{"_id":"575865ec4f1c1b70359c5406","slug":"departments-remained-the-showpiece-stall","type":"story","status":"publish","title_hn":"शोपीस बने रहे विभागों के स्टाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शोपीस बने रहे विभागों के स्टाल
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 09 Jun 2016 12:07 AM IST
विज्ञापन
खरीफ गोष्ठी में लगाए गए विभागों के सूने पड़े स्टाल।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर में लगे कृषि, उद्यान, भूमि संरक्षण, मृदा, नेडा, मत्स्य आदि विभागों के स्टाल शोपीस बने रहे। कुछेक किसानों को फटे-पुराने पोस्टर, पंफलेट व साहित्य बंटवा कर रस्म अदायगी की गई।
विज्ञापन
गोष्ठी में शामिल होने आए कृषि उत्पादन आयुक्त व प्रमुख सचिवों ने भी इन स्टालों का मुआवना नहीं किया। मंडलायुक्त व स्थानीय अफसरों ने ही स्टालों का भ्रमण किया। किसान भी यहां झांकने नहीं पहुंचे। उद्यान विभाग के एक निरीक्षक ने बताया कि उन्हें सुबह से पानी तक नसीब नहीं हुआ। ऐसे में स्टाल लगाने से क्या फायदा ?
विज्ञापन
अधिकारियों को रस मलाई, किसानों को तन्हाई
बांदा। गोष्ठी व कृषि मेले में मंडल के चारों जनपदों से किसान सुबह 10 बजे से आकर जम गए। करीब 12 बजे प्रमुख सचिव हेलीकाप्टर से कृषि विद्यालय परिसर में उतरे। एक बजे से कार्यक्रम शुरू हुआ। करीब छह से सात घंटे किसान पानी तक को तरस गए। चाय-नाश्ता तो दूर कार्यक्रम खत्म होते ही किसान परिसर में पानी तलाशते रहे।
विज्ञापन
अनवान (बबेरू) से आए किसान रामबहादुर, छेदीलाल पाल (चहितारा), राजाराम (गंज-महोबा) और अनिरुद्ध सिंह बेलाताल आदि ने अपनी पीड़ा जाहिर की। मंच से उठकर अफसर सीधे एक कक्ष में पहुंचे। यहां भोजन की भव्य व्यवस्था थी। तरह-तरह के पकवानों का लुत्फ उठाया और चलते बने।
किसानों का दर्द जुबां पर ही रह गया
बांदा। जिले के मशहूर प्रगतिशील किसान लाल खां सीट से उठकर जैसे ही अपनी बात कहने को हुए अधिकारियों ने उन्हें चुप करा दिया। फिर भी वह बोलते रहे और सरकार की नीतियों को कोसते हुए सूखा राहत में सुधार व किसानों को कागजी नहीं वास्तविक मदद पहुंचाने की मांग की। अतर्रा के किसान मोहनलाल ने जैसे ही बोलना शुरू किया। एक अफसर ने कहा अभी बैठिए। बाद में बताया जाएगा। कुछ सपाई टोपी लगाए कथित किसानों ने सरकारी योजनाओं का महिमा मंडन किया।