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फसलों ने दिया दगा, कैसे करें 40 अरब अदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 03 May 2015 10:06 PM IST
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बारिश और ओलावृष्टि के बाद बची-खुची फसल की हालत देखकर किसानों के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही हैं। सबसे ज्यादा चिंता बैंक कर्ज अदायगी की है। चित्रकूटधाम मंडल में 4,32,400 किसानों पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) कर्ज की तलवार लटक रही है। फसल से ही इसकी अदायगी का भरोसा था। अब सरकार ने माफी न दी तो कुछ दिन बाद बैंक सिर पर सवार होकर वसूली करेंगे। कुर्की और नीलामी के अलावा आरसी जारी होने पर जेल जाने की नौबत आ सकती है।
लगातार कई वर्षों से सूखा, बेमौसम बारिश, ओला और बाढ़ जैसी दैवी आपदाओं से किसानों की जिंदगी ढर्रे पर नहीं आ पा रही। इससे उबरने के लिए अधिकांश किसानों ने बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज लेकर अपनी ‘क्रेडिट’ दांव पर लगा दी है। बैंकों के ताजा आंकड़े बताते हैं कि चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में इस समय 4,32,400 किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड से 40 अरब 34 करोड़ रुपये का कर्ज ले रखा है। इन किसानों के आगे कर्ज अदायगी का कोई रास्ता नहीं बचा है।
पिछले महीने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों को कहीं का नहीं छोड़ा। सबसे ज्यादा 1,48,000 किसान बांदा जनपद के कर्जदार हैं। इन पर 12 अरब 89 करोड़ का कर्ज है। चित्रकूट में 85,000 किसानों ने 7 अरब 16 करोड़ केसीसी और एक अरब 81 करोड़ अन्य कृषि ऋण (8 अरब 97 करोड़) कर्ज ले रखा है।
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हमीरपुर के 1,91,000 किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 10 अरब 17 करोड़ 12 लाख रुपये कर्ज के बोझ में दबे हैं। महोबा में 8,400 किसानों ने फसलों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड बनवाकर 8 अरब 31 करोड़ रुपया कर्ज ले रखा है। केसीसी में किसान को 5 वर्ष के लिए कर्ज दिया जाता है।
ब्याज दर 7 फीसदी सालाना है। समय से अदायगी न होने पर ब्याज की दर बढ़कर अगले साल 11.5 प्रतिशत हो जाती है। जिस फसल के लिए कर्ज लिया गया है उसी फसल में वापसी भी कर दी जाए तो सिर्फ 4 फीसदी ब्याज लगेगा। अग्रणी बैंक प्रबंधक (एलडीएम) एसके झा का कहना है कि फिलहाल दैवी आपदा के चलते किसानों को वसूली में मोहलत दी गई है।
बीमा क्लेम मिला तो भी 1.44 लाख रहेंगे वंचित
अगर सभी को बीमा क्लेम मिल भी जाए तो भी चित्रकूटधाम मंडल के 2,87,596 किसानों के पास कर्ज अदायगी का कोई रास्ता नहीं है। मंडल के चारों जिलों में कुल 1,44,804 किसानों का ही कृषि बीमा है। जबकि कर्जदार किसानों की संख्या 4,32,400 है। बांदा में 39,948, चित्रकूट में 26,882, हमीरपुर में 38,245 और महोबा में 39,729 किसानों ने ही बीमा कराया था।
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लगातार कई वर्षों से सूखा, बेमौसम बारिश, ओला और बाढ़ जैसी दैवी आपदाओं से किसानों की जिंदगी ढर्रे पर नहीं आ पा रही। इससे उबरने के लिए अधिकांश किसानों ने बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज लेकर अपनी ‘क्रेडिट’ दांव पर लगा दी है। बैंकों के ताजा आंकड़े बताते हैं कि चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में इस समय 4,32,400 किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड से 40 अरब 34 करोड़ रुपये का कर्ज ले रखा है। इन किसानों के आगे कर्ज अदायगी का कोई रास्ता नहीं बचा है।
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पिछले महीने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों को कहीं का नहीं छोड़ा। सबसे ज्यादा 1,48,000 किसान बांदा जनपद के कर्जदार हैं। इन पर 12 अरब 89 करोड़ का कर्ज है। चित्रकूट में 85,000 किसानों ने 7 अरब 16 करोड़ केसीसी और एक अरब 81 करोड़ अन्य कृषि ऋण (8 अरब 97 करोड़) कर्ज ले रखा है।
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हमीरपुर के 1,91,000 किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 10 अरब 17 करोड़ 12 लाख रुपये कर्ज के बोझ में दबे हैं। महोबा में 8,400 किसानों ने फसलों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड बनवाकर 8 अरब 31 करोड़ रुपया कर्ज ले रखा है। केसीसी में किसान को 5 वर्ष के लिए कर्ज दिया जाता है।
ब्याज दर 7 फीसदी सालाना है। समय से अदायगी न होने पर ब्याज की दर बढ़कर अगले साल 11.5 प्रतिशत हो जाती है। जिस फसल के लिए कर्ज लिया गया है उसी फसल में वापसी भी कर दी जाए तो सिर्फ 4 फीसदी ब्याज लगेगा। अग्रणी बैंक प्रबंधक (एलडीएम) एसके झा का कहना है कि फिलहाल दैवी आपदा के चलते किसानों को वसूली में मोहलत दी गई है।
बीमा क्लेम मिला तो भी 1.44 लाख रहेंगे वंचित
अगर सभी को बीमा क्लेम मिल भी जाए तो भी चित्रकूटधाम मंडल के 2,87,596 किसानों के पास कर्ज अदायगी का कोई रास्ता नहीं है। मंडल के चारों जिलों में कुल 1,44,804 किसानों का ही कृषि बीमा है। जबकि कर्जदार किसानों की संख्या 4,32,400 है। बांदा में 39,948, चित्रकूट में 26,882, हमीरपुर में 38,245 और महोबा में 39,729 किसानों ने ही बीमा कराया था।