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जानवरों से फसल बचाने को दांव पर लगाई जान

Sat, 03 Dec 2016 10:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Sat, 03 Dec 2016 10:39 PM IST
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Protect crops from animals put their lives at stake
अन्ना गायों से रखवाली करता गुरहे गांव का किसान। - फोटो : अमर उजाला

बांदा। साढ़े तीन लाख से अधिक अन्ना मवेशियों ने चित्रकूटधाम मंडल के किसानों की नाक में दम कर रखा है। अन्ना मवेशियों को लेकर एक-दूसरे गांवों के किसान आमने-सामने आ रहे हैं। साथ ही फसल बचाने के लिए जान की परवाह किए बिना कोहरे और कड़ाके की ठंड में खुले आसमान तले खेतों में जागकर रात बिता रहे हैं।दैवी आपदाओं की मार झेल रहे बुंदेलखंड में अन्ना पशुओं की संख्या साल-दर साल बढ़ रही है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों में ही चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों मेें इनकी संख्या साढ़े तीन लाख से अधिक और जालौन जिले में एक लाख के आसपास है। इस साल बेहतर बारिश से रबी की बुआई ठीकठाक हुई है।

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खेतों में चना, गेहूं, अरहर, मटर के पौधे उग आए हैं। किसानों को अच्छी फसल की उम्मीद है, लेकिन अन्ना मवेशी इनकी चिंता बढ़ा रहे हैं। शुक्रवार को मटौंध क्षेत्र के कई गांवों के किसानों ने लगभग एक हजार अन्ना मवेशियों को बांदा शहर के रास्ते नरैनी से एमपी की ओर हांक दिया। मवेशियों ने नेशनल हाईवे समेत शहर की ट्रैफिक व्यवस्था अस्त-व्यस्त कर दी। इनके साथ किसान भी लाठियां लेकर रातभर पैदल चले। घेराबंदी के बाद भी पशुओं ने कई खेतों की फसल सफाचट कर दी।
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उधर, मशक्कत से बोई फसल बचाने के लिए किसान खेतों में खुले आसमान तले खाट डालकर डेरा डाले हैं। रजाई और अलाव के सहारे खेत में ही रात बिता रहे हैं। कोहरे और शीत लहर में इनकी जान भी जा सकती है। मथनाखेड़ा के किसान जुगुल किशोर भी इन्हीं में से एक हैं। उन्होंने बताया कि ठंड और बदमाशों से ज्यादा खौफ अन्ना मवेशियों का है। बड़ोखर खुर्द गांव के किसान छोटा भइया ने बताया कि कटीले तारों की घेराबंदी के बावजूद अन्ना मवेशी रातोंरात खेत सफाचट कर रहे हैं। प्रशासन या स्वयंसेवी संगठनों द्वारा बनाए गोशाला ठप हो चुके हैं। प्रशासन द्वारा चारा-भूसा का इंतजाम न किए जाने से यह योजना फ्लाप हो गई। पशुपालन विभाग के मुताबिक बांदा में 81,495, महोबा में 85,000, चित्रकूट में 1,10,000 और हमीरपुर में 70,450 और जालौन में एक लाख अन्ना पशु हैं।
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चित्रकूट के किसान भी अन्ना मवेशियों से परेशान हैं। लगातार तीन साल सूखे से किसानों की कमर टूट गई है। इस साल फसल की आस दिखी तो अन्ना मवेशी उसे चट कर रहे हैं। इनसे निजात के लिए कई साल से किसान संगठन और सामाजिक संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। डीएम मोनिका रानी ने हर ब्लाक में गोशाला बनाकर इनको बांधने के निर्देश दिए, लेकिन अभी तक इस योजना का क्रियान्वयन नहीं हुआ है। हमीरपुर में अन्ना मवेशी किसानों के दुश्मन बने हैं। इनसे निजात दिलाने के उपायों में जिला प्रशासन ग्राम सभाओं में पड़ी गोशाला की जमीन खोजने तक ही सीमित है। मौदहा में हजारों अन्ना मवेशियों के साथ 19 और 24 नवंबर को बड़े चौराहे पर ग्रामीण हाईवे जाम कर चुके  हैं। महोबा के किसान भी अन्ना मवेशियों से त्रस्त हैं। स्थिति यह है कि किसान रात भर जागकर फसल की रखवाली कर रहे हैं।जालौन के किसान भी अन्ना मवेशियों से परेशान हैं। आलम यह है कि फसलों की देखभाल के लिए किसानों का ज्यादातर समय खेत में बीतता हैं। जरा सी चूक पर मवेशी खेतों में घुसकर फसलें चट कर जाते हैं।


कोट--
अन्ना पशुओं को हांकने या कहीं बांधने जैसी कोई योजना नहीं है। पशु चिकित्सा विभाग पशुओं का सिर्फ इलाज करता है। अन्ना प्रथा रोकने लिए बधियाकरण और नस्ल सुधार जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। अन्ना पशुओं के बारे में प्रशासन ही कोई व्यवस्था करता है। -डॉ.एके सिंह, उप निदेशक, पशुपालन, चित्रकूटधाम मंडल।

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