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कपट से धोखा और हिंसा जैसी बुराइयों का होता जन्म
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बांदा। पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म के पालन के बारे में बताया गया। जैन मुनि ने प्रवचन में कहा कि प्राणी का जीवन सरल होना चाहिए। कपटपूर्ण व्यवहार से धोखा, हिंसा जैसी बुराइयों का जन्म होता है।
रविवार को पर्व की शुरुआत में भगवान का अभिषेक और पूजा विधान हुआ। चैत्यालय में भक्तों ने भगवान महावीर की वाणी को सुना और ग्रंथ का पाठ किया। धार्मिक प्रतियोगिताएं हुईं। इसमें तमाम बच्चों ने प्रतिभाग किया।
छोटी बाजार में स्थित दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य अभिनंदन सागर महाराज ने प्रवचन दिया। कहा कि निश्छल व्यक्ति कभी भी दूसरे से छल नहीं करता। बेईमानी की प्रवृत्ति से अनाचार फैलता है।
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जैन धर्म में अरहंत देव ने कहा कि मन बचन काय (शरीर) से एक होना उत्तम आर्जव धर्म है। कपट या छलावा करने वाला दुख को भोगता है। सुखी रहने के लिए उत्तम आर्जव धर्म का पालन जरूरी है।
इस अवसर पर मीडिया प्रभारी दिलीप जैन, सुरेश जैन, रत्नेश जैन, अर्पित जैन, अमन जैन, रूपेश जैन, प्रदीप जैन, शैलेंद्र जैन, सुशील जैन, अरविंद, राकेश जैन, मिश्रीलाल, महेंद्र, नरेंद्र, सनत कुमार, सुबोध जैन आदि उपस्थित रहे।
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रविवार को पर्व की शुरुआत में भगवान का अभिषेक और पूजा विधान हुआ। चैत्यालय में भक्तों ने भगवान महावीर की वाणी को सुना और ग्रंथ का पाठ किया। धार्मिक प्रतियोगिताएं हुईं। इसमें तमाम बच्चों ने प्रतिभाग किया।
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छोटी बाजार में स्थित दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य अभिनंदन सागर महाराज ने प्रवचन दिया। कहा कि निश्छल व्यक्ति कभी भी दूसरे से छल नहीं करता। बेईमानी की प्रवृत्ति से अनाचार फैलता है।
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जैन धर्म में अरहंत देव ने कहा कि मन बचन काय (शरीर) से एक होना उत्तम आर्जव धर्म है। कपट या छलावा करने वाला दुख को भोगता है। सुखी रहने के लिए उत्तम आर्जव धर्म का पालन जरूरी है।
इस अवसर पर मीडिया प्रभारी दिलीप जैन, सुरेश जैन, रत्नेश जैन, अर्पित जैन, अमन जैन, रूपेश जैन, प्रदीप जैन, शैलेंद्र जैन, सुशील जैन, अरविंद, राकेश जैन, मिश्रीलाल, महेंद्र, नरेंद्र, सनत कुमार, सुबोध जैन आदि उपस्थित रहे।