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कमीशन के ‘खेल’ में मरीजों की हो रही जेब ढीली

Sat, 29 Jan 2022 05:06 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jan 2022 05:06 PM IST
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Patients are getting loose in the 'game' of commission
राजकीय मेडिकल कालेज, बांदा। - फोटो : BANDA
बांदा। ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’। कुछ यही हाल है रानी दुर्गावती राजकीय मेडिकल कालेज बांदा का। कमीशन का ‘खेल’ कहें या सुविधाओं का टोटा। डाक्टरों द्वारा बाहर की जांच और दवा लिखे जाने से यहां पर इलाज के लिए आने वाले मरीज/तीमारदारों को अपनी जेब ढीली करना पड़ रही है।
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दूसरी तरफ मेडिकल कालेज उप प्रधानाचार्य का कहना है कि शिकायत मिलने पर संबंधित डाक्टर के विरुद्ध जांच व कार्रवाई की जाएगी। लेकिन शिकायतकर्ता को साक्ष्य भी उपलब्ध कराने होंगे।
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राजकीय मेडिकल कालेज की शुरूआत वर्ष 2016 में हुई थी। पांच साल से चल रही ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) में अब रोजाना लगभग एक हजार मरीज आ रहे हैं। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों के अलावा सीमावर्ती मध्य प्रदेश के छतरपुर, पन्ना आदि जनपदों के मरीज यहां इलाज को आते हैं।
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मरीजों की भीड़ बढ़ने के साथ ही कमीशन का खेल भी शुरू हो गया। कुछ डायग्नोस्टिक सेंटरों और मेडिकल स्टोर संचालकों के जाल में फंसकर डाक्टर मरीजों को अल्ट्रासाउंड व बाहर की दवाएं आदि लिखने लगे हैं। इसका खुलासा खुद मरीज या उनके तीमारदार कर रहे हैं। हालांकि मेडिकल कालेज प्रशासन के समक्ष अब तक किसी मरीज या तीमारदार ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई।
केस-1 : डाक्टर बोले, यहां नहीं होता अल्ट्रासाउंड, बाहर से कराओ
मां संगीता देवी का इलाज कराने आए अखिलेश कुमार (चंदौर) का आरोप है कि मेडिकल कालेज के डाक्टर ने उसे बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कह दिया। डाक्टर का कहना था कि यहां अल्ट्रासाउंड नहीं होता है। मजबूरन उसे जिला अस्पताल रोड पर स्थित एक प्राइवेट सेंटर में 600 रुपये खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा। आने-जाने में 200 रुपये किराया अलग खर्च हुआ।
केस-2 : बाहरी दवाओं पर खर्च हो गए 1000 से ज्यादा
किसान परिवार की प्रिया देवी (खप्टिहा कलां) ने बताया कि उसका बेटा राजकुमार बीमार है। चार दिन से मेडिकल कालेज में भर्ती है। कुछ दवाएं कालेज से मिल रही हैं तो कुछ बाहर से दवाएं मंगाई जा रही हैं। बाहर से दवाएं खरीदने में वह अब तक एक हजार रुपये से ज्यादा खर्च कर चुकी हैं।

मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड मशीन है। यहां रोजाना 15 से ज्यादा जांच होती हैं। दवाएं भी पर्याप्त हैं। बाहर की दवाएं या जांच लिखने पर सख्त रोक है। फिलहाल उन्हें अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली हैं। बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने या दवाएं मंगवाने के बारे में कोई मरीज या तीमारदार पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध कराता है तो संबंधित डाक्टर के विरुद्ध जांच व कार्रवाई की जाएगी। - डा.एसके कौशल, उप प्रधानाचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज, बांदा।

अखिलेश कुमार।

अखिलेश कुमार।- फोटो : BANDA

प्रिया देवी।

प्रिया देवी।- फोटो : BANDA

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