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स्वैच्छिक हुआ तो कर्जदार किसानों ने फसल बीमा से किया तौबा
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बांदा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बुंदेली किसानों को रास नहीं आ रही है। उधर, सरकार ने फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक कर दिया है। इसका असर खरीफ की फसल में देखने को मिला है। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में इस वर्ष 21201 ऋणी किसानों ने फसल बीमा योजना से तौबा कर लिया, जबकि गैर ऋणी किसानों संख्या बढ़ी है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत किसान खरीफ की फसल का बीमा कराने के लिए किसानों को दो फीसदी प्रीमियम देना पड़ता है। योजना के तहत बीमित किसान को बाढ़, आंधी, ओले, तेज बारिश, असमय बारिश होने पर बीमा क्लेम देने का प्रावधान है। जो आड़े वक्त काम आता है, लेकिन किसान फसल बीमा को लेकर उत्साहित नहीं है।
वित्तीय वर्ष 2019-20 में खरीफ की फसल के लिए चित्रकूटधाम मंडल में 1,28,790 ऋणी किसानों ने बीमा कराया था, जबकि इस वर्ष 2021-22 में 1,07,789 ऋणी किसानों ने बीमा कराया, यानी 21202 किसानों ने बीमा योजना से तौबा कर लिया। इन्होंने बाकायदा बैंकों में लिखकर दें दिया है कि वह खरीफ की फसल का बीमा नहीं चाहते है। उन्हें योजना से अलग रखा जाए, जबकि मंडल में गैर ऋणी किसानों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। पिछले वर्ष मंडल में 35555 किसानों ने बीमा कराया था। इस वर्ष इनकी संख्या बढ़कर 54,959 हो गई है यानी 19,404 किसान बढ़े हैं।
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वर्ष 2019-20 में मंडल के बीमित किसान व प्रीमियम (लाख में)
जिला ऋणी गैर ऋणी प्रीमियम
बांदा 43,194 202 265.28
चित्रकूट 17,077 853 129.67
महोबा 32,719 33,003 285.27
हमीरपुर 35,800 1,497 173.63
योग 1,28,790 35,555 853.85
वर्ष 2021-22 में मंडल के बीमित किसान व प्रीमियम (लाख में)
जिला ऋणी गैर ऋणी प्रीमियम
बांदा 43,535 1,297 297.95
चित्रकूट 6,646 3,874 48.000
महोबा 29,005 45,749 274.67
हमीरपुर 28,402 4,039 152.96
योग 1,07,589 54,959 773.59
चित्रकूटधाम मंडल में फसल का रकबा 80,458 हेक्टेयर
जिला धान दलहन/तिलहन
बांदा 53,561 2,691
हमीरपुर 46 3,922
महोबा 245 7,921
चित्रकूट 10,317 1,755
योग 64,169 16,289
बीमा कंपनी के तरीके से नाखुश है किसान
प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह का कहना है कि बीमा कंपनी का क्लेम देने का तरीका सही नहीं है। एक साल यदि जिले में 80 फीसदी सूखा पड़ गया तो दूसरे साल 80 फीसदी से ऊपर सूखा पड़ने पर ही क्लेम मिलेगा। हाल ही में बाढ़ व बारिश से फसल बर्बाद हुई है, लेकिन अभी तक न तो सर्वे हुआ और न ही क्लेम मिला। बीमा कंपनी का जिलास्तर पर कोई कार्यालय नहीं है। जहां लोग शिकायत कर सके। कृषि विभाग के अधिकारी शिकायतों के समाधान पर रुचि नहीं ले रहे है।
आपदा में किसानों के लिए फसल बीमा बहुत ही उपयोगी है, लेकिन योजना को स्वैच्छिक कर दिए जाने से किसानों की संख्या घटी है। हालांकि किसानों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि आपदा के समय मिलने वाला क्लेम आड़े वक्त में काम आता है।-विजय कुमार, उप कृषि निदेशक।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत किसान खरीफ की फसल का बीमा कराने के लिए किसानों को दो फीसदी प्रीमियम देना पड़ता है। योजना के तहत बीमित किसान को बाढ़, आंधी, ओले, तेज बारिश, असमय बारिश होने पर बीमा क्लेम देने का प्रावधान है। जो आड़े वक्त काम आता है, लेकिन किसान फसल बीमा को लेकर उत्साहित नहीं है।
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वित्तीय वर्ष 2019-20 में खरीफ की फसल के लिए चित्रकूटधाम मंडल में 1,28,790 ऋणी किसानों ने बीमा कराया था, जबकि इस वर्ष 2021-22 में 1,07,789 ऋणी किसानों ने बीमा कराया, यानी 21202 किसानों ने बीमा योजना से तौबा कर लिया। इन्होंने बाकायदा बैंकों में लिखकर दें दिया है कि वह खरीफ की फसल का बीमा नहीं चाहते है। उन्हें योजना से अलग रखा जाए, जबकि मंडल में गैर ऋणी किसानों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। पिछले वर्ष मंडल में 35555 किसानों ने बीमा कराया था। इस वर्ष इनकी संख्या बढ़कर 54,959 हो गई है यानी 19,404 किसान बढ़े हैं।
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वर्ष 2019-20 में मंडल के बीमित किसान व प्रीमियम (लाख में)
जिला ऋणी गैर ऋणी प्रीमियम
बांदा 43,194 202 265.28
चित्रकूट 17,077 853 129.67
महोबा 32,719 33,003 285.27
हमीरपुर 35,800 1,497 173.63
योग 1,28,790 35,555 853.85
वर्ष 2021-22 में मंडल के बीमित किसान व प्रीमियम (लाख में)
जिला ऋणी गैर ऋणी प्रीमियम
बांदा 43,535 1,297 297.95
चित्रकूट 6,646 3,874 48.000
महोबा 29,005 45,749 274.67
हमीरपुर 28,402 4,039 152.96
योग 1,07,589 54,959 773.59
चित्रकूटधाम मंडल में फसल का रकबा 80,458 हेक्टेयर
जिला धान दलहन/तिलहन
बांदा 53,561 2,691
हमीरपुर 46 3,922
महोबा 245 7,921
चित्रकूट 10,317 1,755
योग 64,169 16,289
बीमा कंपनी के तरीके से नाखुश है किसान
प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह का कहना है कि बीमा कंपनी का क्लेम देने का तरीका सही नहीं है। एक साल यदि जिले में 80 फीसदी सूखा पड़ गया तो दूसरे साल 80 फीसदी से ऊपर सूखा पड़ने पर ही क्लेम मिलेगा। हाल ही में बाढ़ व बारिश से फसल बर्बाद हुई है, लेकिन अभी तक न तो सर्वे हुआ और न ही क्लेम मिला। बीमा कंपनी का जिलास्तर पर कोई कार्यालय नहीं है। जहां लोग शिकायत कर सके। कृषि विभाग के अधिकारी शिकायतों के समाधान पर रुचि नहीं ले रहे है।
आपदा में किसानों के लिए फसल बीमा बहुत ही उपयोगी है, लेकिन योजना को स्वैच्छिक कर दिए जाने से किसानों की संख्या घटी है। हालांकि किसानों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि आपदा के समय मिलने वाला क्लेम आड़े वक्त में काम आता है।-विजय कुमार, उप कृषि निदेशक।