लेखपाल हड़ताल पर, बाढ़ पीड़ितों को दिक्कत
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बांदा। बाढ़ राहत कार्यों से लेकर मतदाता सूची और प्रशासन के अन्य तमाम छोटे-बड़े कामों में अहम भूमिका निभाने वाले लेखपालों की प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू हो गई। धरना देकर मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा। पहले ही दिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और राहत कैंपों में व्यवस्था गड़बड़ाने लगी। हालांकि अधिकारी हड़ताल को बेअसर बता रहे हैं। पूरे जनपद में कार्यरत 438 लेखपालों के हड़ताल पर जाने पर लेखपाल संघ ने दावा किया है। छह प्रमुख मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने हड़ताल शुरू कर दी है। फौरी तौर पर इसका असर यहां चल रही बाढ़ और उसके राहत कार्यों पर पड़ा है। बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राशन की व्यवस्था करने और बाढ़ से हुई क्षति का सर्वे व आंकलन करने की जिम्मेदारी लेखपालों की है। हड़ताल से यह सभी काम ठप हो गए हैं। बांदा जनपद की पांचों तहसीलों में सभी 438 लेखपालों के हड़ताल पर चले जाने का दावा किया गया है।
लेखपाल संघ जिलाध्यक्ष चंद्रभूषण पांडेय ने बताया कि बांदा सदर में 94, बबेरू में 139, अतर्रा में 72, नरैनी में 68 और पैलानी में 65 लेखपाल हड़ताल में शामिल हैं। अध्यक्ष ने दावा किया कि बाढ़ समेत राजस्व विभाग के तमाम महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। छात्र-छात्राआें को आय, जाति, निवास इत्यादि प्रमाण पत्रों के लिए भटकना पड़ रहा है। किसानों को खसरा खतौनी की नकल भी नहीं मिल रही है। हड़ताली लेखपालों ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना सभा की मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रशासन के माध्यम से भेजा है। अनुरोध किया है कि लेखपाल संवर्ग की मांगे पूरी करने के लिए मुख्यमंत्री खुद हस्तक्षेप करें। संघ अध्यक्ष चंद्रभूषण पांडेय, महामंत्री अलखराम अवस्थी समेत प्रदेश सहसचिव मूलचंद्र पटेल, राजेंद्र सिंह पटेल, शिव कुमार यादव, जितेंद्र कुमार मिश्रा, धीरेंद्र सिंह, सुशील कुमार श्रीवास्तव, उप मंत्री भानु प्रताप गुप्ता, गुलाब सिंह, संतोष त्रिपाठी, पुरुषोत्तम सिंह, अवधेश सिंह आदि शामिल रहे।