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गोशाला घोटाले में जांच अधिकारी बदले
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अतर्रा। नरैनी भाजपा विधायक राजकरन कबीर की शिकायत पर शुरू हुई अस्थायी गोशाला की जांच में हो रही देरी पर जांच अधिकारी बदल दिए गए हैं। अब जांच का जिम्मा जिला कृषि अधिकारी तथा जिला पशु चिकित्सा अधिकारी को सौंपा गया है।
महुआ बीडीओ जांच वापस ले ली गई है। जांच में हो रही देरी को लेकर पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने गड़बड़ी होने की आशंका जताई थी। गौरतलब है कि नरैनी तहसील के छतैनी गांव के जंगल में बनी अस्थायी गोशाला में 530 अन्ना पशुओं के लिए सरकार की ओर से 30 रुपये प्रति पशु दर से धनराशि दी जाती रही है।
आरोप है कि फर्जी बाउचर लगाकर 15 लाख 77 हजार 300 रुपये खर्च कर दिए गए। नरैनी विधायक ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। इस पर मार्च और अप्रैल का 8 लाख 57 हजार 700 रुपये बजट रोक दिया गया था। पिछले एक माह से इसकी जांच महुआ बीडीओ के पास लंबित थी। जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल के आदेश पर जांच अधिकारी बदल दिए गए।
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महुआ बीडीओ जांच वापस ले ली गई है। जांच में हो रही देरी को लेकर पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने गड़बड़ी होने की आशंका जताई थी। गौरतलब है कि नरैनी तहसील के छतैनी गांव के जंगल में बनी अस्थायी गोशाला में 530 अन्ना पशुओं के लिए सरकार की ओर से 30 रुपये प्रति पशु दर से धनराशि दी जाती रही है।
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आरोप है कि फर्जी बाउचर लगाकर 15 लाख 77 हजार 300 रुपये खर्च कर दिए गए। नरैनी विधायक ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। इस पर मार्च और अप्रैल का 8 लाख 57 हजार 700 रुपये बजट रोक दिया गया था। पिछले एक माह से इसकी जांच महुआ बीडीओ के पास लंबित थी। जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल के आदेश पर जांच अधिकारी बदल दिए गए।
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