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आज जन्मेंगे कन्हाई, घर-घर गूंजेंगी बधाई
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बांदा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व सोमवार (आज) को मनाया जाएगा। 15 साल बाद ऐसा संयोग आया है जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र एक साथ हैं। पूर्व संध्या पर ही मंदिरों को सजा दिया गया है। घरों में झांकियां सजाई जा रही हैं।
बाजार में भी श्रीकृष्ण की प्रतिमाएं और अन्य पूजन सामग्री खरीदने वालों की भीड़ रही। रविवार की रात 10 बजकर 10 मिनट पर अष्टमी तिथि आ जाने पर सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
शहर के प्रमुख महेश्वरी देवी मंदिर, लक्ष्मी-नारायण मंदिर (छोटी बाजार), अयोध्यावासी मंदिर, राधा-कृष्ण (बांबेश्वर), संकट मोचन आदि मंदिरों को पूर्व संध्या पर रंग-रोगन और रंगबिरंगी बिजली झालरों से सजाया गया है। जन्माष्टमी पर्व की तैयारी को लेकर बाजारों में पूजन सामग्री खरीदने वालों की भीड़ रही।
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लड्डू गोपाल और पालन व वस्त्र आदि भी खूब लिए गए। उधर, कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर लागू रात्रि कर्फ्यू के बावजूद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का जश्न मनाने को लेकर लोग उत्साहित हैं।
सिर्फ आज मनाई जाएगी जन्माष्टमी
पंडितों के मुताबिक 15 साल बाद ऐसा संयोग आया है, जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र एक साथ पड़े हैं। इसलिए सिर्फ सोमवार को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी। पंडित हर्षित महाराज ने बताया कि अष्टमी तिथि रविवार की रात 10 बजकर 10 मिनट से शुरू होकर सोमवार की रात 12 बजकर 14 मिनट तक रहेगी।
कृतिका नक्षत्र सोमवार को सुबह 6 बजकर 41 मिनट पर खत्म हो जाएगा। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र शुरू हो जाएगा। यह मंगलवार को सुबह 11 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण अवतार (जन्माष्टमी) पूजन का मुहूर्त 11 बजकर 30 मिनट से शुरू हो जाएगा।
अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र साथ होने से रात 12 बजे भगवान के जन्म का शुभ संयोग रहेगा।
ऐसे करें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूजन---
चौकी में लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। जन्म पर खीरा काटकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मनाएं। लड्डू गोपाल का गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं। नए वस्त्र, जनेऊ पहनाएं। चंदन, चावल, कुमकुम से तिलक करें। फूलमाला पहनाएं।
माखन-मिश्री का भोग लगाएं। तुलसी की पत्ती जरूर अर्पित करें। भोग के बाद श्रीकृष्ण को गंगाजल अर्पित करें। धूप-दीप से आरती करें।
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बाजार में भी श्रीकृष्ण की प्रतिमाएं और अन्य पूजन सामग्री खरीदने वालों की भीड़ रही। रविवार की रात 10 बजकर 10 मिनट पर अष्टमी तिथि आ जाने पर सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
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शहर के प्रमुख महेश्वरी देवी मंदिर, लक्ष्मी-नारायण मंदिर (छोटी बाजार), अयोध्यावासी मंदिर, राधा-कृष्ण (बांबेश्वर), संकट मोचन आदि मंदिरों को पूर्व संध्या पर रंग-रोगन और रंगबिरंगी बिजली झालरों से सजाया गया है। जन्माष्टमी पर्व की तैयारी को लेकर बाजारों में पूजन सामग्री खरीदने वालों की भीड़ रही।
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लड्डू गोपाल और पालन व वस्त्र आदि भी खूब लिए गए। उधर, कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर लागू रात्रि कर्फ्यू के बावजूद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का जश्न मनाने को लेकर लोग उत्साहित हैं।
सिर्फ आज मनाई जाएगी जन्माष्टमी
पंडितों के मुताबिक 15 साल बाद ऐसा संयोग आया है, जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र एक साथ पड़े हैं। इसलिए सिर्फ सोमवार को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी। पंडित हर्षित महाराज ने बताया कि अष्टमी तिथि रविवार की रात 10 बजकर 10 मिनट से शुरू होकर सोमवार की रात 12 बजकर 14 मिनट तक रहेगी।
कृतिका नक्षत्र सोमवार को सुबह 6 बजकर 41 मिनट पर खत्म हो जाएगा। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र शुरू हो जाएगा। यह मंगलवार को सुबह 11 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण अवतार (जन्माष्टमी) पूजन का मुहूर्त 11 बजकर 30 मिनट से शुरू हो जाएगा।
अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र साथ होने से रात 12 बजे भगवान के जन्म का शुभ संयोग रहेगा।
ऐसे करें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूजन---
चौकी में लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। जन्म पर खीरा काटकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मनाएं। लड्डू गोपाल का गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं। नए वस्त्र, जनेऊ पहनाएं। चंदन, चावल, कुमकुम से तिलक करें। फूलमाला पहनाएं।
माखन-मिश्री का भोग लगाएं। तुलसी की पत्ती जरूर अर्पित करें। भोग के बाद श्रीकृष्ण को गंगाजल अर्पित करें। धूप-दीप से आरती करें।