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संयम बिना मानव जीवन पशु समान
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Human life without restraint is like an animal
- फोटो : BANDA
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बांदा। पर्यूषण महापर्व में बुधवार को दिगंबर जैन मंदिर (छोटी बाजार) में आचार्य अभिनंदन सागर जी महाराज ने कहा कि आज उत्तम संयम का दिन है। संयम के बिना मानव जीवन पशु समान है। संयम के अभाव में ही इस संसारी प्राणी को अनेकों दुख उठाएं हैं।
आत्मा का उत्थान संयम के बिना संभव नहीं है। संयम वह सहारा है, जिससे आत्मा उर्द्धगामी होती है। संयम को ग्रहण कर लेने वाले की दृष्टि में इंद्रियों के विषय हेय मालूम पड़ने लगते हैं। प्रारंभ में संयम बंधन जैसा लगता है, लेकिन बाद में वही हमें निर्बंध बना देता है।
संयम के माध्यम से ही आत्मानुभूति होती है। संयम द्वारा हमारी आत्मा अपनी मंजिल की ओर से अग्रसर होती है। अर्थात मोक्ष मार्ग को पाती है। शाम को रंगोली प्रतियोगिता हुई। उधर, तारण तरण दिगंबर जैन चैत्यालय में जिनवाणी का पाठ हुआ। मां जिनवाणी की भक्ति भाव से, मृदंग मजीरों के साथ भजन-कीर्तन करते हुए भक्तों ने आरती की।
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आत्मा का उत्थान संयम के बिना संभव नहीं है। संयम वह सहारा है, जिससे आत्मा उर्द्धगामी होती है। संयम को ग्रहण कर लेने वाले की दृष्टि में इंद्रियों के विषय हेय मालूम पड़ने लगते हैं। प्रारंभ में संयम बंधन जैसा लगता है, लेकिन बाद में वही हमें निर्बंध बना देता है।
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संयम के माध्यम से ही आत्मानुभूति होती है। संयम द्वारा हमारी आत्मा अपनी मंजिल की ओर से अग्रसर होती है। अर्थात मोक्ष मार्ग को पाती है। शाम को रंगोली प्रतियोगिता हुई। उधर, तारण तरण दिगंबर जैन चैत्यालय में जिनवाणी का पाठ हुआ। मां जिनवाणी की भक्ति भाव से, मृदंग मजीरों के साथ भजन-कीर्तन करते हुए भक्तों ने आरती की।
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