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भाजपा से जिलाध्यक्ष रामकेश और सपा से मंजुला मैदान में
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मंजुला सिंह
- फोटो : BANDA
बांदा। नामांकन की अंतिम तिथि के नजदीक आ जाने के बाद भाजपा और सपा ने लंबे इंतजार के बाद जनपद की दो महत्वपूर्ण सीटों के लिए अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए। भाजपा ने जहां अपने जिलाध्यक्ष को जिले की चर्चित सीट तिंदवारी से प्रत्याशी बनाया है वहीं सपा ने सदर सीट पर पार्टी के कई दिग्गज दावेदारों को दरकिनार कर नए चेहरे और पूर्व मंत्री स्व. विवेक कुमार सिंह की धर्मपत्नी को टिकट सौंपा है। बबेरू सीट पर अभी भी पत्ते नहीं खोले हैं। उधर, कांग्रेस प्रत्याशी तय करने में सबसे पीछे है। चारों सीटों में कहीं भी अब तक प्रत्याशियों के नाम तय नहीं कर सकी।
भाजपा ने बांदा, नरैनी और बबेरू सीटों पर कई दिन पूर्व प्रत्याशियों की घोषणा कर दी थी। इन सीटों पर क्रमश: प्रकाश द्विवेदी, ओममणि वर्मा और रामसेवक शुक्ला को घोषित किया गया है। तिंदवारी सीट पर पेच फंसा था। कहा जा रहा था कि सहयोगी दल निषाद पार्टी ने इस सीट पर अपनी दावेदारी बना रखी है। इसी को लेकर रस्साकसी चल रही थी। उधर, कांग्रेस से विधायक रहे दलजीत सिंह का नाम भी सुर्खियों में रहा। अंतत: शुक्रवार को भाजपा हाईकमान ने तमाम कयासों और चर्चाओं पर विराम लगाते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष रामकेश निषाद को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
उधर, सदर सीट को लेकर पशोपेश में फंसी सपा ने भी अंतत: फैसला लेते हुए मंजुला सिंह को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। कुछ दिन पूर्व लखनऊ में सपा में शामिल होने के बाद पार्टी मुखिया अखिलेश यादव से मिले आश्वासन के बाद मंजुला ने टिकट की मंजिल आसान मान ली थी। अंतत: यही हुआ। सदर सीट से सपा के कई दिग्गज लगातार कोशिशों में थे। पर हाईकमान ने कुछ और ही फैसला लिया।
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जिलाध्यक्ष रामकेश निषाद पिछले करीब एक दशक से भाजपा में राजनीति कर रहे हैं। इससे पहले जिला शासकीय अधिवक्ता रहे। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा में प्रदेश मंत्री, जिला भाजपा में उपाध्यक्ष व महामंत्री पदों पर रहने के बाद पिछले दो वर्षों से भाजपा जिलाध्यक्ष हैं। इनका पैतृक गांव तिंदवारी क्षेत्र का ही पैलानी डेरा है। तिंदवारी सीट पर भाजपा से चल रहे नामों में इनका नाम ज्यादा लोगों की जुबां पर नहीं था। लेकिन भाजपा हाईकमान ने अंतत: अपने जिलाध्यक्ष के नाम पर तिंदवारी सीट से प्रत्याशी की मुहर लगा दी।
सदर सीट से सपा की उम्मीदवार बनीं मंजुला विवेक सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि कुछ खास नहीं है। पति विवेक कुमार सिंह तीन बार कांग्रेस से बांदा सदर सीट से ही विधायक रहे। प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री भी रहे। उनकी लोकप्रियता के चर्चे आज भी हैं। उनके निधन के बाद पत्नी मंजुला सिंह ने पति के सपनों को पूरा करने की बात कहते हुए राजनीति में इंट्री की। कुछ ही दिन पहले वह सपा में शामिल हो गई थीं। पिछले वर्ष बांदा आए सपा मुखिया अखिलेश यादव ने यहां मंजुला से उनके घर पर मुलाकात भी की थी। माना जा रहा था कि वह विवेक सिंह के निधन के पुरसे में गए थे। लगभग 58 वर्षीय मंजुला परास्नातक हैं। दो बेटे उनके साथ सक्रिय हैं।
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भाजपा ने बांदा, नरैनी और बबेरू सीटों पर कई दिन पूर्व प्रत्याशियों की घोषणा कर दी थी। इन सीटों पर क्रमश: प्रकाश द्विवेदी, ओममणि वर्मा और रामसेवक शुक्ला को घोषित किया गया है। तिंदवारी सीट पर पेच फंसा था। कहा जा रहा था कि सहयोगी दल निषाद पार्टी ने इस सीट पर अपनी दावेदारी बना रखी है। इसी को लेकर रस्साकसी चल रही थी। उधर, कांग्रेस से विधायक रहे दलजीत सिंह का नाम भी सुर्खियों में रहा। अंतत: शुक्रवार को भाजपा हाईकमान ने तमाम कयासों और चर्चाओं पर विराम लगाते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष रामकेश निषाद को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
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उधर, सदर सीट को लेकर पशोपेश में फंसी सपा ने भी अंतत: फैसला लेते हुए मंजुला सिंह को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। कुछ दिन पूर्व लखनऊ में सपा में शामिल होने के बाद पार्टी मुखिया अखिलेश यादव से मिले आश्वासन के बाद मंजुला ने टिकट की मंजिल आसान मान ली थी। अंतत: यही हुआ। सदर सीट से सपा के कई दिग्गज लगातार कोशिशों में थे। पर हाईकमान ने कुछ और ही फैसला लिया।
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जिलाध्यक्ष रामकेश निषाद पिछले करीब एक दशक से भाजपा में राजनीति कर रहे हैं। इससे पहले जिला शासकीय अधिवक्ता रहे। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा में प्रदेश मंत्री, जिला भाजपा में उपाध्यक्ष व महामंत्री पदों पर रहने के बाद पिछले दो वर्षों से भाजपा जिलाध्यक्ष हैं। इनका पैतृक गांव तिंदवारी क्षेत्र का ही पैलानी डेरा है। तिंदवारी सीट पर भाजपा से चल रहे नामों में इनका नाम ज्यादा लोगों की जुबां पर नहीं था। लेकिन भाजपा हाईकमान ने अंतत: अपने जिलाध्यक्ष के नाम पर तिंदवारी सीट से प्रत्याशी की मुहर लगा दी।
सदर सीट से सपा की उम्मीदवार बनीं मंजुला विवेक सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि कुछ खास नहीं है। पति विवेक कुमार सिंह तीन बार कांग्रेस से बांदा सदर सीट से ही विधायक रहे। प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री भी रहे। उनकी लोकप्रियता के चर्चे आज भी हैं। उनके निधन के बाद पत्नी मंजुला सिंह ने पति के सपनों को पूरा करने की बात कहते हुए राजनीति में इंट्री की। कुछ ही दिन पहले वह सपा में शामिल हो गई थीं। पिछले वर्ष बांदा आए सपा मुखिया अखिलेश यादव ने यहां मंजुला से उनके घर पर मुलाकात भी की थी। माना जा रहा था कि वह विवेक सिंह के निधन के पुरसे में गए थे। लगभग 58 वर्षीय मंजुला परास्नातक हैं। दो बेटे उनके साथ सक्रिय हैं।

रामकेश निषाद- फोटो : BANDA