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हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव से मांगा जवाबी हलफनामा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 24 May 2015 11:49 PM IST
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ओलावृष्टि और बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुए किसानों की प्रदेश सरकार द्वारा की जा रही मदद के बारे में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (राजस्व) को आदेश दिया है कि वह इस मामले में जवाबी हलफनामा अदालत में पेश करें। हाईकोर्ट अब इस मामले में 8 जुलाई को फिर सुनवाई करेगी।
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बुंदेलखंड समेत प्रदेश में पिछले दिनों कई बार ओला-बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। पिछले कई वर्षों से कोई न कोई कुदरती कहर झेल रहे किसानों को इस ताजा आपदा ने बुरी तरह प्रभावित किया है। तमाम किसानों की सदमे से मौत हो गई और कई ने फांसी लगाकर जान दे दी।
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हालांकि प्रदेश सरकार कृषि निवेश अनुदान के रूप में किसानों को चेक के माध्यम से राहत राशि बांट रही है लेकिन इससे नुकसान की भरपाई नहीं हो पा रही है। मदद राशि ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है। चित्रकूट जिले के अधिवक्ता ओमप्रकाश चौबे ने इस मुद्दे पर पिछले महीने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की थी।
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इसमें कहा गया है कि प्राकृतिक आपदा से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। किसानों ने क्रेडिट कार्ड से कर्ज ले रखा है। इसे वह चुका नहीं पा रहे हैं। इसी सदमे और तनाव में अब तक प्रदेश में लगभग 1200 किसानों की मौत हो चुकी है।
याचिका में कहा गया कि अधिकारी और कर्मचारी किसानों की इस मौत को सामान्य बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। याचिका में मांग की गई है कि किसानों द्वारा क्रेडिट कार्ड पर लिया गया पूरा कर्ज माफ किया जाए। इसके अलावा एक लाख से तीन लाख रुपये तक के अन्य कर्जों का 50 फीसदी और उससे अधिक कर्ज पर 25 फीसदी राशि माफ की जाए। दो वर्षों तक कर्ज का ब्याज पूरी तरह माफ रहे।
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने इस माह की 4 तारीख को प्रदेश सरकार के स्थाई अधिवक्ता के जरिए से प्रदेश सरकार से पूछा था कि संकटग्रस्त किसानों और ऋण माफी के बारे में सरकार का रुख क्या है?
हाईकोर्ट ने 12 मई को यह जवाब तलब किया था। लेकिन प्रदेश सरकार के चीफ स्टैंडिंग कौंसिल ने उच्च न्यायालय में अर्जी देकर कहा है कि उन्हें निर्धारित तिथि तक प्रदेश सरकार की ओर से इस बारे में कोई निर्देश नहीं मिले हैं। कौंसिल ने कोर्ट से अनुरोध किया कि इसके लिए कुछ और मोहलत दे दी जाए।
इस पर उच्च न्यायालय ने 18 मई को जारी अपने आदेश में कहा है कि इस मामले में प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (राजस्व) हलफनामे के साथ अपना जवाब कोर्ट में दाखिल करें। हाईकोर्ट इस बारे में अगली सुनवाई 8 जुलाई को करेगी।