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बुंदेलखंड में तालाब बढ़ाएं, बारिश का पानी बचाएं
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बांदा में अमर उजाला फेसबुक पर किसानों के प्रश्नों का जवाब देते एक्सपर्ट प्रेम सिंह।
- फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड के किसानों को कृषि विशेषज्ञों का साथ और सलाह दिलाने के लिए ‘अमर उजाला’ ने एक और पहल की है। शनिवार फेसबुक लाइव के जरिए किसानों को उत्तर प्रदेश किसान समृद्धि आयोग के सदस्य और प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह (बड़ोखर खुर्द) से रू-ब-रू कराया। प्रेम सिंह ने बदलते वक्त के हिसाब से खेती के तौर-तरीके में जरूरी बदलाव का रास्ता सुझाया। जल संकट से निदान के टिप्स भी दिए। किसानों के बीच से कमेंट बॉक्स में आए सवालों का जवाब तफ्सील से दिया।
प्रश्न- वर्षा के पानी का उपयोग और पेयजल का दुरुपयोग रोकना कैसे संभव है? - रामजी भाई (कमासिन, बांदा)
उत्तर- गांव में तालाब बनाकर और शहर में छतों पर रेन हार्वेस्टिंग जैसे उपाय अपनाकर पानी का संचय किया जा सकता है।
प्रश्न- छोटे किसान वर्षा जल संचय कैसे करें? ज्यादातर तालाब अतिक्रमण के शिकार हैं? -मुकेश पांडेय पद्म (बांदा)
उत्तर- अपने खेतों की डिजाइन ऐसी बनाएं कि ज्यादा से ज्यादा बारिश का पानी खेत में रुक सके। मेड़बंदी करें।
प्रश्न- बुंदेलखंड में ट्यूबवेल बेतहाशा जलदोहन भूजल पर प्रभाव डाल रहा है। इसे कैसे रोका जाए? -कर्ण सिंह (बांदा)
उत्तर- हां, यह सच है कि भूजल दोहन सबसे ज्यादा ट्यूबवेल से हो रहा है। तालाब, कुएं और वाटर हार्वेस्टिंग से ही भूजल स्तर सुधारा जा सकता है।
प्रश्न- आवर्तनशील खेती में पानी कंजर्वेशन की क्या भूमिका है?-गुंजन मिश्रा (चित्रकूट)
उत्तर- मौसम परिवर्तन से बारिश पर प्रभाव पड़ा है। ऐसे में तालाब ही फायदेमंद साबित हो सकते हैं। कुएं भी होना जरूरी हैं।
प्रश्न- आपदाओं और पानी संकट से बुंदेलखंड में परंपरागत खेती पर असर पड़ा है। इसे कैसे दूर किया जाए?-हृदयेश गोस्वामी (ललितपुर)
उत्तर- खेती के तौर-तरीके में बदलाव लाएं। पेड़ बढ़ाएं, बाग लगाएं। तालाब की तुलना में बाग से 5 गुना ज्यादा और चारागाह से 10 गुना भूजल बढ़ता है।
प्रश्न- बुंदेलखंड में महोबा सबसे ज्यादा संकटग्रस्त रहा। फसल उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित है। कुछ उपाय बताएं?-बलराम (शाहपहाड़ी, महोबा)
उत्तर- खेत के एक तिहाई हिस्से में तालाब बनाकर जल संचय करें। मेड़बंदी करें। खेत का पानी खेत में रोकें। निश्चित ही यह कोशिश सफलता देगी।
इसके अलावा अमर उजाला की इस फेसबुक ऑनलाइन चर्चा में बुंदेलखंड के किसान मुफीद खां, चंद्रभान सिंह परमार (गुढ़ा), आरिफ अहमद, राहुल मिश्रा, आशीष कुमार व नंदकिशोर रैकवार (जैतपुर, झांसी), मनीष पांडेय, पंकज डीआरपी, अनिल कुमार (महोबा), महावीर शरण (झांसी), आदि किसानों ने भी प्रतिभाग करते हुए मानसूनी बारिश के पानी के संरक्षण संबंधी सवाल किए। इसके अलावा झांसी-ललितपुर से शिक्षक पुष्पेंद्र जैन, अरविंद्र मिश्रा, चंद्रप्रताप सिंह, रानू तिवारी, किसान नेता नवनीत शर्मा ने भी कई जिज्ञासाएं रखीं।
मिट्टी के हिसाब से करें फसल का चयन
