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सुधर जाइए, वरना हम सुधार देंगे
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get it right, or else we'll fix it
- फोटो : BANDA
बांदा। अचानक जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे डीएम अनुराग पटेल अव्यवस्थाएं और अंधेरगर्दी देखकर भड़क गए। गैरहाजिर नौ डाक्टरों और 55 कर्मियों का एक दिन का वेतन रोक दिया। सीएमएस को कड़ी फटकार लगाते हुए डाक्टरों और फार्मासिस्ट के बारे में एक सप्ताह के अंदर अपना स्पष्टीकरण और संस्तुति सहित रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। बाहर से मंगाई गई दवाओं की कीमत करीब 5800 रुपये डाक्टरों से मरीजों को वापस दिलाई। बाहर से दवा लिखने पर सीएमएस पर निलंबन की कार्रवाई की चेतावनी दी।
डीएम सुबह 10 बजे जिला अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल का समय सुबह 8 बजे का है। दो घंटे बाद भी अधिकांश डाक्टर और कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं मिले। दवा स्टोर में भी अंधेरगर्दी मिली। सिप्ट्रियाजोन मेडिसिन और इंजेक्शन एमाइका सल्फेट स्टॉक रजिस्टर में 1775 दर्ज थे, जबकि मिलान में 1550 ही निकले।
डेढ़ सौ का कुछ लेखाजोखा नहीं मिला। इंजेक्शन डिक्लोफ्रेम 14,000 दर्ज था, मिले सिर्फ 8550। स्नैक बाइट इंजेक्शन 185 दर्ज थे, ये स्टॉक से 10 ज्यादा पाए गए। रैबिट बाइट 20 कम मिलीं। तापमान रजिस्टर भी नदारद था। फ्रिज में कौन सी दवा किस तापमान पर रखी जानी है, इसकी कोई जानकारी नहीं मिली। डीएम ने सीएमएस से कहा- सुधर जाइए, वरना हम सुधार देंगे।
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डीएम ने ब्लड बैंक, रजिस्ट्रेशन कक्ष, डिजिटल एक्सरे कक्ष, अल्ट्रासाउंड कक्ष, सामान्य एक्सरे कक्ष और शौचालयों का भी निरीक्षण किया। ये सब गंदे मिले। डॉ. बलवीर ने एप्रिन नहीं पहना था। न ही पैरों में जूते थे। आम आदमी की तरफ स्लीपर पहने टहलते मिले। डीएम ने उन्हें भी आड़े हाथों लिया। डीएम ब्लड सैंपल कलेक्शन कक्ष, आटो इनालाइजर कक्ष, जिरियाट्रिक यूनिट, फिजियोथेरेपी, एनआरसी रूम देखा और सैम बच्चों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
मुआयने के दौरान कई मरीजों ने डीएम को बताया कि डाक्टरों के लिखने पर वह बाहर से दवाएं खरीदकर लाए हैं। डा.एके राजपूत की लिखी 125 रुपये, डा.हृदयेश पटेल की लिखी 1640 रुपये और डा.विनीत द्वारा लिखी 2900 व 1200 रुपये की दवाएं बाहर से मंगाई। डीएम ने सख्त नाराजगी जताते हुए चारों मरीजों को रुपये अपने सामने वापस कराए। खबरदार किया कि दोबारा बाहर से दवाएं लिखने की शिकायत मिली तो डाक्टर और स्टाफ कर्मी व सीएमएस के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
डा. टीआर सरसैय्या, डा. एसपी गुप्ता, डा. अशोक पटेल, डा. विनय कुमार, डा. शिवचरण पटेल, डा. अनिल यादव, डा. राहुल श्रीवास्तव (संविदा), डा. अभिषेक प्राणायामी, डा. आकाशदीप शिवहरे अनुपस्थित थे। इनके अलावा फार्मासिस्ट जेएल राजपूत सहित स्टाफ कर्मी दिनेश, शंभू, एमए खां, संजय लेखाकार, नर्सों में प्रीति पाल, वंदना, रेनू गुप्ता, सविता पटेल, दीप्ति सिंह, रश्मि पांडेय, एनएचएम स्टाफ में डा.रामकुमार वर्मा, राकेश कुमार, सुनील, कौशल किशोर, सविता कन्नौजिया, पुष्पलता, लवलेश कुमार, अनामिका अवस्थी, मीरा, आशीष और तृतीय श्रेणी कर्मी अनुराग पांडेय, शशांक, ई-हॉस्पिटल में आदित्य कुमार, सौरभ सिंह, देवेंद्र गुप्ता, संग मित्रा, आदिल सिद्दीकी। अवनी परिधि सेवा प्रदाता से विजय सिंह, विकास, अरुण सिंह, दिव्यांशु, धर्मेंद्र उमाकांत, संजना साहू, गोरेलाल, श्रीकांत, सतवंत, सुनील कुमार यादव, मुशीर, गोविंद, विनय कुमार, अरविंद, शिवाकांत, शालिनी गुप्ता, जॉनी, लोकेंद्र सिंह, राजकिशोर यादव, संजय, विनीत कुमार, बलराम, घनश्याम, रंजीत साहू, भूपेंद्र।
