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सिंडीकेट से पंगा लेने पर खनिज अधिकारी रुखसत

Sun, 08 May 2016 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Sun, 08 May 2016 11:35 PM IST
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Once mess Syndicate Mining Officer Ruksat
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बांदा। सिंडीकेट से पंगा लेने पर जिला खनिज अधिकारी हवलदार सिंह यादव को शासन ने प्रभाव से हटा दिया है। उन्हें लखनऊ स्थित निदेशालय से संबंध किया है। चित्रकूट के जिला खनिज अधिकारी को बांदा का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। पिछले करीब डेढ़ वर्षों से यहां तैनात खनिज अधिकारी हवलदार सिंह यादव का अचानक तबादला कर दिया गया। हालांकि उनकी पकड़ लखनऊ तक जबरदस्त मानी जाती थी। तबादला आदेश आते ही उन्हें तत्काल कार्यमुक्त भी कर दिया गया।

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खनिज कार्यालय के स्टाफ ने उन्हें विदाई दी। चित्रकूट के खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह को बांदा का भी अतिरिक्त प्रभार फिलहाल  दिया गया। उधर, हवलदार सिंह के तबादले की चर्चा खदानों से लेकर सड़कों तक है। बताते हैं कि उनकी मौजूदा सिंडीकेट से नहीं पटी। चर्चा है कि वह खुद अपना सिंडीकेट चला रहे थे। अंतत: लखनऊ से जुड़े सिंडीकेट ने इनकी विदाई करा दी। हालांकि खनिज अधिकारी हवलदार सिंह ने खुद किसी भी सिंडीकेट चलाने या नियम विरुद्ध कामों से पूरी तरह इनकार किया। उनके कार्यकाल में अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर कार्रवाइयां भी हुईं।
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बालू कारोबार में रायल्टी से ज्यादा सिंडीकेट की आमदनी है। इस पैसे का हिस्सा बांट खदान से लेकर राजधानी लखनऊ तक होता है। सीधे सरकार से रसूख वाले ही खदान या सिंडीकेट पाते हैं। रायल्टी की दर प्रति घन मीटर है। जबकि सिंडीकेट का टैक्स प्रति ट्रक  वसूला जाता है। रायल्टी का पैसा सरकारी खजाने में जाता है और सिंडीकेट की भारी भरकम रकम ठेकेदार से लेकर लखनऊ की कई सफेद जेबों तक बंटता है। बालू के साथ सिंडीकेट का यह धंधा बसपा सरकार मेें शुरू हुआ था। अभी भी जारी है।

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