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पारे से पस्त पशुओं की खुराक आधी, दूध चौथाई
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गर्मी में तपते गोवंश। संवाद
- फोटो : BANDA
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में 44 डिग्री तापमान की गर्मी झेल रहे 18 लाख से अधिक गोवंश व महिषवंशीय पशुओं की जान जोखिम में है। इनकी सहनशक्ति 38 डिग्री तक है। ऐसे में इन बेजुबानों की खुराक घटकर आधी रह गई है और दूध उत्पादन मात्र एक चौथाई बचा है। अपने दुधारू और कीमती पशुओं पर पड़ रही इस मौसम की मार से पशु पालक भी बेचैन हैं।
चित्रकूटधाम मंडल में 8 लाख 3 हजार 355 गोवंश व 10 लाख 76 हजार 110 महिषवंशीय पशु हैं। पशु चिकित्सा विभाग के मुताबिक, यह गोवंश अधिकतम 38 डिग्री तापमान की गर्मी ही सहन कर सकते हैं। इससे अधिक होने पर इनमें कई शारीरिक दुश्वारियां पैदा हो जाती हैं। खाने-पीने की क्षमता घट जाती है। इसका सीधा असर उनके दुग्ध उत्पादन पर पड़ता है।
वर्तमान में 44 डिग्री की तपिश से यह लाखों दुधारू पशु इन्हीं परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। हरा चारा और भूसा भी बमुश्किल आधा खा रहे हैं। कई स्थानों और खासकर गोशालाओं में धान का सूखा पुआल परोसा जा रहा है। यह खुद भी गरम होता है। गोशालाओं में खुले आसमान तले लू-धूप सह रहे मवेशियों को पर्याप्त पानी की भी व्यवस्था नहीं है।
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मनोज अवस्थी, उप निदेशक (पशुपालन) चित्रकूटधाम मंडल, बांदा ने कहा कि मौजूदा तापमान से पशुओं को बचाना जरूरी है, अन्यथा पशु हीट स्ट्रोक का शिकार होकर दम तोड़ सकते हैं। हीट स्ट्रोक हो जाने पर तत्काल एक लीटर पानी में 250 ग्राम शीतल पाउडर व हीट स्ट्रोक बैक की टेबलेट देनी चाहिए।
चित्रकूटधाम मंडल के गोवंश व महिषवंशीय पशु
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जनपद गोवंश महिषवंश
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बांदा 2,55,495 3,76,110
महोबा 1,38,969 1,37,867
चित्रकूट 2,67,740 2,51,688
हमीरपुर 1,41,151 2,38,510
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योग- 8,03,355 10,04,175
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कौन हैं गोवंश व महिषवंश पशु
महिषवंश पशु : भैंस, पडिय़ा, पड़वा, ऊंट, घोड़ा, बकरी, बकरा।
गोवंश पशु : विभिन्न नस्लों के गाय, बछिया, बछड़ा, बैल आदि।
पशुओं में हीट स्ट्रोक के लक्षण
खाना पीना छोड़ देता है। शरीर में चकत्ते पड़ जाते हैं। नाक से खून आने लगता है। कुछ दूर चलने के बाद गश खाकर गिर जाता है। दुधारू पशुओं के दूध की मात्रा घटकर एक चौथाई रह जाती है। बुरी तरह से हांफता है।
पशुओं को बचाने के उपाय
दिन में दो बार पांच किलो भूसा, 100 ग्राम नमक, एक किलो गना खली, एक किलो हरा चारा परोसें। छाया की पर्याप्त व्यवस्था और ठंडक के लिए चारों ओर पानी से भीखे जूट के बोरों का परदा, 24 घंटे में तीन बार नमक व आटा डालकर पानी पिलाना चाहिए।
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चित्रकूटधाम मंडल में 8 लाख 3 हजार 355 गोवंश व 10 लाख 76 हजार 110 महिषवंशीय पशु हैं। पशु चिकित्सा विभाग के मुताबिक, यह गोवंश अधिकतम 38 डिग्री तापमान की गर्मी ही सहन कर सकते हैं। इससे अधिक होने पर इनमें कई शारीरिक दुश्वारियां पैदा हो जाती हैं। खाने-पीने की क्षमता घट जाती है। इसका सीधा असर उनके दुग्ध उत्पादन पर पड़ता है।
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वर्तमान में 44 डिग्री की तपिश से यह लाखों दुधारू पशु इन्हीं परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। हरा चारा और भूसा भी बमुश्किल आधा खा रहे हैं। कई स्थानों और खासकर गोशालाओं में धान का सूखा पुआल परोसा जा रहा है। यह खुद भी गरम होता है। गोशालाओं में खुले आसमान तले लू-धूप सह रहे मवेशियों को पर्याप्त पानी की भी व्यवस्था नहीं है।
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मनोज अवस्थी, उप निदेशक (पशुपालन) चित्रकूटधाम मंडल, बांदा ने कहा कि मौजूदा तापमान से पशुओं को बचाना जरूरी है, अन्यथा पशु हीट स्ट्रोक का शिकार होकर दम तोड़ सकते हैं। हीट स्ट्रोक हो जाने पर तत्काल एक लीटर पानी में 250 ग्राम शीतल पाउडर व हीट स्ट्रोक बैक की टेबलेट देनी चाहिए।
चित्रकूटधाम मंडल के गोवंश व महिषवंशीय पशु
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जनपद गोवंश महिषवंश
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बांदा 2,55,495 3,76,110
महोबा 1,38,969 1,37,867
चित्रकूट 2,67,740 2,51,688
हमीरपुर 1,41,151 2,38,510
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योग- 8,03,355 10,04,175
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कौन हैं गोवंश व महिषवंश पशु
महिषवंश पशु : भैंस, पडिय़ा, पड़वा, ऊंट, घोड़ा, बकरी, बकरा।
गोवंश पशु : विभिन्न नस्लों के गाय, बछिया, बछड़ा, बैल आदि।
पशुओं में हीट स्ट्रोक के लक्षण
खाना पीना छोड़ देता है। शरीर में चकत्ते पड़ जाते हैं। नाक से खून आने लगता है। कुछ दूर चलने के बाद गश खाकर गिर जाता है। दुधारू पशुओं के दूध की मात्रा घटकर एक चौथाई रह जाती है। बुरी तरह से हांफता है।
पशुओं को बचाने के उपाय
दिन में दो बार पांच किलो भूसा, 100 ग्राम नमक, एक किलो गना खली, एक किलो हरा चारा परोसें। छाया की पर्याप्त व्यवस्था और ठंडक के लिए चारों ओर पानी से भीखे जूट के बोरों का परदा, 24 घंटे में तीन बार नमक व आटा डालकर पानी पिलाना चाहिए।