{"_id":"67c5f6fdb248f9f11907cb16","slug":"father-said-if-the-government-wanted-my-daughters-life-could-have-been-saved-banda-news-c-212-1-sknp1008-123028-2025-03-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: पिता बोले-सरकार चाहती तो बच जाती बेेटी की जान...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: पिता बोले-सरकार चाहती तो बच जाती बेेटी की जान...
विज्ञापन
माता-पिता को सांत्वना देते समाजसेवी। फाइल फोटो
- फोटो : माता-पिता को सांत्वना देते समाजसेवी। फाइल फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। सरकार चाहती तो बच जाती बेटी की जान। निर्दाेष बेटी फांसी पर चढ़ गई। नहीं बचा पाई भारत सरकार उनकी बेटी की जान। यह बात फोन पर रो-रोकर शहजादी के पिता शब्बीर ने कही।
मटौंध थाना क्षेत्र के गोयरा मुगली गांव निवासी शब्बीर खान की बेटी शहजादी रोटी बैंक सोसाइटी से जुड़कर समाजसेवा का काम करती थी। फेसबुक के जरिए उसकी दोस्ती आगरा के रहने वाले उजैर से हो गई। नाटकीय ढंग से दिसंबर 2021 में इलाज कराने के नाम पर शहजादी को उजैर अपने शहर आगरा ले गया
वहां उसका टूरिस्ट वीजा बनवाया और दुबई में रह रहे आगरा निवासी दंपती फैज अहमद व नादिया के पास भेज दिया।
जहां पर उसे नियोक्ता के बच्चे की देखभाल के लिए नियुक्ति किया गया। सात दिसंबर 2022 को बच्चे को टीका लगाया गया और उसी दिन उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम की सिफारिस के बावजूद माता-पिता ने कराने से इंकार कर दिया। जांच रोकने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी किए, लेकिन फरवरी माह में अचानक एक वीडियों रिकार्डिंग में बच्चे की हत्या स्वीकार करते हुए दिखाया गया।10 फरवरी 2023 को यूएई पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। 31 जुलाई 2023 को अदालत ने उसे फांसी की सजा सुना दी। पिता ने बेटी को बहला-फुसलाकर आगरा ले जाने और वहां से दुबई में बेच देने सहित धोखाधड़ी आदि का मुकदमा मटौंध थाने में दर्ज कराया।
विज्ञापन
अमर उजाला टीम ने शहजादी प्रकरण को एक अभियान के तहत चलाया। इसमेंें तमाम समाजसेवी, अधिवक्ता व जनप्रतिनिधि बांदा की बेटी को बचाने के लिए सड़क पर उतर आए थे।
विज्ञापन
बांदा। सरकार चाहती तो बच जाती बेटी की जान। निर्दाेष बेटी फांसी पर चढ़ गई। नहीं बचा पाई भारत सरकार उनकी बेटी की जान। यह बात फोन पर रो-रोकर शहजादी के पिता शब्बीर ने कही।
मटौंध थाना क्षेत्र के गोयरा मुगली गांव निवासी शब्बीर खान की बेटी शहजादी रोटी बैंक सोसाइटी से जुड़कर समाजसेवा का काम करती थी। फेसबुक के जरिए उसकी दोस्ती आगरा के रहने वाले उजैर से हो गई। नाटकीय ढंग से दिसंबर 2021 में इलाज कराने के नाम पर शहजादी को उजैर अपने शहर आगरा ले गया
विज्ञापन
वहां उसका टूरिस्ट वीजा बनवाया और दुबई में रह रहे आगरा निवासी दंपती फैज अहमद व नादिया के पास भेज दिया।
जहां पर उसे नियोक्ता के बच्चे की देखभाल के लिए नियुक्ति किया गया। सात दिसंबर 2022 को बच्चे को टीका लगाया गया और उसी दिन उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम की सिफारिस के बावजूद माता-पिता ने कराने से इंकार कर दिया। जांच रोकने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी किए, लेकिन फरवरी माह में अचानक एक वीडियों रिकार्डिंग में बच्चे की हत्या स्वीकार करते हुए दिखाया गया।10 फरवरी 2023 को यूएई पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। 31 जुलाई 2023 को अदालत ने उसे फांसी की सजा सुना दी। पिता ने बेटी को बहला-फुसलाकर आगरा ले जाने और वहां से दुबई में बेच देने सहित धोखाधड़ी आदि का मुकदमा मटौंध थाने में दर्ज कराया।
विज्ञापन
अमर उजाला टीम ने शहजादी प्रकरण को एक अभियान के तहत चलाया। इसमेंें तमाम समाजसेवी, अधिवक्ता व जनप्रतिनिधि बांदा की बेटी को बचाने के लिए सड़क पर उतर आए थे।