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Banda News: भूगर्भ जल विभाग के फ्लो मीटर रोकेंगे अत्यधिक भूजल दोहन
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बांदा। जनपद में अत्यधिक जल दोहन और जल संरक्षण में लापरवाही चिंता का विषय बन गई है। व्यावसायिक भवनों में पानी की काफी ज्यादा बर्बादी हो रही है। घरों में भी सबमर्सिबल के जरिए लोग पानी खूब बहाते हैं। अब भूगर्भ जल विभाग व्यवसायिक भवनों व सबमर्सिबल वाले घरों में फ्लो मीटर लगाएगा। इसकी कीमत करीब 20 हजार रुपये होगी। इसका भुगतान भवन स्वामी को ही करना होगा। यह मीटर हर रोज खर्च होने वाले पानी का हिसाब-किताब रखेगा। एक क्लिक पर सारा ब्योरा अधिकारियों के सामने आ जाएगा।
जनपद में नगरीय क्षेत्र में ज्यादातर तालाब व कुओं की स्थिति खराब होने के बाद जल संकट बढ़ता जा रहा है। हर वर्ष एक से डेढ़ मीटर पानी नीचे जा रहा है, इससे धरती की कोख खाली हो रही है। शहर में करीब 60 से ज्यादा आरो प्लांट चल रहे हैं। इसके अलावा शापिंग माल, रेस्टोरेंट, होटल आदि की संख्या करीब एक सैकड़ा है। शासन ने इन व्यवसायिक भवनों में भूजल रिचार्ज के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया है। करीब पांच वर्ष से ज्यादा समय बीत गया, व्यावसायिक भवनों में कहीं भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नजर नहीं आते। शहर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था सही नहीं होने के कारण घर-घर सबमर्सिबल लगाए गए हैं। इसलिए नगरीय क्षेत्र में लगातार भूजल दोहन बढ़ता जा रहा है। नतीजे में भूजल स्तर नीचे गिरता जा रहा है।
सख्त कदम उठाएगा भूगर्भ जल विभाग
भूजल दोहन रोकने के लिए भूगर्भ जल विभाग अब सख्त कदम उठाएगा। इसके लिए मतगणना खत्म होने का इंतजार है। इसके बाद व्यावसायिक भवनों में फ्लोमीटर लगाए जाएंगे। यह मीटर धरती से निकाले जाने वाले पानी का हर रोज हिसाब किताब रखेंगे। इनमें ऐसा डिवाइस है, जिसके जरिए भूगर्भ जल विभाग ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी व शासन पर बैठे अधिकारी भी एक क्लिक पर जानकारी हासिल कर लेंगे। व्यवसायियों के यहां लगने वाले फ्लो मीटर की कीमत करीब 20 हजार रुपये होगी। जबकि घरों में पांच से दस हजार रुपये कीमत के फ्लोमीटर लगेंगे। व्यावसायिक भवनों में यदि हर रोज दस हजार लीटर से ज्यादा पानी खर्च किया तो इसका चार्ज भूगर्भ जल विभाग में जमा करना होगा।
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-लोकसभा चुनाव के बाद जिलाधिकारी की अध्यक्षता में फ्लो मीटर लगाने के लिए बैठक होगी। उनके निर्देश पर पहले व्यावसायिक भवनों में फ्लोमीटर लगाए जाएंगे। इससे जल की बर्बादी रोकी जा सकेगी।
-सौरभ शुक्ला, अवर अभियंता, भूगर्भ जल विभाग
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जनपद में नगरीय क्षेत्र में ज्यादातर तालाब व कुओं की स्थिति खराब होने के बाद जल संकट बढ़ता जा रहा है। हर वर्ष एक से डेढ़ मीटर पानी नीचे जा रहा है, इससे धरती की कोख खाली हो रही है। शहर में करीब 60 से ज्यादा आरो प्लांट चल रहे हैं। इसके अलावा शापिंग माल, रेस्टोरेंट, होटल आदि की संख्या करीब एक सैकड़ा है। शासन ने इन व्यवसायिक भवनों में भूजल रिचार्ज के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया है। करीब पांच वर्ष से ज्यादा समय बीत गया, व्यावसायिक भवनों में कहीं भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नजर नहीं आते। शहर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था सही नहीं होने के कारण घर-घर सबमर्सिबल लगाए गए हैं। इसलिए नगरीय क्षेत्र में लगातार भूजल दोहन बढ़ता जा रहा है। नतीजे में भूजल स्तर नीचे गिरता जा रहा है।
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सख्त कदम उठाएगा भूगर्भ जल विभाग
भूजल दोहन रोकने के लिए भूगर्भ जल विभाग अब सख्त कदम उठाएगा। इसके लिए मतगणना खत्म होने का इंतजार है। इसके बाद व्यावसायिक भवनों में फ्लोमीटर लगाए जाएंगे। यह मीटर धरती से निकाले जाने वाले पानी का हर रोज हिसाब किताब रखेंगे। इनमें ऐसा डिवाइस है, जिसके जरिए भूगर्भ जल विभाग ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी व शासन पर बैठे अधिकारी भी एक क्लिक पर जानकारी हासिल कर लेंगे। व्यवसायियों के यहां लगने वाले फ्लो मीटर की कीमत करीब 20 हजार रुपये होगी। जबकि घरों में पांच से दस हजार रुपये कीमत के फ्लोमीटर लगेंगे। व्यावसायिक भवनों में यदि हर रोज दस हजार लीटर से ज्यादा पानी खर्च किया तो इसका चार्ज भूगर्भ जल विभाग में जमा करना होगा।
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-लोकसभा चुनाव के बाद जिलाधिकारी की अध्यक्षता में फ्लो मीटर लगाने के लिए बैठक होगी। उनके निर्देश पर पहले व्यावसायिक भवनों में फ्लोमीटर लगाए जाएंगे। इससे जल की बर्बादी रोकी जा सकेगी।
-सौरभ शुक्ला, अवर अभियंता, भूगर्भ जल विभाग