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हत्या में जेठानी और दो भतीजों को उम्र कैद
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युवती की कुल्हाड़ी से हत्या के जुर्म में जेठानी और दो भतीजों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इस मामले में आरोपी रहे जेठ की मौत हो चुकी है।
अतर्रा थानाक्षेत्र के गोखिया गांव निवासी राजाभइया राजपूत ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पहली अगस्त 2014 की रात वह परिवार के साथ सो रहा था। तभी उसका भतीजा पप्पू उर्फ इंद्रजीत राजपूत पुत्र राममिलन छत से चढ़कर अंदर आ गया और दरवाजे खोल दिए।
तभी राजाभइया का भाई राममिलन राजपूत, भाभी माया देवी और भतीजा सभाजीत अंदर आ गए। ये सब गोखिया गांव निवासी हैं। उसकी पत्नी रानी राजपूत (35) को घसीटकर बाहर खींच ले गए। कहा कि गांव के राजेश विश्वकर्मा की हत्या का राज रानी ने खोल दिया था। जिससे वह हत्या में फंस गए। यह कहकर इन सभी ने रानी की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी और फरार हो गए।
पुलिस ने विवेचना के बाद पप्पू राजपूत, माया देवी राजपूत और सभाजीत के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। आरोपी राममिलन की इससे पहले ही मौत हो गई। पप्पू को छोड़कर अन्य आरोपी जमानत पर बाहर आ गए।
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मंगलवार को सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश ने तीनों अभियुक्तों को धारा 302 में उम्रकैद व दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर 3-3 माह की और जेल होगी।
जुर्माना की 75 फीसदी रकम मृतका के आश्रितों को दी जाएगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता आशुतोष ने पांच गवाह पेश किए और पैरवी की।
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अतर्रा थानाक्षेत्र के गोखिया गांव निवासी राजाभइया राजपूत ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पहली अगस्त 2014 की रात वह परिवार के साथ सो रहा था। तभी उसका भतीजा पप्पू उर्फ इंद्रजीत राजपूत पुत्र राममिलन छत से चढ़कर अंदर आ गया और दरवाजे खोल दिए।
तभी राजाभइया का भाई राममिलन राजपूत, भाभी माया देवी और भतीजा सभाजीत अंदर आ गए। ये सब गोखिया गांव निवासी हैं। उसकी पत्नी रानी राजपूत (35) को घसीटकर बाहर खींच ले गए। कहा कि गांव के राजेश विश्वकर्मा की हत्या का राज रानी ने खोल दिया था। जिससे वह हत्या में फंस गए। यह कहकर इन सभी ने रानी की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी और फरार हो गए।
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पुलिस ने विवेचना के बाद पप्पू राजपूत, माया देवी राजपूत और सभाजीत के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। आरोपी राममिलन की इससे पहले ही मौत हो गई। पप्पू को छोड़कर अन्य आरोपी जमानत पर बाहर आ गए।
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मंगलवार को सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश ने तीनों अभियुक्तों को धारा 302 में उम्रकैद व दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर 3-3 माह की और जेल होगी।
जुर्माना की 75 फीसदी रकम मृतका के आश्रितों को दी जाएगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता आशुतोष ने पांच गवाह पेश किए और पैरवी की।