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पिता का कर्ज चुका रहे ‘राम’ लक्ष्मण’
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Sun, 02 Oct 2016 11:43 PM IST
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दुर्गेश शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। रामलीला के चमकते-दमकते मंच पर किरदार अदा करने वाले अदाकारों की रीयल लाइफ (वास्तविक जीवन) कुछ और ही है। इसकी बानगी यहां की मुख्य रामलीला प्रागी तालाब में किरदार निभा रहे कलाकार हैं। यहां के ‘राम’ और ‘लक्ष्मण’ मंचन से मिलने वाले मेहनताना से अपने पिता का बैंक कर्ज अदा कर रहे हैं। पढ़ाई का खर्च भी निकाल रहे हैं।
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रामलीला में राम और लक्ष्मण के रूप में भाइयों की भूमिका निभा रहे दोनों किशोर उम्र कलाकार वास्तविक जीवन में भी सगे भाई हैं। चित्रकूट जनपद के ओरहा गांव के बाशिंदे दुर्गेश शुक्ला राम का रोल अदा कर रहे हैं। उनका सगा भाई अखिलेश कुमार शुक्ला लक्ष्मण का किरदार निभा रहा है। यह दोनों सगे भाई पिछले छह सालों से रामलीला में राम और लक्ष्मण का अभिनय कर रहे हैं। राम की भूमिका निभाने वाले दुर्गेश अतर्रा स्वर्गीय मन्नूलाल अवस्थी संस्कृत विद्यालय में इंटरमीडिएट का छात्र है। जबकि लक्ष्मण बने अखिलेश इसी विद्यालय में नौवीं का छात्र है।
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दुर्गेश और अखिलेश ने बताया कि उनके पिता कृष्ण पूजन शुक्ला पेशे से किसान हैं। मात्र 10 बीघा जमीन है। पिता ने चार साल पूर्व खेती-किसानी के लिए बैंक से दो लाख रुपये कर्ज लिया था। मौसम की मार से खेती से कुछ हाथ नहीं लग रहा। ऐसे में उन्हें रामलीला मंचन में मिलने वाला मानदेय पिता के बैंक कर्ज की किश्त के रूप में अदा करना पड़ता है। पढ़ाई के साथ यह दोनों भाई लगभग पूरे वर्ष यूपी-एमपी में होने वाली रामलीलाओं में अभिनय करते हैं। दोनों भाइयों को प्रत्येक रामलीला में रोज दो हजार रुपये मानदेय के रूप में मिलते हैं। 10 से 18 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। दोनों ने बताया कि यह पूरा पैसा वह अपने पिता को सौंप देते हैं।
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‘सीता’ हाईस्कूल के छात्र
बांदा। रामलीला में सीता बनकर दर्शकों का मन मोह रहे सत्यम मिश्रा भी अतर्रा के स्वर्गीय मन्नूलाल अवस्थी संस्कृत विद्यालय में नौवीं कक्षा का छात्र है। पिता चंद्र प्रकाश मिश्रा किसान हैं। सत्यम पिछले तीन सालों से रामलीला में सीता की भूमिका निभा रहे हैं। बताया कि 8 से 10 हजार रुपये हर रामलीला के मंचन में मिल जाते हैं।
सिक्योरिटी गार्ड से रावण की पकड़ी राह
बांदा। तीन दशकों से रामलीलाओं में रावण की भूमिका निभाते चले आ रहे बाबू सिंह तोमर ने बैंक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी छोड़कर रावण की राह पकड़ ली है। पिता हरनाम सिंह सेना में जवान थे। तोमर बताते हैं कि कई वर्ष पूर्व पत्नी की मृत्यु हो जाने पर बैंक पर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी छोड़कर रामलीला ज्वाइन कर ली। इसकी कमाई से खुद का खर्च चलाने के अलावा बचने पर दानपुण्य कर लेते हैं।