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पुरानी किताबों से नए शिक्षा सत्र की शुरुआत
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 02 Apr 2016 12:20 AM IST
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किताबें
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बांदा। परिषदीय स्कूलों में नए शिक्षासत्र की शुरुआत पुरानी किताबों और बैग के साथ हुई। अभी तक नई पाठ्य पुस्तकों का कहीं अता-पता नहीं है। उधर, बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर 2.52 लाख बच्चों से पुरानी किताबें जमा कराई जा रही हैं। स्कूलों में और भी समस्याएं और अव्यवस्थाएं हैं।
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परिषदीय स्कूलों का नया शिक्षा सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया। प्राथमिक स्तर पर 1404 स्कूलों में 173098 बच्चे और जूनियर स्तर पर 703 विद्यालयों में 79508 बच्चे पंजीकृत हैं। नई किताबें न आने तक बेसिक शिक्षा विभाग ने पुरानी किताबों से काम चलाने का निर्णय लिया है। बेसिक शिक्षा निदेशक ने वर्ष 2015-16 में परिषदीय स्कूलों के बच्चों में बांटी गई किताबों को वापस लेने के आदेश दिए हैं।
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खंड शिक्षा अधिकारी बच्चों से पुरानी किताबें जमा करवा रहे हैं। कई बच्चों की पुरानी किताबें फट गई हैं। इस पर कई स्कूलों में बच्चों से कहीं-कहीं फाइन भी वसूल रहे हैं। उधर, कई स्कूलों में पानी पीने के लिए हैंडपंप नहीं हैं। कहीं चहारदीवारी की व्यवस्था नहीं हैं। स्कूलों में साफ-सफाई नहीं कराई गई। बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी त्रिपाठी ने बताया कि अभी एक-दो माह तक पुरानी किताबों से काम चलेगा। मई तक नहीं किताबें आ जाएंगी।
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बीहड़ क्षेत्रों के स्कूलों में पड़े रहे ताले
अतर्रा। बीहड़ और दस्यु प्रभावित क्षेत्रों के स्कूल सत्र के पहले दिन ही बंद रहे। कुछ स्कूल खुले तो वहां बच्चे ही नहीं पहुंचे। फतेहगंज क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय, बघोलन व जरैला, प्राथमिक विद्यालय, गोंड़ीबाबा में प्रधानाध्यापक और शिक्षक ही गायब रहे। बघोलन में अभिभावक रामस्वरूप पटेल और बालेंद्र गौतम ने बताया कि यहां तो पूरे साल स्कूल नहीं खुलते। गोंड़ीबाबा के संतोष ने बताया कि प्रधानाध्यापक ने 2500 रुपये मासिक पर गांव के ही एक व्यक्ति को स्कूल खोलने के लिए लगा रखा है।
हवन से शिक्षा सत्र शुरू
बांदा। सरस्वती शिशु मंदिर (दीनदयाल नगर) में शुक्रवार को हवन पूजन व सुंदर कांड पाठ से नए शैक्षिक सत्र की शुरूआत हुई। प्रधानाचार्य ने बताया कि शिशु से कक्षा अष्टम तक प्रवेश भी शुरू हो गए। इस अवसर पर कैलाश बिहारी गौतम, रामकिशोर, राजेश कुमार सक्सेना, छाया सैनी, विकास निगम समेत कई टीचर मौजूद रहे।