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डीएम को डेढ़ लाख, एसपी के नाम एक लाख दर्ज
ब्यूरो अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Wed, 02 Nov 2016 11:58 PM IST
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ रजिस्टर का पन्ना
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में मिले बालू खदान संबंधित रजिस्टर में डीएम को डेढ़ लाख रुपये और एसपी व खनिज अधिकारी को एक-एक लाख रुपये देने का जिक्र है। ऐसे में चर्चा आम है कि आखिर ये किस जिले के एसपी और डीएम हैं, जिन्हें मोटी रकम दी जा रही है। इसके अलावा एडीएम और उनके स्टेनो तथा तहसीलदार के नाम भी पैसा लेने वालों की सूची में दर्ज हैं।
बांदा कई जिलों और मध्य प्रदेश की सीमा से जुड़ा है। मध्य प्रदेश की कुरधना, पडुई आदि कई खदानों और हमीरपुर की खदानों से निकाली जा रही बालू के ओवरलोड ट्रक बांदा से ही गुजर रहे हैं। बांदा, हमीरपुर और सीमावर्ती मध्य प्रदेश में बालू का खूब खनन हो रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया में खदान की बही खाते के रजिस्टर के कई पृष्ठ डाले गए हैं। इसमें खदानों में रोज होने वाली आमदनी और खर्च दर्ज है। खर्च वाले पन्ने में अन्य खर्चों के अलावा कई अफसरों के नाम से भी बड़ी रकमें चढ़ी हुई हैं। इसमें डीएम को डेढ़ लाख, एसपी को एक लाख, खनिज अधिकारी को एक लाख, एडीएम को 50 हजार, तहसीलदार को 25 हजार, एसओ को दस हजार, एडीएम के स्टेनो को 7500 की रकम दर्ज है। इसके अलावा लेखपाल के नाम पांच हजार लिखा हुआ है।
वीआईपी खर्च के नाम पर रजिस्टर के विभिन्न पन्नों में क्रमश: 243000, 19297, 144000, 162000 की रकमें दर्ज हैं। फिलहाल यह खुलासा नहीं हो पा रहा कि ये किस जिले के अफसर हैं और यह ब्योरा किस खदान का है? प्रदेश के मुख्यमंत्री को चाहिए कि इसकी उच्च स्तरीय जांच कराएं। उधर, बांदा के अपर जिलाधिकारी गंगाराम गुप्ता पहले यह कह चुके हैं कि रजिस्टर में दर्ज ब्योरे की जांच कराई जाएगी। पता लगाया जाएगा कि यह किस जिले से संबंधित हैं।
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बांदा कई जिलों और मध्य प्रदेश की सीमा से जुड़ा है। मध्य प्रदेश की कुरधना, पडुई आदि कई खदानों और हमीरपुर की खदानों से निकाली जा रही बालू के ओवरलोड ट्रक बांदा से ही गुजर रहे हैं। बांदा, हमीरपुर और सीमावर्ती मध्य प्रदेश में बालू का खूब खनन हो रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया में खदान की बही खाते के रजिस्टर के कई पृष्ठ डाले गए हैं। इसमें खदानों में रोज होने वाली आमदनी और खर्च दर्ज है। खर्च वाले पन्ने में अन्य खर्चों के अलावा कई अफसरों के नाम से भी बड़ी रकमें चढ़ी हुई हैं। इसमें डीएम को डेढ़ लाख, एसपी को एक लाख, खनिज अधिकारी को एक लाख, एडीएम को 50 हजार, तहसीलदार को 25 हजार, एसओ को दस हजार, एडीएम के स्टेनो को 7500 की रकम दर्ज है। इसके अलावा लेखपाल के नाम पांच हजार लिखा हुआ है।
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वीआईपी खर्च के नाम पर रजिस्टर के विभिन्न पन्नों में क्रमश: 243000, 19297, 144000, 162000 की रकमें दर्ज हैं। फिलहाल यह खुलासा नहीं हो पा रहा कि ये किस जिले के अफसर हैं और यह ब्योरा किस खदान का है? प्रदेश के मुख्यमंत्री को चाहिए कि इसकी उच्च स्तरीय जांच कराएं। उधर, बांदा के अपर जिलाधिकारी गंगाराम गुप्ता पहले यह कह चुके हैं कि रजिस्टर में दर्ज ब्योरे की जांच कराई जाएगी। पता लगाया जाएगा कि यह किस जिले से संबंधित हैं।
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