{"_id":"5751cdc04f1c1b7d2810c7ee","slug":"listen-to-the-government-bundelkhand-darka","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुन लो सरकार, बुंदेलखंड की दरका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुन लो सरकार, बुंदेलखंड की दरका
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 04 Jun 2016 12:04 AM IST
विज्ञापन
समाजवादी सूखा राहत पैकेट सामग्री।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
40 हजार से ज्यादा गरीबों को नहीं मिले सूखा राहत पैकेट
विज्ञापन
समाजवादी सूखा राहत पैकेट सपा के प्रचार का जरिया बनकर रह गए हैं। सपाई रंग वाले राशन पैकेटों का वितरण भी सपा नेताओं के हाथों कराया जा रहा है। बुंदेलखंड में लगभग पौने दो लाख अंत्योदय राशनकार्ड धारक हैं। स्थानीय प्रशासन के दावों को ही सही मान लिया जाए तो भी अभी बमुश्किल 1.20 लाख राहत पैकेट ही बांटे गए हैं।
हकीकत यह है कि पैकेट से वंचित गरीबों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। गांव-गांव छोटे-बड़े सपा नेता राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में अपने हाथों राहत पैकेट बांट रहे हैं। सरकारी धन से दी जा रही मदद में किसी भी अन्य राजनीतिक दलों के नुमाइंदों को शामिल नहीं किया जा रहा। कांग्रेस, भाजपा और बसपा इसका विरोध कर रहे हैं। सबसे ज्यादा 48,131 अंत्योदय कार्ड धारक बांदा जिले में हैं। यहां 40 हजार अंत्योदय कार्ड धारकों को पैकेट बांटा जाना है।
विज्ञापन
जून शुरू हो चुका है, अभी पिछले मई के पैकेट नहीं बंट पाए हैं। मात्र 27 हजार पैकेट ही बांटे गए हैं। चित्रकूट में 22,773 कार्ड धारकों में प्रशासन लगभग सभी को राहत पैकेट वितरित करने का दावा कर रहा है। हमीरपुर में पैकेट वितरण बेहद सुस्त है।
विज्ञापन
यहां 36,017 अंत्योदय कार्ड धारकों में अब तक करीब 12 हजार को ही राहत पैकेट मिला है। महोबा में 16,224 अंत्योदय कार्ड धारक हैं। यहां लगभग सभी को पैकेट वितरित होने का दावा किया जा रहा है। जालौन में 37,698 अंत्योदय कार्ड धारक हैं। इनमें करीब 33 हजार को पैकेट बांटने के आंकड़े दिए गए हैं। अभी भी बुंदेलखंड में 40 हजार से ज्यादा लोग राहत पैकेट से वंचित हैं।
24 घंटे बिजली कभी नहीं मिली सीएम साहब!
बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली का मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा दिखाया गया सपना हकीकत में बदल जाता तो शायद सूखा इतनी दुर्दशा न कर पाता। किसानों और आम लोगों को काफी हद तक राहत मिल जाती। मुख्यमंत्री की घोषणा से 50 फीसदी कटौती कर मात्र 12 घंटे बिजली दी जा रही है। पखवारे भर से हालात और खराब हो गए हैं। खेत तो पहले ही सूख गए थे।
अब लोगों के हलक भी सूख रहे हैं। उन्हें पीने का पानी नहीं मिल रहा। जनवरी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैबिनेट की बैठक में निर्णय के बाद बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली आपूर्ति के आदेश दिए थे। इस आदेश का अक्षरश: पालन शुरू से ही नहीं हुआ।
पावर कारपोरेशन अपनी मजबूरियां बताकर बमुश्किल 15 से 18 घंटे बिजली कुछ गांवों में देता रहा। अब यह भी फ्लाप हो गया है। कई गांवों में तो आंधी से आए फाल्टों से हफ्तों से आपूर्ति ठप है। अब पावर कारपोरेशन अभियंता उत्पादन में कमी बता इमरजेंसी कटौती का हवाला देकर शहरों को 12 घंटे और गांवों में 8 से 10 घंटे बिजली दे पा रहे हैं। बिजली की हायतौबा पर शासन और प्रशासन खामोश हैं।
ब्लाकों को नहीं मिला नगर पंचायत का दर्जा
महोबा। तीन साल पहले ब्लाक पनवाड़ी और ब्लाक जैतपुर को नगर पंचायत एवं ग्राम पंचायत श्रीनगर को ब्लाक का दर्जा दिए जाने की मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं पर भले ही अमल न किया गया हो लेकिन सूखे के संकट में चरखारी के तालाब खुदाई की हकीकत जानने आ रहे मुख्यमंत्री से अभी भी जिलेवासी बहुत कुछ उम्मीदें लगाए हुए है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली दफा जून 2013 को लेपटाप वितरण कार्यक्रम में जिला मुख्यालय आए सीएम अखिलेश यादव ने कार्यक्रम स्थल पालीटेकिभनक में ब्लाक चरखारी और ब्लाक जैतपुर को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने की घोषणा की थी। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी आज तक दोनों ब्लाकों को नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिला और न ही 18 हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत श्रीनगर को ब्लाक का दर्जा मिला।
इतना सब होने के बाद भी चार जून को आ रहे सूबे के मुखिया से जनपदवासियों जिले को बहुत कुछ मिलने की उम्मीदे लगाए है। इसी तरह ग्राम पंचायत श्रीनगर को ब्लाक का दर्जा दिए जाने की घोषणा की थी।
इसके बाद ग्राम पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पारित करके हाइवे में ब्लाक कार्यालय के लिए जमीन दे दी गई थी और कुल्लाई पहाड़ी में ढाई एकड़ जमीन ब्लाक के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रस्ताव पारित कराकर ग्राम विकास आयुक्त के निर्देश पर उपलब्घ कराई गई थी। शासन को इसका प्रस्ताव भी भेज दिया गया था। लेकिन ब्लाक का दर्जा दिए जाने संबंधी फाइल ठंडे बस्ते में चली गई। तीन साल पहले की गई घोषणाओं पर आज तक अमल नहीं हुआ।