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‘हम बहनों के लिए भइया आता है इक दिन साल में’
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Thu, 18 Aug 2016 10:55 PM IST
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जेल में भाई को राखी बांधती खुशबू।
- फोटो : अमर उजाला
बांदा। ‘हम बहनों के लिए भइया आता है इक दिन साल में, चले आना हर हाल में’। दिल में कुछ प्यार का यही गीत गुनगुनाते हुए बहनों ने भाइयों की सूनी कलाइयों को राखी से सजा दिया। हंसी-खुशी के इस दुर्लभ क्षण में कुछ देर के लिए बहन-भाइयों की आंखें डबडबा गईं। बहन के हाथों रोली और टीका करवाकर मीठे मुंह से अपनी प्यारी बहना से हमेशा उसकी सुरक्षा वचन दिया। इन्हीं नजारों के साथ गुरुवार को रक्षाबंधन का पर्व हर्षोउत्लास से मनाया गया।
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अबकी राखी बंधन का मुहूर्त दोपहर तीन बजे से पहले था। सुबह से ही घरों में रक्षाबंधन की खास तैयारियां शुरू हो गईं। विशेष रूप से सजाए गए थालों मेें राखी रखी गई।
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इसके लिए बहनें अपने पिया के घर से मायके आ गई थीं। जहां बहनें नहीं आ सकीं वहां भाई खुद पहुंच गए। बहन ने भाई के प्रति अटूट प्यार और विश्वास जताते हुए उसके माथे पर तिलक लगाया और कलाई में राखी बांधी। दोनों ने एक-दूसरे को मिठाई भी खिलाई। कई बहन-भाइयों की आंखों में प्रेम के आंसू छलक उठे। भाइयों ने बहनों की ताउम्र रक्षा का वादा किया। राखी की रौनक और धूम दिन भर चली। दूरदराज से लंबा सफर तय करके बहन-भाई एक दूसरे के पास पहुंचे। ट्रेनों और बसों में भारी भीड़ रही। उधर, मिठाई का कारोबार भी खूब परवान चढ़ा। मिठाई की दुकानें विशेष रूप से सजाई गईं। सुबह से शाम तक ग्राहकों की भीड़ रही। टीवी, रेडियो के अलावा संगीत उपकरणों से राखी बंधन के गीत गूंजते रहे। उधर, बबेरू प्रतिनिधि के मुताबिक कजलिया विसर्जन के बाद मढ़ीदाई मंदिर समेत देवालयों में अर्पित की गईं। मेला सा नजारा रहा। बहनों ने राखी बांधकर भाइयों की लंबी उम्र की कामना की। नरैनी, अतर्रा, बदौसा, तिंदवारी, मटौंध, पैलानी, जसपुरा, करतल, कालिंजर, गिरवां, खप्टिहाकलां, बेंदाघाट, पिपरहरी, कमासिन, मरका, चिल्ला, जखौरा आदि प्रतिनिधियों के मुताबिक पूरे क्षेत्र में खुशियाें भरे माहौल में रक्षाबंधन और कजली विसर्जन मनाया गया।
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