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खनिज विभाग का 10 अरब की कमाई का सपना टूटा

Tue, 26 Sep 2017 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 26 Sep 2017 12:22 AM IST
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Mineral Department's dream of earning 10 billion rupees broken
चित्रकूटधाम मंडल में नदी की जलधारा में मशीनों से यूं होता है अवैध खनन। - फोटो : अमर उजाला
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा ई-टेंडरिंग पर लगाई गई रोक से चित्रकूटधाम मंडल में खनिज विभाग को तगड़ी चपत लगी है। अगले माह मंडल की 174 खदानों की ई-नीलामी होनी थी। इससे लगभग 10 अरब रुपये सालाना रायल्टी राजस्व जुटाने के मंसूबे पर पानी फिर गया है।
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बांदा की 32, हमीरपुर की 127 और चित्रकूट जनपद की 16 खदानों को ई-टेंडर के जरिए नीलाम करने के लिए खनिज विभाग ने अलग-अलग तिथियों में इसी माह टेंडर आमंत्रण सूचना जारी की है। तीनों जनपदों में कुल 3849 हेक्टेयर में बालू खनन करने के लिए पट्टे दिए जा रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा लगभग 3000 हेक्टेयर क्षेत्रफल हमीरपुर जनपद की खदानों का है। चित्रकूट में 635 और बांदा में 214 हेक्टेयर में बालू खनन कराया जाना है। सभी पट्टे पांच वर्ष के लिए किए जाने हैं।
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खनिज विभाग ने हर खदान में उपलब्ध बालू का आकलन करके 150 रुपये प्रति घन मीटर की दर से रायल्टी निर्धारित की है। एक साल की रायल्टी की रकम भी बताई है। इसमें सबसे ज्यादा लगभग 5 अरब रुपये सालाना रायल्टी हमीरपुर की खदानों से मिलने का आंकलन है। चित्रकूट में एक अरब 46 करोड़ और बांदा में एक अरब 11 करोड़ रुपये सालाना रायल्टी निर्धारित की गई है।
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टेंडर डालने वालों को सालाना निर्धारित रायल्टी की 10 प्रतिशत धनराशि अर्नेस्ट मनी के रूप में पहले जमा करनी होगी। यह अर्नेस्ट मनी भी कई करोड़ रुपये होगी। टेंडर प्रकाशित होते ही तीनों जनपदों की बालू खदानों के लिए टेंडर डालने की बालू कारोबारी तैयारियों में जुट गए थे। अर्नेस्ट मनी जमा करने के लिए एक नंबर की पूंजी से बैंक ड्राफ्ट बनवाए जा रहे हैं। कई लोगों ने बनवा भी लिए हैं। अब इसी बीच एनजीटी द्वारा ई-टेंडरिंग पर रोक लगा दिए जाने से खनिज विभाग और बालू खदान लेने के इच्छुक ठेकेदारों के मंसूबों पर पानी फिर गया है।


चित्रकूटधाम मंडल की प्रमुख केन और बागै नदियों में अवैध खनन को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर एनजीटी पिछले दो वर्ष से सुनवाई कर रही है। उधर, सीबीआई जांच भी चल रही है।


बांदा के उदयपुर गांव निवासी स्वयंसेवी ब्रजमोहन यादव ने वर्ष 2013 में एनजीटी में याचिका दायर की थी कि बांदा की केन और बागै नदियों में अवैध खनन हो रहा है। पर्यावरण की एनओसी नहीं ली गई है। इस पर एनजीटी ने प्रदेश सरकार सहित बांदा डीएम और एसपी व खनिज अधिकारी तथा केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय को नोटिस जारी कर तलब किया था। पूछा था कि अवैध खनन करने वाले कौन लोग हैं? अधिकारियों द्वारा दी गई सूचना के मुताबिक एनजीटी ने दो दर्जन से ज्यादा लोगों को नोटिस जारी कीं। इनमें कई ‘माननीय’ भी हैं।


एनजीटी ने वर्ष 2015 में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अग्नेय सेल को कोर्ट कमिश्नर के रूप में केन और बागै नदियों में अवैध खनन की जांच के लिए भेजा था। उन्होंने दो दिन यहां रहकर अवैध खनन की जांच की थी और फोटोग्राफ लिए थे। एनजीटी में दाखिल की गई जांच रिपोर्ट में कोर्ट कमिश्नर ने बताया था कि यहां लगभग तीन लाख क्यूबिक मीटर बालू का अवैध खनन हुआ है। इस पर एनजीटी ने बांदा के डीएम, एसपी और खनिज अधिकारी व छतरपुर (एमपी) के एसडीएम को तलब कर अवैध खनन करने वालों के नाम पूछे थे।


अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के मुताबिक दो दर्जन से ज्यादा लोगों को नोटिस जारी की गई थी। याचिका दायरकर्ता ब्रजमोहन ने बताया कि कई आरोपियों ने एनजीटी में अब तक जवाब दाखिल नहीं किए हैं। इस पर हाल ही में 19 सितंबर को एनजीटी ने इन सभी पर 25-25 हजार रुपये जुर्माना कर दिया है। साथ ही दो हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। बिना जुर्माने के जवाब नहीं लिया जाएगा। अगली सुनवाई एनजीटी 12 अक्तूबर को करेगी।

एनजीटी ने ई-टेंडरिंग के जरिए बालू के दिए जा रहे पट्टों पर यूं ही रोक नहीं लगाई। याचिकाकर्ता ने एनजीटी के सामने कई ठोस और गंभीर आरोप साक्ष्यों के साथ पेश किए थे। हैरत की बात यह थी कि खनिज विभाग ने उन खदानों को भी ई-टेंडरिंग में शामिल कर लिया है जिनकी सीबीआई जांच चल रही है।

हमीरपुर के अधिवक्ता और समाजसेवी विजय द्विवेदी ने 19 सितंबर को दायर याचिका में कहा था कि खनन में पर्यावरण मानकों और नियमों की धज्जियां उड़ाए जाने और आवश्यक अभिलेख उपलब्ध न करा पाने पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बालू के सभी पट्टे निरस्त कर दिए थे। इसके अलावा नदियों में लिफ्टर से खनन हो रहा है। अवैध पुल बना लिए गए हैं। जलधारा प्रभावित होने से बुंदेलखंड में सूखे के हालात बन रहे हैं। भूमिगत जल स्तर भी नीचे जा रहा है।


द्विवेदी के मुताबिक इन्हीं सब बिंदुओं पर विचार के बाद एनजीटी ने 22 सितंबर को ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से बालू खदानों के किए जा रहे पट्टों के टेंडर पर रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि खनिज विभाग ने ई-टेंडर पट्टों की सूची में हमीरपुर की कई ऐसी खदानें भी शामिल कर दी हैं जिनमें अवैध खनन की जांच सीबीआई कर चुकी है और अभी जारी है। उदाहरण के लिए हमीरपुर की पत्योरा, रमेड़ी, सहजना, कनौटा, गिमुहा, नैठी, पतारा आदि खदानें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि एनजीटी ने बांदा, हमीरपुर समेत प्रदेश के आठ जिलों में टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाई है।
 
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