा। सीएए और एनआरसी को लेकर लोगों का गुस्सा भले ही दोपहर को जुमा की नमाज के बाद सड़कों फूटा, लेकिन इसकी सुगबुगाहट सुबह से ही नजर आने लगी थी। शहर के अधिकांश मुस्लिम दुकानदारों और कारोबारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। हालांकि इसे लेकर कुछ लोगों की दलील थी कि पुलिस के लगातार गूंज रहे हूटर और गश्त से उन्हें यह आशंका हुई कि कोई बवाल हो सकता है। इसी अंदेशे में दुकानें नहीं खोलीं।
मुख्यालय के कोतवाली रोड, गुरहा कुआं चौराहा, मयूर टाकीज रोड आदि इलाकों में कपड़ा, रेडीमेड, जूता-चप्पल, टेलरिंग आदि की दुकानें हैं। अन्य इलाकों में भी अलग-अलग कुछ दुकानें हैं। शुक्रवार को इनमें तमाम दुकानें नहीं खुलीं। कुछ ने खोलीं तो कुछ देर बाद बंद कर दीं। कई दुकानदारों का कहना था कि कोई भी हंगामा या बवाल होता है तो दुकानों पर पहले गाज गिरती है। ऐसे में दुकानें बंद रखना ही बेहतर है। अलबत्ता कुछ दुकानदार दबी जुबान से सीएए और एनआरसी के प्रतीकात्मक विरोध में दुकानें बंद रखने की बात करते रहे। हालांकि किसी भी धर्मगुरु, सामाजिक संगठन या राजनीतिक नुमाइंदे ने ऐसा कोई आह्वान नहीं किया था। दिनभर बंद रहीं कुछेक दुकानें शाम को खुल गईं।
इंटरनेट बंद रहा, आपत्तिजनक पोस्ट चालू रहे
बांदा। शुक्रवार को बंद किए गए इंटरनेट का सबसे ज्यादा खामियाजा बैंक, रेलवे और अन्य सरकारी विभागों के साथ बड़ी तादाद में नेट के उपभोक्ताओं ने भोगा, लेकिन जिस उद्देश्य से नेट बंद किया गया था वह पूरा नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट पर कार्रवाई की चेतावनी और पुलिस के खोले गए विशेष सेल भी बेअसर रहा। सीएए और एनसीआर तथा एक-दूसरे संप्रदायों और वर्गों के प्रति आपत्तिजनक और कुछ बेहद आपत्तिजनक पोस्ट किए जाते रहे। इन तत्वों का नेटवर्क चलता रहा।
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पुलिस ने देर शाम तक सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर किसी भी कोई कार्रवाई नहीं की थी। देर रात पुलिस के मीडिया सेल से बताया गया कि एहतियात के तौर पर सोशल मीडिया में कुल 45 अकाउंट चिह्नित किए गए थे। इनमें 35 को बंद करा दिया गया था। किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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मुख्यालय के कोतवाली रोड, गुरहा कुआं चौराहा, मयूर टाकीज रोड आदि इलाकों में कपड़ा, रेडीमेड, जूता-चप्पल, टेलरिंग आदि की दुकानें हैं। अन्य इलाकों में भी अलग-अलग कुछ दुकानें हैं। शुक्रवार को इनमें तमाम दुकानें नहीं खुलीं। कुछ ने खोलीं तो कुछ देर बाद बंद कर दीं। कई दुकानदारों का कहना था कि कोई भी हंगामा या बवाल होता है तो दुकानों पर पहले गाज गिरती है। ऐसे में दुकानें बंद रखना ही बेहतर है। अलबत्ता कुछ दुकानदार दबी जुबान से सीएए और एनआरसी के प्रतीकात्मक विरोध में दुकानें बंद रखने की बात करते रहे। हालांकि किसी भी धर्मगुरु, सामाजिक संगठन या राजनीतिक नुमाइंदे ने ऐसा कोई आह्वान नहीं किया था। दिनभर बंद रहीं कुछेक दुकानें शाम को खुल गईं।
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इंटरनेट बंद रहा, आपत्तिजनक पोस्ट चालू रहे
बांदा। शुक्रवार को बंद किए गए इंटरनेट का सबसे ज्यादा खामियाजा बैंक, रेलवे और अन्य सरकारी विभागों के साथ बड़ी तादाद में नेट के उपभोक्ताओं ने भोगा, लेकिन जिस उद्देश्य से नेट बंद किया गया था वह पूरा नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट पर कार्रवाई की चेतावनी और पुलिस के खोले गए विशेष सेल भी बेअसर रहा। सीएए और एनसीआर तथा एक-दूसरे संप्रदायों और वर्गों के प्रति आपत्तिजनक और कुछ बेहद आपत्तिजनक पोस्ट किए जाते रहे। इन तत्वों का नेटवर्क चलता रहा।
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पुलिस ने देर शाम तक सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर किसी भी कोई कार्रवाई नहीं की थी। देर रात पुलिस के मीडिया सेल से बताया गया कि एहतियात के तौर पर सोशल मीडिया में कुल 45 अकाउंट चिह्नित किए गए थे। इनमें 35 को बंद करा दिया गया था। किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।