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ठेकेदारों को रायल्टी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Sun, 03 Apr 2016 12:22 AM IST
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हाईकोर्ट ने 16 मई तक कोर्ट के आदेशों का पालन करने का आदेश दिया है।
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खनिज सामग्री पर ठेकेदार या कार्यदाई संस्थाओं द्वारा रायल्टी न देने पर पांच गुना जुर्माने संबंधी शासनादेश पर रोक लगा दी है। बता दें कि 14 दिन पहले ही कोर्ट ने इस शासनादेश को जायज बताया था। ठेकेदारों ने हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राहत की सांस ली है।
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15 अक्तूबर 2014 को प्रदेश के मुख्य सचिव ने शासनादेश जारी करते हुए कहा था कि कार्यदाई संस्थाओं के ठेकेदारों की जिम्मेदारी है कि वह उप खनिज की आपूर्ति करने वाले सप्लायर से एमएम-11 प्राप्त करें और उसे अपने बिलों के साथ लगाकर पेश करें। अगर ऐसा नहीं किया तो ठेकेदारों से रायल्टी के साथ पांच गुना पेनाल्टी भी वसूली जाए।
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शासनादेश में यह भी कहा गया था कि बिना रायल्टी और पेनाल्टी काटे किसी भी विभाग के अधिकारी ने ठेकेदार का पेमेंट किया तो अधिकारी के वेतन से यह पैसा काटा जाए। साथ ही यह कोर्ट के आदेश की अवहेलना की श्रेणी में आएगा।
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इस शासनादेश से ठेकेदारों में हड़कंप मच गया। मेसर्स अंशुल कंस्ट्रेक्शन कंपनी समेत अभिमन्यु सिंह आदि लगभग दर्जन भर ठेकेदारों ने शासनादेश के विरुद्ध हाईकोर्ट मेें याचिका दायर कर दीं। इस पर हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति हुलूजी रमेश और शमशेर बहादुर सिंह ने 14 मार्च को इस शासनादेश को जायजा बताते हुए अपने आदेश मेें कहा कि ठेकेदारों को शासनादेश को चैलेंज करने या अवैध कहने का अधिकार नहीं है। ठेकेदार शासनादेश का अनुपालन करें।
लेकिन इस आदेश के 14 दिन बाद ही बांदा के ठेकेदार अयोध्या प्रसाद मिश्रा द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका पर उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और विनोद कुमार मिश्रा ने 28 मार्च को जारी अपने आदेश मेें मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश पर रोक लगाते हुए स्थगन आदेश पारित कर दिया। मुख्य सचिव के आदेशों पर बांदा डीएम और यहां के पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता द्वारा जारी आदेशोें पर भी स्थगन आदेश दिया है।