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Banda News: न एनओसी, न रजिस्ट्रेशन, फिर भी बेच रहे पानी
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बांदा। शहर में हर रोज तीन लाख रुपये का पानी बेचा जा रहा है। लाल, नीले, हरे रंग के डिब्बों में 20 से 30 रुपये में मिलने वाला पानी शुद्ध है कि नहीं, यह भी पता नहीं। जल संस्थान और जल निगम के अधिकारी तो जांच के नाम पर हाथ खड़े कर रहे हैं। भूगर्भ जल विभाग के सूत्रों का कहना है कि कई आरओ प्लांट संचालकों के पास एनओसी भी नहीं है। इसके बाद भी धंधा मजे से चल रहा है।
गर्मी बढ़ते ही आरओ प्लांट के पानी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में पानी के प्लांटों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। शहर में अकेले 60 आरओ प्लांट संचालित हो रहे हैं। इसमें से किसी का रजिस्ट्रेशन नहीं तो किसी के पास एनओसी नहीं है। इसके बाद भी ये धड़ल्ले से भूगर्भ जल का दोहन कर रहे हैं। भूगर्भ जल विभाग के सूत्रों का कहना है कि नोटिस के बाद सिर्फ दो प्लांट संचालकों ने ही पंजीयन कराया है। बाकी सब इधर-उधर की सेटिंग से धंधा चमका रहे हैं। पूरे जिले की बात करें तो 187 प्लांट चल रहे हैं।
आंख मूंदकर कर पानी का इस्तेमाल
आरओ के नाम पर बंद डिब्बों का पानी की जांच की गारंटी सिर्फ इतनी दी जाती है कि वह प्लांट से आया है। पानी में हानिकारक धूल, मिट्टी या जंग की मात्रा भी है कि नहीं। इसकी न कोई जांच होती है और न कोई शिकायत। सभी आंख बंदकर और डिब्बों पर भरोसा कर पानी पी रहे हैं।
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बोतल और पाउच के नमूने भी हुए हैं फेल
औषधि एवं खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अभिहीत अधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि बोतल और पाउच को लेकर विभाग की ओर से जांच ही नहीं बल्कि कार्रवाई भी की जाती है। दो साल में पानी के तीन सैंपल फेल हो चुके हैं। रही बात आरओ प्लांट के पानी की जांच की तो यह काम भूगर्भ जल विभाग का है।
पेट और लिवर के लिए नुकसानदायक
जिला अस्पताल के डॉक्टर विनीत सचान ने बताया कि लगातार हानिकारक पानी के सेवन से पेट संबंधी कई बीमारियां होने की आशंका रहती है। इसके अलावा दूषित पानी लिवर को भी नुकसान पहुंचाता है। जरूरी है कि पानी को स्वच्छ कर ही पीना चाहिए।
दफ्तर, दुकानों व सहालगों में बिक्री
सुबह होते ही रंग बिरंगी डिब्बों वाली गाड़ियां सड़कों पर निकल पड़ती हैं। किसी दुकान में एक तो किसी में दो, किसी दफ्तर में तीन तो चार डिब्बों की सप्लाई रोज होती है। इसके अलावा शादी-बरातों में 30- 40 डिब्बों की खपत होती है। मतलब बिना किसी बंदिश के लाखों की कमाई का धंधा बनता जा रहा है।
बड़े पैमाने पर हो रहा जलदोहन
साल दर साल भूगर्भ जल दोहन बढ़ रहा है। इसका दुष्परिणाम जनपद के ग्रामीण इलाकों में अधिक पड़ रहा है। गांवों की अधिकांश आबादी आज भी हैंडपंपों पर आश्रित है। एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक अत्यधिक भूजल दोहन से जिले के जसपुरा, तिंदवारी और जसपुरा अतिदोहित (क्रिटिकल) श्रेणी में आ गए हैं।
यह हैं कार्रवाई का प्रावधान
भूगर्भ जल विभाग में एनओसी के लिए करीब पांच हजार रुपये शुल्क जमा होता है, जो पांच साल के लिए होता है। बिना एनओसी व पंजीयन के आरओ वाटर प्लांट संचालित पाए जाने पर दो से पांच लाख रुपये जुर्माना और छह माह से तीन वर्ष तक कारावास के सजा का प्रावधान है। फिलहाल भूगर्भ जल विभाग किसी भी प्लांट संचालक पर ऐसी कार्रवाई नहीं कर पाया है।
वर्जन...
