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जल्द फाटक ठीक नहीं किए तो होगा जल संकट
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 13 Oct 2016 11:44 PM IST
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बरियारपुर बांध की क्रस्टवाल पर गिरे पड़े गेट।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। इस बार आई जबरदस्त बाढ़ से बांधों को भारी नुकसान पहुंचा है। बरियारपुर बांध के नौ गेट बह गए हैं। मार्जिनल बंध, एपलेक्स बंध, क्रस्टवाल, पूल टैंक आदि को भी नुकसान पहुंचा है। फौरीतौर पर लगाए गए अनुमान के बाद लगभग दो करोड़ रुपये की क्षति हुई है।
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बांध की क्रस्टवाल के ऊपर अभी भी डेढ़ फीट ऊंचा पानी बह रहा है। अभियंताओं की हड़ताल के चलते एई-जेई यहां नहीं आ रहे। उधर, गंगऊ बांध में अब तक फाटक नहीं खड़े किए गए हैं। ऐसे में पानी का भंडारण न हो पाने पर अगले वर्ष फसलों की सिंचाई के लिए पानी का संकट हो सकता है।
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गंगऊ बांध केन नदी पर बना है। इसमें मध्य प्रदेश की घाटियों और गंगऊ बांध का पानी आता है। गंगऊ बांध से मुख्य केन नहर निकली है। इसी से पूरे साल नहरों के जरिये बांदा जिले को सिंचाई और गर्मियों में पशुओें की प्यास बुझाने के लिए पानी मिलता है। 100 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके अंग्रेजों के जमाने में बना यह बांध इस बार जबरदस्त बाढ़ से लगातार एक पखवारे तक जूझा। क्रस्टवाल के ऊपर लगभग 20 फीट मोटी जलधारा कई दिनों तक बहती रही।
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पानी के भारी बहाव और दबाव से गंगऊ बांध की क्रस्टवाल पर लगे 163 फाटकों में नौ फाटक उखड़कर बह गए। अब सिंचाई विभाग ने शेष 154 फाटकों को खड़ा कर दिया है। बांध का जलस्तर 608.7 फिट पर है। टूटे फाटकों से बांध का पानी केन नदी में गिर रहा है। इन्हें जल्द नहीं लगाया गया तो बांध में पानी का स्टाक नहीं हो पाएगा। मौजूदा में जितना पानी बांध में है, उससे केन नहर मात्र दो दिन चलाई जा सकती है। डिप्लोमा इंजीनियरों की हड़ताल के चलते अभी सहायक अभियंता या अवर अभियंता बांध नहीं जा रहे हैं। विभाग के अन्य कर्मचारियों ने फाटक खड़े किए हैं।
उधर, बाढ़ से गंगऊ बांध के मार्जिनल बंध, एप्लेक्स बंध, क्रस्टवाल और पूल टैंक को भी काफी नुकसान पहुंचा है। बांध में हुई क्षति का वास्तविक पता अभियंताओं की हड़ताल के बाद चलेगा। बांध से संबंधित अवर अभियंता मनोज सिंह ने बताया कि बाढ़ से बरियारपुर बांध में लगभग दो करोड़ रुपये की क्षति हुई है।