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Banda News: खामोश ही रहे पलायन और पानी के अहम मुद्दे

Sun, 19 May 2024 01:29 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 May 2024 01:29 AM IST
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Important issues of migration and water remained silent
बबेरू (बांदा)। जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित स्वामी अवधूत महाराज की तपोस्थली (बबेरू विधानसभा क्षेत्र) आज भी बेहद पिछड़ा है। पलायन और पानी यहां के अहम मुद्दे हैं।
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इसके अलावा बिना बाईपास बबेरू कस्बा पूरे साल जाम से जूझता है। यहां न तो रोजगार के लिए कोई उद्योग हैं और न ही शिक्षा के लिए अच्छे काॅलेज। रोडवेज बस स्टैंड और पाॅलिटेक्निक का निर्माण बिना बजट दो वर्षों से अधूरा पड़ा है। लोकसभा चुनाव में जनप्रतिनिधि एक बार फिर मतदाताओं की टोह लेने के लिए घर-घर पहुंच रहे हैं और इन समस्याओं को दूर करने का वादा कर रहे हैं।
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बबेरू विधानसभा क्षेत्र में शुरुआती दौर में यहां दो दशक तक लाल परचम लहराया। देव कुमार यादव यहां से चार बार विधायक चुने गए। इसके बाद सपा के विशंभर प्रसाद यादव को यहां की जनता ने तीन बार चुनकर विधानसभा भेजा। बसपा से गयाचरण दिनकर को भी मतदाताओं ने दो बार जीत का स्वाद चखाया। 2017 के विधानसभा चुनाव में जनता ने कमल खिलाया। चंद्रपाल कुशवाहा जीतकर विधानसभा पहुंचे। यहां के मतदाताओं ने विकास के लिए हर दल को मौका दिया। इसके बावजूद यहां का पिछड़ापन दूर नहीं हो सका।
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यहां न तो कोई बड़ा अस्पताल स्थापित हो सका और न ही कोई उच्च तथा व्यवसायिक शिक्षण संस्थान खुल सका। सीएचसी तो है, पर यहां विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। ज्यादातर लोग खेती-किसानी से जुड़े हैं। उन्हें पूरे वर्ष सिंचाई के लिए पानी को जूझना पड़ता है। वर्ष 2017 में भाजपा विधायक चंद्रपाल कुशवाहा के प्रयास से रोडवेज बस स्टैंड और 2018 में पाॅलिटेक्निक का शिलान्यास हुआ, लेकिन अभी तक बजट के अभाव में इनका निर्माण पूरा नहीं हो सका।



कोई उद्योग व उद्यम न होने और खेती किसानी में दैवी आपदा की मार के चलते युवा व महिलाएं पलायन को मजबूर हैं। कमासिन क्षेत्र में पंप केन कैनाल की मांग अरसे से की जा रही है, पर यह अनसुनी कर दी जाती है। धान का गढ़ रहा क्षेत्र सिंचाई के अभाव में कराह रहा है। यहां सबसे बड़ी समस्या जाम की है। बबेरू कस्बा में रिंग रोड न होने से बाजार के बीच से भारी वाहन गुजरते हैं। छात्र-छात्राएं व आमजन पूरे दिन जाम से जूझते हैं। क्षेत्र के ज्यादातर गांव बिजली, पानी, सड़क की कमी से जूझ रहे हैं।

भाजपा को मिली थी हार



बांदा-चित्रकूट संसदीय क्षेत्र में पिछले लोकसभा चुनाव में भले की कमल खिला हो, पर यहां के मतदाताओं ने उन्हें सबक सिखाया था। आरके पटेल को 81132 वोट मिले थे, जबकि सपा के श्यामाचरण गुप्ता को 98457 वोट मिले थे। विधानसभा चुनाव 2022 में यहां की जनता ने एक बार फिर साइकिल दौड़ाई। विशंभर प्रसाद यादव को 79614 वोट मिले, जबकि भाजपा के अजय पटेल को 72221 वोट मिले थे।


ब्राह्मण व कुर्मी मतदाता होते हैं निर्णायक



बबेरू विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा कुर्मी मतदाता हैं। करीब इनकी संख्या 35 हजार होगी। दूसरे नंबर पर ब्राह्मण हैं, जो करीब 28 हजार हैं। यह दोनों वर्ग लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा निर्णायक भूमिका निभाते हैं।



मतदाताओं पर एक नजर

कुल मतदाता- 3,44,361



पुरुष मतदाता-1,89,757



महिला मतदाता-1,54,592

जेंडर मतदाता -12

मतदेय स्थल- 350
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