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Banda News: बेशकीमती जमीनें बनीं भू-माफिया की जागीर, करोड़ों का खेल जारी
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बांदा। अवैध कब्जों और भू-माफिया की पैनी नजर के चलते बांदा की ऐतिहासिक निम्नी नहर अपनी पहचान खोती जा रही है। नवाब टैंक से केन नदी को जोड़ने वाली यह सिंचाई विभाग की नहर अब नाला से नाली बनकर रह गई है। पानी के रुख को बदलकर दबंगों ने नहर की करोड़ों रुपये की कीमती जमीन पर कब्जा कर मकान बना लिए हैं। हद तो तब हो गई जब सिंचाई विभाग द्वारा दो दशक पूर्व तटबंध बनाने के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन पर भी अवैध कब्जे हो गए। यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा, बल्कि नगर पालिका की कथित मिलीभगत से इसे और बढ़ावा मिल रहा है।
ब्रिटिश शासन काल में नवाब टैंक सहित शहर के पानी की निकासी के लिए लगभग तीन किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण किया गया था, जिसे केन नदी से जोड़ा गया था। उस समय यह नहर 28 फीट चौड़ी थी, जिसकी गवाही मर्दन नाका, खुटला और राजघाट रोड पर बनी पुलिया आज भी देती हैं। लेकिन समय के साथ, शहर के विकास की आड़ में, यह नहर धीरे-धीरे निम्नी नाला में तब्दील हो गई। नहर की बेशकीमती जमीन पर भू-माफियाओं की नजरें गड़ी थीं, जिन्होंने मौका पाते ही पानी का रुख बदलकर नहर की जमीन पर अवैध रूप से मकान बना लिए।
सिंचाई विभाग की जमीन पर भी कब्जे
वर्ष 2009 में, सिंचाई विभाग ने नहर में तटबंध बनाने के उद्देश्य से केन नदी से नवाब टैंक तक नहर के दोनों ओर लगभग 31-31 फीट जमीन का अधिग्रहण किया था और इसके लिए मुआवजा भी अदा कर दिया गया था। हालांकि, बाद में शासन स्तर पर तटबंध बनाने की योजना को रद्द कर दिया गया। इसके बाद सिंचाई विभाग ने इस मामले में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।
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शहर का गंदा पानी बहने के कारण नहर के रख-रखाव की जिम्मेदारी नगर पालिका को सौंप दी गई। लेकिन आरोप है कि नगर पालिका की मिलीभगत से दबंगों ने पानी का रुख बदलकर नहर की जमीन पर कब्जा किया और फिर नगर पालिका ने उसी ओर दीवार खड़ी कर नहर को एक संकरी नाली का रूप दे दिया। जब सिंचाई प्रखंड तृतीय ने इस पर आपत्ति जताई, तो नगर पालिका ने सिंचाई विभाग से नहर की जमीन ही मांग ली और कहा कि वे इसका कायाकल्प करेंगे।
भू-माफिया द्वारा प्लाटिंग और निर्माण
निम्नी नाले के बहाव को मोड़कर, दोनों किनारों की भूमि को पाटकर कुछ भू-माफिया यहां प्लाटिंग का धंधा चला रहे हैं। नगर पालिका द्वारा नाले को संकरा कर पक्के निर्माण कराने से दबंगों का हौसला और बढ़ गया है। सिंचाई विभाग की अनदेखी और नगर पालिका की कथित मिलीभगत के चलते नहर (निम्नी नाले) की जमीन पर कई आलीशान मकान बन चुके हैं और कुछ का निर्माण कार्य जारी है।
जिम्मेदार अधिकारियों के बयान
इस मामले पर सिंचाई विभाग, बांदा के अधीक्षण अभियंता उस्मान अली का कहना है कि नगर पालिका ने निम्नी नहर मांगी है और इसके लिए पत्र सिंचाई प्रखंड को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि शासन चाहे तो नहर नगर पालिका को दे दी जाए। अतिक्रमण की जानकारी न होने की बात कहते हुए उन्होंने जांच कराकर अतिक्रमण हटवाने का आश्वासन दिया।
नगर पालिका, बांदा के प्रतिनिधि चेयरमैन अंकित बासू ने कहा कि निम्नी नाला नहर शहर के अंदर है और अब इसमें केवल गंदा पानी बहता है। शहर के अन्य नाला-नालियां इससे जुड़े हुए हैं। उन्होंने अतिक्रमण रोकने और नहर के कायाकल्प के उद्देश्य से नहर मांगे जाने की बात कही।
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ब्रिटिश शासन काल में नवाब टैंक सहित शहर के पानी की निकासी के लिए लगभग तीन किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण किया गया था, जिसे केन नदी से जोड़ा गया था। उस समय यह नहर 28 फीट चौड़ी थी, जिसकी गवाही मर्दन नाका, खुटला और राजघाट रोड पर बनी पुलिया आज भी देती हैं। लेकिन समय के साथ, शहर के विकास की आड़ में, यह नहर धीरे-धीरे निम्नी नाला में तब्दील हो गई। नहर की बेशकीमती जमीन पर भू-माफियाओं की नजरें गड़ी थीं, जिन्होंने मौका पाते ही पानी का रुख बदलकर नहर की जमीन पर अवैध रूप से मकान बना लिए।
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सिंचाई विभाग की जमीन पर भी कब्जे
वर्ष 2009 में, सिंचाई विभाग ने नहर में तटबंध बनाने के उद्देश्य से केन नदी से नवाब टैंक तक नहर के दोनों ओर लगभग 31-31 फीट जमीन का अधिग्रहण किया था और इसके लिए मुआवजा भी अदा कर दिया गया था। हालांकि, बाद में शासन स्तर पर तटबंध बनाने की योजना को रद्द कर दिया गया। इसके बाद सिंचाई विभाग ने इस मामले में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।
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शहर का गंदा पानी बहने के कारण नहर के रख-रखाव की जिम्मेदारी नगर पालिका को सौंप दी गई। लेकिन आरोप है कि नगर पालिका की मिलीभगत से दबंगों ने पानी का रुख बदलकर नहर की जमीन पर कब्जा किया और फिर नगर पालिका ने उसी ओर दीवार खड़ी कर नहर को एक संकरी नाली का रूप दे दिया। जब सिंचाई प्रखंड तृतीय ने इस पर आपत्ति जताई, तो नगर पालिका ने सिंचाई विभाग से नहर की जमीन ही मांग ली और कहा कि वे इसका कायाकल्प करेंगे।
भू-माफिया द्वारा प्लाटिंग और निर्माण
निम्नी नाले के बहाव को मोड़कर, दोनों किनारों की भूमि को पाटकर कुछ भू-माफिया यहां प्लाटिंग का धंधा चला रहे हैं। नगर पालिका द्वारा नाले को संकरा कर पक्के निर्माण कराने से दबंगों का हौसला और बढ़ गया है। सिंचाई विभाग की अनदेखी और नगर पालिका की कथित मिलीभगत के चलते नहर (निम्नी नाले) की जमीन पर कई आलीशान मकान बन चुके हैं और कुछ का निर्माण कार्य जारी है।
जिम्मेदार अधिकारियों के बयान
इस मामले पर सिंचाई विभाग, बांदा के अधीक्षण अभियंता उस्मान अली का कहना है कि नगर पालिका ने निम्नी नहर मांगी है और इसके लिए पत्र सिंचाई प्रखंड को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि शासन चाहे तो नहर नगर पालिका को दे दी जाए। अतिक्रमण की जानकारी न होने की बात कहते हुए उन्होंने जांच कराकर अतिक्रमण हटवाने का आश्वासन दिया।
नगर पालिका, बांदा के प्रतिनिधि चेयरमैन अंकित बासू ने कहा कि निम्नी नाला नहर शहर के अंदर है और अब इसमें केवल गंदा पानी बहता है। शहर के अन्य नाला-नालियां इससे जुड़े हुए हैं। उन्होंने अतिक्रमण रोकने और नहर के कायाकल्प के उद्देश्य से नहर मांगे जाने की बात कही।