फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Pollution of fireworks can prove fatal in Corona period

कोरोना काल में घातक साबित हो सकता है आतिशबाजी का प्रदूषण

Mon, 02 Nov 2020 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 02 Nov 2020 11:39 PM IST
विज्ञापन
Pollution of fireworks can prove fatal in Corona period
डा.एसडी त्रिपाठी। - फोटो : BANDA
बांदा। कोरोना ने दीपावली पर आतिशबाजी को इस वर्ष ज्यादा खतरनाक बना दिया है। ऐसे में हमें आतिशबाजी के चयन और उपयोग में काफी सतर्कता बरतनी पड़ेगी। दीपावली पर आतिशबाजी के धमाके और धुआं पर्यावरण में 30 एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) तक बढ़ा देते हैं।
विज्ञापन

संक्रमण के दौर में यह काफी घातक साबित हो सकता है। पर्यावरण प्रदूषण विभाग के मुताबिक इस समय एक्यूआई का पैमाना लगभग 145 है, जबकि दीपावली में आतिशबाजी के बाद यह बढ़कर 185 तक पहुंच जाता है।
विज्ञापन

आतिशबाजी का बारूद और धुआं हवा में मिल जाता है। सांस के जरिये फेफड़ों तक पहुंच जाता है। ऐसे में ऑक्सीजन पहुंचने में दिक्कत होती है। दिल की गति (हार्ट बीट) भी बढ़ जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा हो जाता है। कोरोना संक्रमण काल में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के फेफड़े और दिल कमजोर हो गए हैं। उनके लिए आतिशबाजी का प्रदूषण जानलेवा साबित हो सकता है। लोगों को इसका ध्यान रखना चाहिए। -डॉ. एसडी त्रिपाठी, फिजीशियन, जिला अस्पताल, बांदा।
आंखों के लिए नुकसानदायक है बारूद
बारूद आंखों के लिए बेहद नुकसानदेह है। इससे आंखों में जलन, लाल होना और पानी आने की समस्या पैदा हो जाती है। इसके अलावा तेज आवाज के धमाकों से कान के पर्दों को नुकसान पर्दा फटने का खतरा रहता है।
व्यक्ति के सुनने की क्षमता कम हो जाती है। पटाखों के धमाकों से 100 डिसेबिल तक ध्वनि प्रदूषण होता है, जबकि कानों की क्षमता 80 डिसेबिल है। इसके ऊपर ध्वनि प्रदूषण से कान में सनसनाहट या बहरापन हो सकता है। -डॉ. मुकेश रस्तोगी, कान-नाक-गला रोग विशेषज्ञ, बांदा।
दीपावली पर सर्वाधिक सर्वाधिक प्रदूषण आतिशबाजी से होता है। इसमें पर्यावरण और ध्वनि दोनों ही प्रदूषण शामिल है। पर्यावरण में प्रदूषण का पैमाना 210 एक्यूआई तक पहुंचने पर स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे में फव्वारों से वातावरण में पानी की छिड़काव जरूरी है।

दीपावली के मद्देनजर फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी गई है। आतिशबाजी के धुओं से वायु गुणवत्ता सूचकांक में वृद्धि होगी। जिन इलाकों में प्रदूषण ज्यादा हो वहां फव्वारों से पानी का छिड़काव होना चाहिए।-धनश्याम दत्त, क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी, बांदा।

डा.मुकेश कुमार।

डा.मुकेश कुमार।- फोटो : BANDA

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed