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अबकी 535 गांवों में ही टैंकरों से आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो , बांदा
Updated Mon, 26 Feb 2018 11:41 PM IST
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जल संस्थान के खड़े पंक्चर टैंकर।
- फोटो : अमर उजाला
एक ओर जहां बुंदेलखंड में पेयजल संकट प्रभावित गांवों में 45 मिनट के अंदर पानी पहुंचाने की घोषणा की गई, दूसरी तरफ इसी घोषणा वाली बैठक में जल निगम ने बुंदेलखंड में टैंकरों से पानी पहुंचाने वाले गांवों में कटौती कर दी। पिछले साल 782 गांवों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की गई थी। इस वर्ष घटाकर 535 गांवों कर दिए हैं, यानी 247 गांवों में इस बार पानी के टैंकर नहीं जाएंगे। बुंदेलखंड के सातों जिलों में 4504 गांव हैं, जबकि टैंकरों की संख्या मात्र 1295 हैं, यानी तीन गांवों के बीच एक टैंकर।
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रविवार को उरई में हुई बुंदेलखंड के सातों जिलों की पेयजल समीक्षा बैठक में प्रदेश सरकार के कई मंत्री शामिल हुए। इसी बैठक में कहा गया कि कंट्रोल रूम में शिकायत मिलने के 45 मिनट बाद किसी भी क्षेत्र में पानी पहुंचा दिया जाएगा। दूसरी तरफ इसी बैठक में उत्तर प्रदेश जल निगम के अधिकारियों ने मंत्रियों और अन्य उच्चाधिकारियों को बताया कि पिछले वर्ष बुंदेलखंड के सातों जिलों में गर्मी के दिनों में 782 गांवों में टैंकरों से पानी पहुंचाया गया था।
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इस वर्ष अनुमानित 535 गांवों में आवश्यकता के मुताबिक टैंकरों से जलापूर्ति की जाएगी। जल निगम के मुताबिक चित्रकूटधाम मंडल के 489 गांव और झांसी मंडल के 293 गांवों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जाएगा। बुंदेलखंड के सातों जिलाें में जल निगम के पास 1295 टैंकर हैं, जबकि बुंदेलखंड में 4504 गांव हैं, यानी तीन गांवों के बीच एक ही टैंकर की उपलब्धता है। ऐसे में 45 मिनट में पानी पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। इस बाबत जल निगम अधीक्षण अभियंता एमसी श्रीवास्तव का कहना है कि किसी भी गांव में पानी का संकट नहीं होने दिया जाएगा। जल निगम और जल संस्थान मिलकर काम करेंगे। कहा कि तेजी से गिरते भू-जल स्तर के मद्देनजर पाइप लाइन पेयजल योजनाओं को ज्यादा तवज्जो दी जा रही है।
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जिला गांव टैंकरों की संख्या
बांदा 222 366
चित्रकूट 122 335
हमीरपुर 17 31
महोबा 128 154
जालौन 41 87
झांसी 154 181
ललितपुर 98 141
योग 782 1295
महोबा में सबसे अधिक संकट
बांदा। भूजल को लेकर बुंदेलखंड में सबसे खराब हालत महोबा जिले के हैं। सातों जिलों में यहां इकलौता जिला है, जहां एक भी ब्लाक सुरक्षित नहीं है। बुंदेलखंड के 37 ब्लाक (विकास खंड) में 40 सुरक्षित श्रेणी में बताए गए हैं। अलबत्ता झांसी मंडल के तीनों जिलों की स्थिति ठीक है। यहां सभी ब्लाक सुरक्षित हैं। रविवार को उरई में हुई पेयजल संबंधी बुंदेलखंड स्तरीय बैठक में जल निगम अधिकारियों ने बताया कि चट्टानी क्षेत्र होने से यहां भूजल अनिश्चित रहता है।
इसकी उपलब्धता का आंकलन सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। बांदा के दो विकास खंड सेमी क्रिटिकल और दो ब्लाक क्रिटिकल तथा तीन ब्लाक अति दोहित श्रेणी में आ चुके हैं। भूजल के मामले में सबसे गंभीर स्थिति महोबा जिले की है। यहां चार विकास खंडों में एक भी सुरक्षित नहीं है। चरखारी और कबरई ब्लाक क्रिटिकल और जैतपुर व पनवाड़ी ब्लाक अति दोहित श्रेणी में हैं। बांदा में सिर्फ तिंदवारी ब्लाक सेमी क्रिटिकल है। शेष 7 ब्लाक सुरक्षित हैं। चित्रकूट में कर्वी ब्लाक अति दोहित श्रेणी में है। शेष 4 ब्लाक सुरक्षित हैं। हमीरपुर में सुमेरपुर ब्लाक सेमी क्रिटिकल है और शेष 6 ब्लाक सुरक्षित हैं। जालौन में सभी 9 ब्लाक, झांसी में सभी 8 ब्लाक और ललितपुर में सभी 6 ब्लाक सुरक्षित हैं।