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हैंडपंप की बहू की जिद पूरी करने को लिया कर्ज

Fri, 08 Jun 2018 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Fri, 08 Jun 2018 11:59 PM IST
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Loans taken to fulfill the promise of the daughter-in-law of the handpumps
पानी के लिए भटकती शांति। - फोटो : अमर उजाला

गिरता जलस्तर और तपता मौसम बुंदेलखंड के बाशिंदों के रिश्तों पर भी भारी पड़ने लगा है। पानी के लिए रोज 500 मीटर की दौड़ और चटख धूप के बीच कतार में लगने की दिनचर्या से टूटकर एक महिला ने ससुराल छोड़ मायके का रास्ता पकड़ लिया। टॉयलेट की तरह घर में हैंडपंप होने पर ही घर वापसी की शर्त रख दी। हैंडपंप के लिए 30 हजार रुपये कर्ज जुटाकर ससुर ने तीन माह बाद बहू की घर वापसी सुनिश्चित कर ली है।

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यह आपबीती है नीबी से ब्याह कर कुलसारी गांव में आई भोली की। कल्लू गर्ग की पुत्रवधू भोली को जितनी फिक्र दो अबोध बच्चों की परवरिश की थी, उससे ज्यादा चिंता घर में पानी के बंदोबस्त की। घर वाले बताते हैं कि भूगर्भ जल तेजी से नीचे खिसकने से ज्यादातर हैंडपंप जवाब दे गए तो कुएं और तालाब सूखे की भेंट चढ़ गए। लिहाजा पानी का बंदोबस्त करने के लिए भोली को प्रतिदिन 500 मीटर दूर तक जाना पड़ता था। उसी हैंडपंप से पानी मिल पाने के कारण वहां तमाम लोगों के जुटने से घंटों इंतजार भी करना पड़ता था। भोली का कहना है कि इस दिनचर्या से खुद की सेहत बिगड़ने लगी तो लंबी गैर हाजिरी से घर में अकेले रहने वाले छोटे बच्चे कुम्हलाने लगे थे। लिहाजा हैंडपंप की शर्त रखकर मायके का रुख करना उसकी मजबूरी बन गई।
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भोली के ससुर कल्लू गर्ग ने बहू की इस शर्त को सकारात्मक रूप से लिया। तीस हजार रुपये कर्ज लेकर घर में हैंडपंप लगवाने का रास्ता तैयार करने के बाद वह बहू को घर लौटा लाए। भोले गर्ग का कहना है कि 30 फीट गहराई का बोरिंग कराते हुए जल्द घर में हैंडपंप चालू करा लिया जाएगा।
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जल संकट से जूझ रहे कई गांव
 नरैनी क्षेत्र के ज्यादातर गांवों में पानी का संकट है। एमपी की सरहद से जुड़े बांदा जिले के करतल, कालिंजर आदि क्षेत्रों में भूजल स्तर लगभग 30 फीट नीचे तक चला गया है। कुएं, तालाब पहले ही सूख गए हैं। हैंडपंप भी तेजी से जवाब दे रहे हैं। इक्का-दुक्का हैंडपंप पानी दे रहे हैं, वहां भीड़ लगी रहती है। कुलसारी गांव में बस्ती के अंदर लगे दो हैंडपंप बरसों से खराब हैं। बस्ती से काफी दूर खेत में लगे इकलौते हैंडपंप पर लंबी लाइन लगती है।


दो हजार की आबादी वाले इस गांव में हाल ही में पानी का टैंकर आता था। टैंकर आते ही लूटमार मच जाती थी। झगड़े होने लगते थे। करीब एक हफ्ते से टैंकर आना बंद हो गया है। ऐसी ही स्थिति छीछन गांव की भी है। बस्ती में लगे चारों हैंडपंप जवाब दे चुके हैं। दूर लगे हैंडपंप से गांव के लोग पानी ढो रहे हैं। यहां की शांति का कहना है कि हैंडपंपों पर लंबी लाइन लग रही है। घंटों बाद बारी आती है। विद्याधाम समिति के मंत्री राजाभइया नदियों किनारे बालू के अंधाधुंध खनन को घटते जल स्तर की बड़ी वजह मानते हैं। कहते हैं कि हैंडपंप लगातार जवाब दे रहे हैं लेकिन सरकारी मशीनरी गंभीरता से नहीं ले रही। दूसरी ओर खंड विकास अधिकारी लाल व्रत यादव का कहना है कि गांवों के नजदीक की नदियों में पानी की कमी नहीं है। गांव वाले नदी से पानी की जरूरत पूरी कर लेते हैं।

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