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डीएम सुबह 10 बजे जिला अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल का समय सुबह 8 बजे का है। दो घंटे बाद भी अधिकांश डाक्टर और कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं मिले। दवा स्टोर में भी अंधेरगर्दी मिली। सिप्ट्रियाजोन मेडिसिन और इंजेक्शन एमाइका सल्फेट स्टॉक रजिस्टर में 1775 दर्ज थे, जबकि मिलान में 1550 ही निकले।
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डेढ़ सौ का कुछ लेखाजोखा नहीं मिला। इंजेक्शन डिक्लोफ्रेम 14,000 दर्ज था, मिले सिर्फ 8550। स्नैक बाइट इंजेक्शन 185 दर्ज थे, ये स्टॉक से 10 ज्यादा पाए गए। रैबिट बाइट 20 कम मिलीं। तापमान रजिस्टर भी नदारद था। फ्रिज में कौन सी दवा किस तापमान पर रखी जानी है, इसकी कोई जानकारी नहीं मिली। डीएम ने सीएमएस से कहा- सुधर जाइए, वरना हम सुधार देंगे।
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डीएम ने ब्लड बैंक, रजिस्ट्रेशन कक्ष, डिजिटल एक्सरे कक्ष, अल्ट्रासाउंड कक्ष, सामान्य एक्सरे कक्ष और शौचालयों का भी निरीक्षण किया। ये सब गंदे मिले। डॉ. बलवीर ने एप्रिन नहीं पहना था। न ही पैरों में जूते थे। आम आदमी की तरफ स्लीपर पहने टहलते मिले। डीएम ने उन्हें भी आड़े हाथों लिया। डीएम ब्लड सैंपल कलेक्शन कक्ष, आटो इनालाइजर कक्ष, जिरियाट्रिक यूनिट, फिजियोथेरेपी, एनआरसी रूम देखा और सैम बच्चों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
मुआयने के दौरान कई मरीजों ने डीएम को बताया कि डाक्टरों के लिखने पर वह बाहर से दवाएं खरीदकर लाए हैं। डा.एके राजपूत की लिखी 125 रुपये, डा.हृदयेश पटेल की लिखी 1640 रुपये और डा.विनीत द्वारा लिखी 2900 व 1200 रुपये की दवाएं बाहर से मंगाई। डीएम ने सख्त नाराजगी जताते हुए चारों मरीजों को रुपये अपने सामने वापस कराए। खबरदार किया कि दोबारा बाहर से दवाएं लिखने की शिकायत मिली तो डाक्टर और स्टाफ कर्मी व सीएमएस के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
डा. टीआर सरसैय्या, डा. एसपी गुप्ता, डा. अशोक पटेल, डा. विनय कुमार, डा. शिवचरण पटेल, डा. अनिल यादव, डा. राहुल श्रीवास्तव (संविदा), डा. अभिषेक प्राणायामी, डा. आकाशदीप शिवहरे अनुपस्थित थे। इनके अलावा फार्मासिस्ट जेएल राजपूत सहित स्टाफ कर्मी दिनेश, शंभू, एमए खां, संजय लेखाकार, नर्सों में प्रीति पाल, वंदना, रेनू गुप्ता, सविता पटेल, दीप्ति सिंह, रश्मि पांडेय, एनएचएम स्टाफ में डा.रामकुमार वर्मा, राकेश कुमार, सुनील, कौशल किशोर, सविता कन्नौजिया, पुष्पलता, लवलेश कुमार, अनामिका अवस्थी, मीरा, आशीष और तृतीय श्रेणी कर्मी अनुराग पांडेय, शशांक, ई-हॉस्पिटल में आदित्य कुमार, सौरभ सिंह, देवेंद्र गुप्ता, संग मित्रा, आदिल सिद्दीकी। अवनी परिधि सेवा प्रदाता से विजय सिंह, विकास, अरुण सिंह, दिव्यांशु, धर्मेंद्र उमाकांत, संजना साहू, गोरेलाल, श्रीकांत, सतवंत, सुनील कुमार यादव, मुशीर, गोविंद, विनय कुमार, अरविंद, शिवाकांत, शालिनी गुप्ता, जॉनी, लोकेंद्र सिंह, राजकिशोर यादव, संजय, विनीत कुमार, बलराम, घनश्याम, रंजीत साहू, भूपेंद्र।