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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   One-year imprisonment for a bounced cheque of six lakh rupees

Banda News: छह लाख के चेक बाउंस पर एक साल की कैद

Tue, 27 Oct 2026 10:56 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Tue, 27 Oct 2026 10:56 PM IST
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One-year imprisonment for a bounced cheque of six lakh rupees
बांदा। छह लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में त्वरित न्यायालय ने कमलेश कुमार को एक साल की कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा नौ लाख रुपये जुर्माना लगाया है।
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सिविल जज जूनियर डिवीजन शुभांशु दास ने यह फैसला सुनाया। जुर्माना 45 दिन के भीतर रकम जमा नहीं करने पर उसे एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। फैसले के बाद अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में लेकर जिला कारागार भेज दिया गया।
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परिवादी अजय कुमार गुप्ता, प्रोपराइटर एके ट्रेडर्स, रामलीला मैदान, बांदा ने वर्ष 2024 में परिवाद दायर किया था। उनका कहना था कि कमलेश कुमार, प्रोपराइटर श्रद्धा आर्ट एंड पब्लिसिटी ने 28 जून 2023 को निजी जरूरत के लिए छह लाख रुपये उधार लिए थे। तीन-चार महीने में रकम लौटाने का वादा किया था। भुगतान के लिए अभियुक्त ने अपनी फर्म के पंजाब नेशनल बैंक खाते का छह लाख रुपये का चेक 15 नवंबर 2023 को दिया।
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परिवादी ने 29 जनवरी 2024 को चेक भारतीय स्टेट बैंक की सिटी शाखा में जमा किया, लेकिन खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया। विधिक नोटिस भेजने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया तो न्यायालय में मामला दायर किया गया।

सुनवाई के दौरान अभियुक्त ने चेक गुम होने और गिरवी रखने की बात कही। उसने यह भी तर्क दिया कि चेक पर विवरण उसने नहीं भरा था। न्यायालय ने फैसले में कहा गया कि हस्ताक्षरित खाली चेक पर किसी अन्य व्यक्ति के विवरण भरने से चेक अमान्य नहीं हो जाता। नकद लेनदेन से जुड़े आयकर प्रावधानों के उल्लंघन से भी चेक बाउंस के मामले में कानूनी देनदारी समाप्त नहीं होती।
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डेढ़ लाख के चेक बाउंस मामले में सुलह
बांदा। डेढ़ लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में दोनों पक्षों के बीच आपसी सुलह हो गई। परिवादी को ब्याज सहित दो लाख रुपये मिलने के बाद अदालत ने अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट-द्वितीय सत्यवीर सिंह ने यह फैसला सुनाया।
छोटी बाजार निवासी राकेश कुमार जैन ने मेसर्स एकेआर मोटर्स और अन्य के खिलाफ वर्ष 2025 में परिवाद दायर किया था। परिवादी के अनुसार, कविता रैकवार ने सितंबर 2019 में घरेलू जरूरतों के लिए डेढ़ लाख रुपये उधार लिए थे। दो साल में रकम लौटाने का वादा किया था।
रुपये वापस मांगने पर अक्तूबर 2021 में डेढ़ लाख रुपये का चेक दिया गया, लेकिन बैंक में खाता बंद होने के कारण चेक बाउंस हो गया। दोबारा चेक प्रस्तुत करने पर भी भुगतान नहीं हुआ। विधिक नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर मामला अदालत पहुंचा।

विचारण के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। अदालत में लिखित सुलहनामा दाखिल किया गया। परिवादी ने अपने बयान में बताया कि उसे मूल रकम और ब्याज सहित कुल दो लाख रुपये मिल चुके हैं। दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया। (ब्यूरो)
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