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केन जल धारा मोड़ने से मछलियां मरीं
ब्यूरो, अमर उजाला, करतल, बांदा
Updated Thu, 04 Dec 2014 11:44 PM IST
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बालू माफियाओं द्वारा केन नदी की धारा मोड़ने से बिल्हरका घाट में भारी तादाद में मछलियां मर गईं। वाहनों के शोर से प्रवासी पक्षियों का भी प्रवास नहीं हो रहा। सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
यहां से मध्य प्रदेश के अजयगढ़, पन्ना, चंदला, छतरपुर और गौरिहार क्षेत्र को प्रतिदिन लाखों रुपये की बालू आपूर्ति की जाती है। करोड़ों रुपये की बालू यूपी से निकालकर सीमावर्ती मध्य प्रदेश के पन्ना चौकी में डंप की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मछलियां मरने से घाट में दुर्गंध फैली है। पानी प्रदूषित हो जाने से इस्तेमाल के लायक नहीं बचा।
ट्रैक्टरों की धमाचौकड़ी से दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। जाड़े के मौसम में बिल्हरका, खलारी, मोहन पुरवा, नेढ़ुवा, बड़ैछा आदि घाटों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। वाहनों के शोर से यह पक्षी नहीं आ रहे।
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प्रदूषण से यहां सारस के जोड़े भी नजर नहीं आते। टिटिहरी व जलकौआ भी दम तोड़ रहे हैं। एसडीएम नरैनी धीरेंद्र कुमार का कहना है कि दबिश के लिए तहसील से निकलते ही बालू माफियाओं तक खबर पहुंच जाती है। नतीजे में अवैध खनन करने वाले हाथ नहीं आते।
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यहां से मध्य प्रदेश के अजयगढ़, पन्ना, चंदला, छतरपुर और गौरिहार क्षेत्र को प्रतिदिन लाखों रुपये की बालू आपूर्ति की जाती है। करोड़ों रुपये की बालू यूपी से निकालकर सीमावर्ती मध्य प्रदेश के पन्ना चौकी में डंप की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मछलियां मरने से घाट में दुर्गंध फैली है। पानी प्रदूषित हो जाने से इस्तेमाल के लायक नहीं बचा।
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ट्रैक्टरों की धमाचौकड़ी से दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। जाड़े के मौसम में बिल्हरका, खलारी, मोहन पुरवा, नेढ़ुवा, बड़ैछा आदि घाटों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। वाहनों के शोर से यह पक्षी नहीं आ रहे।
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प्रदूषण से यहां सारस के जोड़े भी नजर नहीं आते। टिटिहरी व जलकौआ भी दम तोड़ रहे हैं। एसडीएम नरैनी धीरेंद्र कुमार का कहना है कि दबिश के लिए तहसील से निकलते ही बालू माफियाओं तक खबर पहुंच जाती है। नतीजे में अवैध खनन करने वाले हाथ नहीं आते।