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जिंदगी को ठुकराकर गंवा रहे जान
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बांदा। जरा-जरा सी बात पर अब लोग आत्महत्या जैसा कदम उठाने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। बेशकीमती जिंदगी की मानों उनके लिए कोई अहमियत ही नहीं रह गई है। खासकर जरा सी बात पर युवा वर्ग परिवार का नजर बचाकर जान गंवा दे रहे हैं।
बानगी के तौर पर एक अगस्त से अब तक लगभग 30 लोगों ने खुदकुशी कर ली। इनमें करीब 18 युवा वर्ग के शामिल हैं। युवा मामूली बात पर फांसी या जहर खाकर अपनी जान गंवा दी। इस बाबत मानसिक रोग विशेषज्ञ का कहना है कि लक्षण प्रतीत होने पर अभिभावक/परिजन हौसले से परवान चढ़ाएं।
कोरोना के डर से डिप्रेशन में आकर कई लोगों ने जान दे दी। 10 सितंबर 2003 को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की शुरुआत हुई थी। आंकड़ों के मुताबिक, एक अगस्त से अब तक जान गंवाने वाले 30 लोगों में 19 पुरुष और 11 महिलाएं हैं। इनमें 10 युवक और आठ युवतियां भी शामिल हैं।
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जो बिना संघर्ष के जिंदगी हार बैठे। जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. हरदयाल ने बताया कि इन दिनों जरा से आवेश में आकर लोग जान गंवा दे रहे हैं। कहा कि खासकर युवा वर्ग जरा सी बात पर आत्महत्या कर रहे हैं। इसके लिए घरेलू वातावरण भी जिम्मेदार है।
कलह, शराब पीना, कर्ज का बोझ, भविष्य की चिंता, बेरोजगारी आदि कुछ चार-पांच कारण इसकी ज्यादा वजह बन रही हैं। कोरोना के डर से तमाम डिप्रेशन में आ रहे हैं। उन्हें जागरुक करने की जरूरत है। परिजन और अभिभावक दोस्त जैसा व्यवहार करें। उनकी समस्याएं समझें और निदान कराने की कोशिश करें।
साथ ही उनका हौसला बढ़ाएं। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग कराकर इलाज कराएं। मानसिक रोग विशेषज्ञ ने दावा किया कि उन्होंने अब तक 75 लोगों को काउंसलिंग और इलाज करके आत्महत्या करने से बचाया है।
आत्महत्या करने से नजर आते ये लक्षण
एकांत में रहना, किसी से बातचीत न करना, गुमशुम और उदास रहना, समय पर खाना न खाना, बात-बात पर चिड़चिड़ाना, किसी काम में मन न लगना आदि। मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. हरदयाल ने सलाह दी कि यह लक्षण प्रतीत होने पर तुरंत निगरानी करना चाहिए। समस्या जानने की कोशिश करना चाहिए।
केस-एक
फतेहगंज क्षेत्र के जबरापुर गांव में 18 वर्षीय अंशुमान ने दो अगस्त को इस बात से नाराज होकर फांसी लगाकर जान दे दी थी कि उसे बिना बताए बाइक फाइनेंस कराने पर पिता लालमणी ने डांट दिया था। किस्त की रसीद आने पर घरवालों को फाइनेंस की जानकारी हुई थी। अंशुमान एकलौती संतान थी।
पैलानी क्षेत्र के कचार बस्ती में भोला की पत्नी श्यामकली (35) ने 3 अगस्त की रात कमरे में साड़ी से फांसी लगा ली थी। पति ने बताया था कि रात को खाना न बनाने को लेकर कहासुनी हो गई थी। इसी बात से नाराज होकर उसने आत्महत्या कर ली थी।
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बानगी के तौर पर एक अगस्त से अब तक लगभग 30 लोगों ने खुदकुशी कर ली। इनमें करीब 18 युवा वर्ग के शामिल हैं। युवा मामूली बात पर फांसी या जहर खाकर अपनी जान गंवा दी। इस बाबत मानसिक रोग विशेषज्ञ का कहना है कि लक्षण प्रतीत होने पर अभिभावक/परिजन हौसले से परवान चढ़ाएं।
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कोरोना के डर से डिप्रेशन में आकर कई लोगों ने जान दे दी। 10 सितंबर 2003 को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की शुरुआत हुई थी। आंकड़ों के मुताबिक, एक अगस्त से अब तक जान गंवाने वाले 30 लोगों में 19 पुरुष और 11 महिलाएं हैं। इनमें 10 युवक और आठ युवतियां भी शामिल हैं।
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जो बिना संघर्ष के जिंदगी हार बैठे। जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. हरदयाल ने बताया कि इन दिनों जरा से आवेश में आकर लोग जान गंवा दे रहे हैं। कहा कि खासकर युवा वर्ग जरा सी बात पर आत्महत्या कर रहे हैं। इसके लिए घरेलू वातावरण भी जिम्मेदार है।
कलह, शराब पीना, कर्ज का बोझ, भविष्य की चिंता, बेरोजगारी आदि कुछ चार-पांच कारण इसकी ज्यादा वजह बन रही हैं। कोरोना के डर से तमाम डिप्रेशन में आ रहे हैं। उन्हें जागरुक करने की जरूरत है। परिजन और अभिभावक दोस्त जैसा व्यवहार करें। उनकी समस्याएं समझें और निदान कराने की कोशिश करें।
साथ ही उनका हौसला बढ़ाएं। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग कराकर इलाज कराएं। मानसिक रोग विशेषज्ञ ने दावा किया कि उन्होंने अब तक 75 लोगों को काउंसलिंग और इलाज करके आत्महत्या करने से बचाया है।
आत्महत्या करने से नजर आते ये लक्षण
एकांत में रहना, किसी से बातचीत न करना, गुमशुम और उदास रहना, समय पर खाना न खाना, बात-बात पर चिड़चिड़ाना, किसी काम में मन न लगना आदि। मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. हरदयाल ने सलाह दी कि यह लक्षण प्रतीत होने पर तुरंत निगरानी करना चाहिए। समस्या जानने की कोशिश करना चाहिए।
केस-एक
फतेहगंज क्षेत्र के जबरापुर गांव में 18 वर्षीय अंशुमान ने दो अगस्त को इस बात से नाराज होकर फांसी लगाकर जान दे दी थी कि उसे बिना बताए बाइक फाइनेंस कराने पर पिता लालमणी ने डांट दिया था। किस्त की रसीद आने पर घरवालों को फाइनेंस की जानकारी हुई थी। अंशुमान एकलौती संतान थी।
पैलानी क्षेत्र के कचार बस्ती में भोला की पत्नी श्यामकली (35) ने 3 अगस्त की रात कमरे में साड़ी से फांसी लगा ली थी। पति ने बताया था कि रात को खाना न बनाने को लेकर कहासुनी हो गई थी। इसी बात से नाराज होकर उसने आत्महत्या कर ली थी।