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फिर जागा केन-बेतवा लिंक परियोजना का जिन्न

Tue, 26 May 2015 12:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Tue, 26 May 2015 12:08 AM IST
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केन-बेतवा लिंक परियोजना पर मोदी सरकार फिर सक्रिय हुई है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने हाल ही में केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से इस पूरी परियोजना पर होने वाले खर्च की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जल संसाधन मंत्रालय ने राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण से इसका ब्योरा मांगा है। वहीं इस परियोजना से प्रभावित होने वाले क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्रोजेक्ट की डिटेल रिपोर्ट (डीपीआर) उन्हें अब तक नहीं बताई गई है। पहले उन्हें इसकी विस्तार जानकारी दी जाए।

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साल 2014 दिसंबर में केंद्र सरकार के कुछ अफसरों ने बांदा जनपद की सीमा से लगे पन्ना (एमपी) जनपद के सीलोन और हिनौता गांवों में जन सुनवाई (पब्लिक हेयरिंग) की थी। उन्हें बताया गया था कि सरकार केन और बेतवा नदी को आपस में लिंक करना चाहती है।
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तब इस परियोजना से प्रभावित होने वाले गांवों के लोगों को परियोजना के लाभ बताए गए थे। ग्रामीणों और बुंदेलखंड भविष्य परिषद जैसे कई स्वयंसेवी संगठनों ने इसका विरोध किया था। अधिकारियों से कहा था कि परियोजना की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) की हिंदी में प्रति उन्हें दी जाए। ताकि वे भी इसके लाभ या हानि समझ सकें।
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ग्रामीणों का कहना था कि परियोजना के लिए अधिग्रहीत की जा रही उनकी जमीन बेहद उपजाऊ है। सरकार को अगर यह चाहिए तो कम से कम 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा दे। बुंदेलखंड भविष्य परिषद के पुष्पेंद्र भाई ने इस मुद्दे को उठाया था।

पुष्पेंद्र भाई बताते हैं कि जन सुनवाई की रिपोर्ट अधिकारियों ने केंद्र सरकार को दी है। अभी तीन दिन पूर्व प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से इस परियोजना में आने वाले खर्च की रिपोर्ट मांगी गई है। सूत्रों के मुताबिक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा बनाई गई केन-बेतवा लिंक परियोजना को मोदी सरकार ने प्राथमिकता में शामिल कर लिया है।

मौजूदा केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती, जो बुंदेलखंड से सांसद हैं, इस योजना पर विशेष दिलचस्पी लेकर जल्द ही इस पर काम शुरू कराना चाहती हैं।

केंद्र सरकार यह फायदे गिना रही है केन-बेतवा लिंक परियोजना में
1. उत्तर प्रदेश मेें केन नदी कमान क्षेत्र के 2 लाख 52 हजार हेक्टेअर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई का बंदोबस्त।
2. मध्य प्रदेश के केन नदी कमान क्षेत्र में 3 लाख 23 हजार हेक्टेअर क्षेत्र में सिंचाई उपलब्धता।
3. दो पावर हाउस बनाकर 78 मेगावाट बिजली का उत्पादन।
4. परियोजना के लिंक मार्ग वाले गांवों और कस्बों तथा जिला मुख्यालयों मेें पेयजल सुविधा।
5. जलाशय (बांध) में मत्स्य पालन से रोजगार का सृजन।
6. केन नदी में बाढ़ के पानी को बेतवा में डालकर बाढ़ की बर्बादी से बचाव।

विरोध करने वालों के तर्क
1. केन-बेतवा गठजोड़ बुंदेलखंड और खासकर बांदा, हमीरपुर, महोबा आदि के खतरनाक है। इस परियोजना से पहले से ही पानी की कमी से जूझ रही केन नदी में पानी का और अकाल पड़ेगा। बुंदेलखंड रेगिस्तान जैसा बनेगा।
2. सरकार की मंशा जब खेत का पानी खेत में रखने की है तो ऐसे में नदियों को जोड़ने और केन का पानी बेतवा में डालने का क्या मतलब। बुंदेलखंड में अक्सर सूखा पड़ता है। केन-बेतवा गठजोड़ से इसके और बढ़ने के आसार हैं।
3. यह परियोजना प्रकृति विरोधी है। किसी भी दृष्टि से बुंदेलखंड के लिए हितकारी नहीं है। जितना पैसा इसमेें खर्च हो रहा है। उतने पैसे से बुंदेलखंड में बड़ी संख्या में किसानों को सिंचाई के छोटे संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
4. 10 से ज्यादा गांव के लोग बेघर हो जाएंगे। उनकी जमीन परियोजना में अधिग्रहीत कर ली जाएगी। उनकी खेती और आजीविका के साधन छिन जाएंगे। मुआवजे के नाम पर जो मिलेगा उससे कोई भी परिवार नई जगह नहीं बस सकेगा। पन्ना नेशनल पार्क इसका उदाहरण है।
5. लगभग 8500 आदिवासी किसान उजड़ जाएंगे। 6499 हेक्टेअर उपजाऊ भूमि परियोजना में चली जाएगी। पानी को बांधने से या तो बाढ़ आएगी या सूखा पड़ेगा।

केन-बेतवा गठजोड़ का सरकारी खाका
डोढन गांव के पास बांध के नीचे 3005 मिलियन घन मीटर पानी की जरूरत है, जबकि बांध स्तर तक 4443 मिलियन पानी बचता है। इससे उत्तर प्रदेश को 1600 मिलियन घन मीटर पानी बरियारपुर की केन कमान से मिलेगा और 2.52 लाख हेक्टेअर खेतों की सिंचाई इस पानी से होगी।

मध्य प्रदेश को 1405 घन मीटर पानी मिलेगा। यूपी के महोबा और झांसी जिलों की 60,294 हेक्टेअर भूमि की सिंचाई होगी। नहर के जरिए बांदा जिले को 1600 मिलियन घन मीटर पानी देने का प्रावधान रखा गया है। डोढन गांव की अधिकतम ऊंचाई 77 मीटर है।


बाढ़ का पानी डिस्चार्ज करने के लिए बांध में 16 मीटर ऊंचे और 18.50 मीटर चौड़े 27 फाटक लगाए जाएंगे। कुल 221 मीटर लंबी नहर बनेगी। बांध में दो बिजलीघर भी प्रस्तावित हैं।

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