जिले में संचालित आरओ प्लांट संचालकों को नोटिस भेजकर कड़ी चेतावनी दी गई है। यदि समय से पंजीयन व एनओसी नहीं लेते हैं तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। रही बात जांच की तो पानी की जांच के बाद ही प्लांट को एनओसी दी जाती है।-- स्वप्निल कुमार राय, अधिशासी अभियंता, भूगर्भ जल, बांदा।
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गर्मी बढ़ते ही आरओ प्लांट के पानी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में पानी के प्लांटों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। शहर में अकेले 60 आरओ प्लांट संचालित हो रहे हैं। इसमें से किसी का रजिस्ट्रेशन नहीं तो किसी के पास एनओसी नहीं है। इसके बाद भी ये धड़ल्ले से भूगर्भ जल का दोहन कर रहे हैं। भूगर्भ जल विभाग के सूत्रों का कहना है कि नोटिस के बाद सिर्फ दो प्लांट संचालकों ने ही पंजीयन कराया है। बाकी सब इधर-उधर की सेटिंग से धंधा चमका रहे हैं। पूरे जिले की बात करें तो 187 प्लांट चल रहे हैं।
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आंख मूंदकर कर पानी का इस्तेमाल
आरओ के नाम पर बंद डिब्बों का पानी की जांच की गारंटी सिर्फ इतनी दी जाती है कि वह प्लांट से आया है। पानी में हानिकारक धूल, मिट्टी या जंग की मात्रा भी है कि नहीं। इसकी न कोई जांच होती है और न कोई शिकायत। सभी आंख बंदकर और डिब्बों पर भरोसा कर पानी पी रहे हैं।
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बोतल और पाउच के नमूने भी हुए हैं फेल
औषधि एवं खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अभिहीत अधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि बोतल और पाउच को लेकर विभाग की ओर से जांच ही नहीं बल्कि कार्रवाई भी की जाती है। दो साल में पानी के तीन सैंपल फेल हो चुके हैं। रही बात आरओ प्लांट के पानी की जांच की तो यह काम भूगर्भ जल विभाग का है।
पेट और लिवर के लिए नुकसानदायक
जिला अस्पताल के डॉक्टर विनीत सचान ने बताया कि लगातार हानिकारक पानी के सेवन से पेट संबंधी कई बीमारियां होने की आशंका रहती है। इसके अलावा दूषित पानी लिवर को भी नुकसान पहुंचाता है। जरूरी है कि पानी को स्वच्छ कर ही पीना चाहिए।
दफ्तर, दुकानों व सहालगों में बिक्री
सुबह होते ही रंग बिरंगी डिब्बों वाली गाड़ियां सड़कों पर निकल पड़ती हैं। किसी दुकान में एक तो किसी में दो, किसी दफ्तर में तीन तो चार डिब्बों की सप्लाई रोज होती है। इसके अलावा शादी-बरातों में 30- 40 डिब्बों की खपत होती है। मतलब बिना किसी बंदिश के लाखों की कमाई का धंधा बनता जा रहा है।
बड़े पैमाने पर हो रहा जलदोहन
साल दर साल भूगर्भ जल दोहन बढ़ रहा है। इसका दुष्परिणाम जनपद के ग्रामीण इलाकों में अधिक पड़ रहा है। गांवों की अधिकांश आबादी आज भी हैंडपंपों पर आश्रित है। एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक अत्यधिक भूजल दोहन से जिले के जसपुरा, तिंदवारी और जसपुरा अतिदोहित (क्रिटिकल) श्रेणी में आ गए हैं।
यह हैं कार्रवाई का प्रावधान
भूगर्भ जल विभाग में एनओसी के लिए करीब पांच हजार रुपये शुल्क जमा होता है, जो पांच साल के लिए होता है। बिना एनओसी व पंजीयन के आरओ वाटर प्लांट संचालित पाए जाने पर दो से पांच लाख रुपये जुर्माना और छह माह से तीन वर्ष तक कारावास के सजा का प्रावधान है। फिलहाल भूगर्भ जल विभाग किसी भी प्लांट संचालक पर ऐसी कार्रवाई नहीं कर पाया है।
वर्जन...
जिले में संचालित आरओ प्लांट संचालकों को नोटिस भेजकर कड़ी चेतावनी दी गई है। यदि समय से पंजीयन व एनओसी नहीं लेते हैं तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। रही बात जांच की तो पानी की जांच के बाद ही प्लांट को एनओसी दी जाती है।