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लोहिया गांवों में फिर पौने 8 करोड़ खर्च करने की तैयारी

Tue, 19 Jul 2016 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Tue, 19 Jul 2016 11:41 PM IST
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Lohia villages throw again preparing to spend 8 million
बड़ा गांव कोटरा में जारी है पुलिस की छापामारी - फोटो : अमर उजाला

बांदा। करोड़ों रुपये पहले ही खर्चने के बाद भी गांव की तस्वीर में कोई सुधार न आने के बाद अब लोहिया गांवों में फिर 7 करोड़ 78 लाख रुपये खपा दिए जाएंगे। यह पैसा इस वर्ष चयनित 28 ग्राम पंचायतों में आरसीसी रोड और केसीसी ड्रेन पर खर्च होगा। शासन ने अनुदान संख्या 83 और 14 से पंचायती राज विभाग को यह बजट भेजा है। ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग निर्माण कराएगा। पिछले साल भी लोहिया गांवों में इन्हें कामोें में 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। वर्ष 2016-17 के लिए चयनित 28 गांवों को अब 13 बिंदुओं पर संतृप्त करना है। इसके लिए शासन ने चालू वित्तीय वर्ष में अनुदान संख्या 83 से 239.994 लाख और अनुदान संख्या 14 से 538.994 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। दोनों अनुदान के 7.78 करोड़ रुपये से लोहिया गांवों में सीसी सड़क और केसीसी ड्रेनेज बनाए जाएंगे।

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यह काम ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को सौंपा गया है। आरईएस के सहायक अभियंता मुकेश गुप्ता ने पंचायती राज विभाग को पत्र भेजकर धनराशि हस्तांतरित करने की मांग की है। ताकि इन गांवों में सड़कों का काम कराया जा सके। उधर, डीपीआरओ द्वारा सीडीओ से अनुमोदन कराकर स्वीकृत धनराशि आरईएस के खाते में भेजी जा रही है। सीडीओ ने आरईएस को सड़कों व ड्रेनेज की गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए समय से कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।  गौरतलब है कि वर्ष 2015-16 में भी 28 लोहिया गांवों का चयन किया गया था। प्रशासन द्वारा इन गांवों में हर गली को पक्की करने और सभी सुविधाओं से संतृप्त करने का दावा किया जा रहा है। लोहिया गांवों में सड़कों पर पिछले साल करीब साढ़े 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। आरईएस ही कार्यदाई संस्था रही है लेकिन किसी भी गांव में काम नहीं दिखाई दे रहा है। बड़ोखर खुर्द ब्लाक के लोहिया गांव अछरौड़ व कुरौली को बानगी के तौर पर लिया जा सकता है। यहां आज भी गांव में घुसते ही कीचड़ युक्त सड़कें स्वागत करती हैं। न आरसीसी सड़कें नजर आ रही हैं और न ही केसीसी ड्रेनेज।
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‘आरसीसी और ड्रेनेज के लिए पैसा आरईएस के खाते में रिलीज किया जा रहा है। सड़कों व ड्रेनेज की गुणवत्ता की जांच तकनीकी टीम से कराई जाएगी। यदि मानक में कहीं भी समझौता होगा तो संबंधित कार्यदाई संस्था के खिलाफ कार्रवाई व रिकवरी की जाएगी। काम भी समय से पूरा करना होगा।’
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रामकुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी, बांदा

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