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अब गांवों में भूखे लोगों को भी मिडडे मील
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 18 May 2016 12:14 AM IST
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फसल बर्बादी के बाद खाने के लिए चिंतित किसान
- फोटो : अमर उजाला
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मुंगुसू पुरवा के नत्थू की मौत के बाद से प्रशासन अलर्ट है। इसी के तहत व्यवस्था की गई है कि फांकाकशी की नौबत वाले घरों के लोगों की भूख स्कूलों में बनने वाले मिडडे-मील से मिटाई जाएगी। छह साल तक के बच्चों को जिला कार्यक्रम अधिकारी, 14 वर्ष तक के बच्चों को बेसिक शिक्षा अधिकारी और इससे अधिक उम्र वालों पर प्रधान व सीडीओ निगाह रखेंगे। भूखों को भोजन कराने के लिए धन दैवी आपदा राहत कोष से खर्च किया जाएगा।
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गौरतलब है कि पिछले दिनों मुंगुसू पुरवा का नत्थू सरकारी राशन की आस में पड़ोस के गांव जा रहा था। रास्ते में खाली पेट पानी पीते ही उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद शासन से निर्देश जारी हुए थे कि चित्रकूटधाम मंडल के किसी भी गांव में यदि किसी की भूख से मौत होती है तो ग्राम प्रधान सहित स्कूल के प्रधानाध्यापक, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी पूरी तरह जिम्मेदार होंगे। इस बाबत मंडलायुक्त एल वेंकेटेश्वर लू ने हाल ही डीएम के माध्यम से अधिकारियों से लेकर प्रधानों तक को जिम्मेदारी सौंपी है।
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उनके निर्देश पर जिलाधिकारी योगेश कुमार ने पिछले सप्ताह सीडीओ रामकुमार और बीएसए ओपी त्रिपाठी, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी आरडी यादव को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि छह साल तक बच्चों के खानपान व उन्हें पोषाहार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी जिला कार्यक्रम अधिकारी की होगी।
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इससे ऊपर 14 साल तक के बच्चों को भरपेट भोजन उपलब्ध कराने का जिम्मा बेसिक शिक्षा अधिकारी का होगा। गांव में 14 साल से अधिक आयु के लोगों को जो भोजन से वंचित हैं, भुखमरी व अति कुपोषण की स्थिति में हैं, उन्हें ग्राम प्रधान तथा संकुल के प्रधानाध्यापक भोजन उपलब्ध कराएंगे। दैवी आपदा राहत कोष से एडीएम धनराशि उपलब्ध कराएंगे। यदि किसी गांव में भूख से मरने की शिकायत मिली तो ये सभी अधिकारी, प्रधान व प्रधानाचार्य नपेंगे।
चित्रकूटधाम मंडल के मंडलायुक्त एल वेंकटेश्वर लू शासन सूखे को लेकर बेहद गंभीर है। मंडल में भूख से मौत न हो, इसके लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। भूख का शिकार लोगों को एमडीएम, दैवी आपदा राहत कोष से खाना व अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। जिलाधिकारी हर सप्ताह इसकी रिपोर्ट देंगे।