विशेषज्ञ प्रेम सिंह ने बताया कि कावर मिट्टी में धान, गेहूं और जल धारण करने वाली फसलें बोनी चाहिए। बरुआ मिट्टी में अरहर, चना ज्वार, मक्का, बाजरा, तिल, मूंग, उड़द एक साथ बोने से प्राकृतिक आपदा से बचा जा सकता है। साथ ही घर में खाने को सभी प्रकार की वस्तुएं मिल जाएंगी। बाजार पर निर्भरता नहीं रहेगी।
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प्रश्न- वर्षा के पानी का उपयोग और पेयजल का दुरुपयोग रोकना कैसे संभव है? - रामजी भाई (कमासिन, बांदा)
उत्तर- गांव में तालाब बनाकर और शहर में छतों पर रेन हार्वेस्टिंग जैसे उपाय अपनाकर पानी का संचय किया जा सकता है।
प्रश्न- छोटे किसान वर्षा जल संचय कैसे करें? ज्यादातर तालाब अतिक्रमण के शिकार हैं? -मुकेश पांडेय पद्म (बांदा)
उत्तर- अपने खेतों की डिजाइन ऐसी बनाएं कि ज्यादा से ज्यादा बारिश का पानी खेत में रुक सके। मेड़बंदी करें।
प्रश्न- बुंदेलखंड में ट्यूबवेल बेतहाशा जलदोहन भूजल पर प्रभाव डाल रहा है। इसे कैसे रोका जाए? -कर्ण सिंह (बांदा)
उत्तर- हां, यह सच है कि भूजल दोहन सबसे ज्यादा ट्यूबवेल से हो रहा है। तालाब, कुएं और वाटर हार्वेस्टिंग से ही भूजल स्तर सुधारा जा सकता है।
प्रश्न- आवर्तनशील खेती में पानी कंजर्वेशन की क्या भूमिका है?-गुंजन मिश्रा (चित्रकूट)
उत्तर- मौसम परिवर्तन से बारिश पर प्रभाव पड़ा है। ऐसे में तालाब ही फायदेमंद साबित हो सकते हैं। कुएं भी होना जरूरी हैं।
प्रश्न- आपदाओं और पानी संकट से बुंदेलखंड में परंपरागत खेती पर असर पड़ा है। इसे कैसे दूर किया जाए?-हृदयेश गोस्वामी (ललितपुर)
उत्तर- खेती के तौर-तरीके में बदलाव लाएं। पेड़ बढ़ाएं, बाग लगाएं। तालाब की तुलना में बाग से 5 गुना ज्यादा और चारागाह से 10 गुना भूजल बढ़ता है।
प्रश्न- बुंदेलखंड में महोबा सबसे ज्यादा संकटग्रस्त रहा। फसल उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित है। कुछ उपाय बताएं?-बलराम (शाहपहाड़ी, महोबा)
उत्तर- खेत के एक तिहाई हिस्से में तालाब बनाकर जल संचय करें। मेड़बंदी करें। खेत का पानी खेत में रोकें। निश्चित ही यह कोशिश सफलता देगी।
इसके अलावा अमर उजाला की इस फेसबुक ऑनलाइन चर्चा में बुंदेलखंड के किसान मुफीद खां, चंद्रभान सिंह परमार (गुढ़ा), आरिफ अहमद, राहुल मिश्रा, आशीष कुमार व नंदकिशोर रैकवार (जैतपुर, झांसी), मनीष पांडेय, पंकज डीआरपी, अनिल कुमार (महोबा), महावीर शरण (झांसी), आदि किसानों ने भी प्रतिभाग करते हुए मानसूनी बारिश के पानी के संरक्षण संबंधी सवाल किए। इसके अलावा झांसी-ललितपुर से शिक्षक पुष्पेंद्र जैन, अरविंद्र मिश्रा, चंद्रप्रताप सिंह, रानू तिवारी, किसान नेता नवनीत शर्मा ने भी कई जिज्ञासाएं रखीं।
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मिट्टी के हिसाब से करें फसल का चयन
विशेषज्ञ प्रेम सिंह ने बताया कि कावर मिट्टी में धान, गेहूं और जल धारण करने वाली फसलें बोनी चाहिए। बरुआ मिट्टी में अरहर, चना ज्वार, मक्का, बाजरा, तिल, मूंग, उड़द एक साथ बोने से प्राकृतिक आपदा से बचा जा सकता है। साथ ही घर में खाने को सभी प्रकार की वस्तुएं मिल जाएंगी। बाजार पर निर्भरता नहीं रहेगी।
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