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अब हर जिले में एक ‘जल ग्राम’
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Tue, 23 Jun 2015 11:36 PM IST
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प्रदेश के हर जिले में एक ऐसा गांव चुना जाएगा जहां जल की अत्यधिक कमी है। इस गांव के लोगों को जल संरक्षण और उसकी सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा। गांव का नाम ‘जल ग्राम’ होगा।
योजना को भी यही नाम दिया गया है। प्रदेश के मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को शासनादेश जारी कर जल क्रांति अभियान 2015-16 के अनुसार समय भीतर ‘जल ग्राम’ का चयन करने और इसके लिए जिला एवं ब्लाक स्तर पर समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।
लगातार घट रहे भूजल स्तर, वर्षा के पानी की बरबादी और सूख रही नदियों से सबक लेते हुए केेंद्र सरकार के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने पिछले माह जल क्रांति अभियान 2015-16 के दिशा-निर्देश जारी किए।
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उत्तर प्रदेश मेें विश्व पर्यावरण दिवस पर 5 जून को इस अभियान की शुरूआत हो गई है। 22 जून को डीएम को शासन से जारी पत्र में बताया गया है कि इस अभियान का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण, भूजल प्रदूषण नियंत्रण, चयनित क्षेत्रों में आर्सेनिक मुक्त कुओं का निर्माण, जन जागरूकता कार्यक्रम आदि है। जिलाधिकारी सुरेश कुमार ने मुख्य विकास अधिकारी को ‘जल ग्राम’ का चयन और जिला व ब्लाक स्तर पर समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है जल ग्राम योजना
देश के 672 जिलों में कम से कम एक गांव में जल संरक्षण और जल सुरक्षा योजनाओं पर काम होगा।
हर जिले में जल की अत्यधिक कमी वाले एक गांव को ‘जल ग्राम’ का नाम दिया जाएगा। इसका चयन जिला स्तरीय समिति करेगी।
चयनित गांव में जल की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर के आधार पर इंडेक्स वैल्यू बनेगी। उसी आधार पर गांव को योजना में शामिल किया जाएगा।
जन जागरूकता और समस्याओं के निराकरण के लिए प्रशिक्षण देकर ‘जल मित्र’ बनाए जाएंगे। महिला पंचायत सदस्यों को ‘जल मित्र’ के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
प्रत्येक ‘जल ग्राम’ के लिए एक जल स्वास्थ्य कार्ड तैयार किया जाएगा। इसमें पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता के बारे में वार्षिक सूचना भरी जाएगी।
गांव में जल के स्रोत, मात्रा और गुणवत्ता संबंधी उपलब्ध आंकड़ों और जरूरतों के आधार पर एक व्यापक एकीकृत विकास योजना बनाई जाएगी।
कृषि, पेयजल एवं स्वच्छता, शहरी विकास, ग्रामीण विकास आदि मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को भी जोड़ा जाएगा।
बंद हो चुके जलाशय, टैंक आदि की मरम्मत, पुनरुद्धार के अलावा वर्षा जल संचयन, भूमि जल का कृत्रिम पुनर्भरण, किसानों की सक्रिय भागीदारी के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
ऐसी होगी जिला स्तरीय समिति
जिलाधिकारी- अध्यक्ष। सदस्य- केेंद्रीय जल आयोग, सिंचाई विभाग, सीडीओ, पीडी, कृषि विभाग, जलापूर्ति विभाग, वाटर शेड सेल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रतिनिधि कमेटी में शामिल होंगे।
ब्लाक स्तरीय समिति
बीडीओ- अध्यक्ष। सदस्य- कृषि/बागवानी/वाटर शेड के प्रतिनिधि, डब्ल्यूयूए के प्रतिनिधि, पंचायतीराज संस्थानों के प्रतिनिधि, ग्राम जल और स्वच्छता समिति के प्रतिनिधि, संबंधित ग्राम प्रधान।
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योजना को भी यही नाम दिया गया है। प्रदेश के मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को शासनादेश जारी कर जल क्रांति अभियान 2015-16 के अनुसार समय भीतर ‘जल ग्राम’ का चयन करने और इसके लिए जिला एवं ब्लाक स्तर पर समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।
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लगातार घट रहे भूजल स्तर, वर्षा के पानी की बरबादी और सूख रही नदियों से सबक लेते हुए केेंद्र सरकार के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने पिछले माह जल क्रांति अभियान 2015-16 के दिशा-निर्देश जारी किए।
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उत्तर प्रदेश मेें विश्व पर्यावरण दिवस पर 5 जून को इस अभियान की शुरूआत हो गई है। 22 जून को डीएम को शासन से जारी पत्र में बताया गया है कि इस अभियान का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण, भूजल प्रदूषण नियंत्रण, चयनित क्षेत्रों में आर्सेनिक मुक्त कुओं का निर्माण, जन जागरूकता कार्यक्रम आदि है। जिलाधिकारी सुरेश कुमार ने मुख्य विकास अधिकारी को ‘जल ग्राम’ का चयन और जिला व ब्लाक स्तर पर समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है जल ग्राम योजना
देश के 672 जिलों में कम से कम एक गांव में जल संरक्षण और जल सुरक्षा योजनाओं पर काम होगा।
हर जिले में जल की अत्यधिक कमी वाले एक गांव को ‘जल ग्राम’ का नाम दिया जाएगा। इसका चयन जिला स्तरीय समिति करेगी।
चयनित गांव में जल की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर के आधार पर इंडेक्स वैल्यू बनेगी। उसी आधार पर गांव को योजना में शामिल किया जाएगा।
जन जागरूकता और समस्याओं के निराकरण के लिए प्रशिक्षण देकर ‘जल मित्र’ बनाए जाएंगे। महिला पंचायत सदस्यों को ‘जल मित्र’ के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
प्रत्येक ‘जल ग्राम’ के लिए एक जल स्वास्थ्य कार्ड तैयार किया जाएगा। इसमें पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता के बारे में वार्षिक सूचना भरी जाएगी।
गांव में जल के स्रोत, मात्रा और गुणवत्ता संबंधी उपलब्ध आंकड़ों और जरूरतों के आधार पर एक व्यापक एकीकृत विकास योजना बनाई जाएगी।
कृषि, पेयजल एवं स्वच्छता, शहरी विकास, ग्रामीण विकास आदि मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को भी जोड़ा जाएगा।
बंद हो चुके जलाशय, टैंक आदि की मरम्मत, पुनरुद्धार के अलावा वर्षा जल संचयन, भूमि जल का कृत्रिम पुनर्भरण, किसानों की सक्रिय भागीदारी के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
ऐसी होगी जिला स्तरीय समिति
जिलाधिकारी- अध्यक्ष। सदस्य- केेंद्रीय जल आयोग, सिंचाई विभाग, सीडीओ, पीडी, कृषि विभाग, जलापूर्ति विभाग, वाटर शेड सेल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रतिनिधि कमेटी में शामिल होंगे।
ब्लाक स्तरीय समिति
बीडीओ- अध्यक्ष। सदस्य- कृषि/बागवानी/वाटर शेड के प्रतिनिधि, डब्ल्यूयूए के प्रतिनिधि, पंचायतीराज संस्थानों के प्रतिनिधि, ग्राम जल और स्वच्छता समिति के प्रतिनिधि, संबंधित ग्राम प्रधान।