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पटरियों की निगरानी का दावा फुस्स
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 12 Feb 2017 11:42 PM IST
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पटरियां दुरुस्त करते गैंगमैन।
- फोटो : amarujala
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लगातार पटरियां चटखने की बढ़ती घटनाओं से रेल विभाग की नींद उड़ी है। सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ पर उच्चाधिकारी सख्त हुए तो ‘राम’ भरोसे लाइनों पर गैंगमैनों की फौज नजर आने लगी। रविवार को गैंगमैन दिनभर मेन लाइन की मरम्मत और स्लीपर बदलने में जुटे रहे। उधर, खैराडा में पटरी चटखने की घटना ने पेट्रोलिंग के दावे की हवा निकाल दी। हैरत की बात है कि स्थानीय अफसरों को घटना की जानकारी नहीं रही।
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खैराडा जंक्शन के पास पटरी चटकी होने की सूचना मिलने पर उच्चाधिकारियों ने आनन-फानन मरम्मत कर लाइन दुरुस्त करा दी। इस दौरान लगभग चार घंटे तक रेल यातायात बाधित रहा। खजुराहो-कानपुर, मानिकपुर-कानपुर व झांसी पैसेंजर और कानपुर इंटरसिटी समेत कई ट्रेनें लेट हो गईं। हैरत की बात यह है कि स्थानीय पीडब्ल्यूआई के अफसरों को इस घटना की जानकारी नहीं हुई। झांसी मंडल रेल अधिकारियों की फटकार के बाद विभाग को पटरी की सुध आई। रविवार को दर्जनभर से ज्यादा गैंगमैनों ने मुख्य रेल लाइन पर पेट्रोलिंग की। कई स्थानों पर पटरी की मरम्मत हुई। यही नहीं उच्चाधिकारियों के कोप से खौफजदा गैंगमैन क्षतिग्रस्त व पुराने सीमेंट स्लीपर भी बदलने में जुटे रहे।
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पीडब्ल्यूआई प्रमुख एमपी शिवहरे ने बताया कि झांसी रूट पर कबरई और कानपुर रूट पर इंगोहटा स्टेशन तक पेट्रोलिंग क्षेत्र है। मानिकपुर तक रूट की जिम्मेदारी कर्वी रेल प्रशासन की है। रात 12 से सुबह 5 बजे तक पेट्रोलिंग होती है। हर दो किलोमीटर पर एक कर्मचारी निगरानी करता है। सुबह 5 से रात 12 बजे तक चाबी मैनों की ड्यूटी निगरानी में लगती है। हर तीन किलोमीटर पर एक चाबीमैन पटरियों की जांच करता है। क्षतिग्रस्त व पुराने स्लीपर भी तुरंत बदले जाते हैं।
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‘रेल पटरियों की निगरानी एक्स-रे मशीन से की जा रही है। पीडब्लूआई पटरियों को नीचे तक चेक करने में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। अधिकारी व कर्मचारी अल्ट्रासाउंड फ्ला डिटेक्टर मशीन (यूएसएफडी) से पेट्रोलिंग क्षेत्र में पटरियों की जांच में जुटा रहता है। पटरी पर ऊपर या नीचे कहीं भी फ्रैक्चर हुआ तो एक्स-रे मशीन से पता चल जाता है।’-माता प्रसाद शिवहरे, चीफ, पीडब्ल्यूआई (बांदा)