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सूखे की मार से वीरान गल्ला मंडी
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा।
Updated Tue, 01 Mar 2016 11:24 PM IST
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सूखे की मार से गल्ला मंडी वीरान है। आढ़तिया हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। उधर, काम न मिलने से पल्लेदार (मजदूर) महानगरों को पलायन कर गए। धान व तिल की मामूली खरीद के सिवा मंडी में अनाज का दाना नहीं आया।
कृषि उत्पादन मंडी परिषद में लगभग आधा सैकड़ा आढ़तियों की दुकानें हैं। इनमें गिनी-चुनी आढ़तों के सिवा अधिकांश में ताले पड़े हैं। जिन्होंने दुकानें खोल रखी हैं वह भी खाली बैठे हैं। आढ़तिया फूल सिंह व स्वयंवर सिंह ने बताया कि फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में मसूर, मटर और सरसों की आवक शुरू हो जाती थी।
किसानों का जमघट रहता था लेकिन इस साल सन्नाटा है। लाला भगवानदास, विष्णु कुमार गुप्ता, राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि हर आढ़त में आठ से 10 मजदूर काम करते थे। व्यापार ठप होने से बड़ी संख्या में मजदूर दिल्ली व पंजाब चले गए। मंडी सचिव केपी कुशवाहा ने बताया कि अक्तूबर-नवंबर में व्यापारियों के जरिये 73 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी। तिल की खरीद मात्र 700 एमटी हुई। मसूर, चना, मटर और सरसों की अभी कोई आवक नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सूखे से मंडी व्यवसाय चौपट है।
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कृषि उत्पादन मंडी परिषद में लगभग आधा सैकड़ा आढ़तियों की दुकानें हैं। इनमें गिनी-चुनी आढ़तों के सिवा अधिकांश में ताले पड़े हैं। जिन्होंने दुकानें खोल रखी हैं वह भी खाली बैठे हैं। आढ़तिया फूल सिंह व स्वयंवर सिंह ने बताया कि फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में मसूर, मटर और सरसों की आवक शुरू हो जाती थी।
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किसानों का जमघट रहता था लेकिन इस साल सन्नाटा है। लाला भगवानदास, विष्णु कुमार गुप्ता, राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि हर आढ़त में आठ से 10 मजदूर काम करते थे। व्यापार ठप होने से बड़ी संख्या में मजदूर दिल्ली व पंजाब चले गए। मंडी सचिव केपी कुशवाहा ने बताया कि अक्तूबर-नवंबर में व्यापारियों के जरिये 73 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी। तिल की खरीद मात्र 700 एमटी हुई। मसूर, चना, मटर और सरसों की अभी कोई आवक नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सूखे से मंडी व्यवसाय चौपट है।
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