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आडंबर से नहीं, भाव से प्रसन्न होते हैं ईश्वर
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 23 May 2015 11:17 PM IST
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श्रीमद्भागवत कथा में दूसरे दिन श्रीकृष्ण लीला का प्रसंग सुनाया गया। भक्त और भगवान के बीच भाव का भी बखान किया गया।
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अतर्रा चुंगी स्थित शिव मंदिर में आयोजित संगीतमयी कथा में आचार्य पंडित अभिषेक कृष्ण अवस्थी ने कहा कि ईश्वर भक्त के भाव से प्रसन्न होते हैं, आडंबर से नहीं। शुकदेव ने राजा परीक्षित से कहा था कि जब शरीर हमारे वश में होगा तब हम कुछ करेंगे।
कथा व्यास ने बताया कि मनुष्य 24 घंटे में 21 हजार 600 बार श्वांस लेता है। कुछ श्वांसों में ही भगवान का स्मरण करे तो पाप कट जाएं। जिंदगी खुशहाल हो जाए। ‘चार प्रहर धंधे गए, चार प्रहर गए सोय’ आदि भजनों पर महिला-पुरुष श्रद्धालु थिरकते रहे। शाम को आरती के बाद प्रसाद वितरण हुआ।
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