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सूखा और कर्ज मुद्दे पर किसानों का प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 14 Oct 2017 12:33 AM IST
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मंडलायुक्त कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
सूखा और सभी किसानों की कर्जमाफी आदि मांगों को लेकर सड़क पर उतरे बुंदेलखंड किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने शुक्रवार को यहां मंडल मुख्यालय में पूरा दिन प्रदर्शन कर प्रशासन और पुलिस को छकाया। सदर तहसीलदार को निलंबित करने की भी मांग की। मंडलायुक्त कार्यालय सड़क पर सैकड़ों किसानों ने धरना देकर जाम लगा दिया। प्रशासन और सरकार को तीखे शब्दों में खरी-खोटी सुनाई।
यूनियन राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल कुमार शर्मा की अगुवाई में बुंदेलखंड के सातों जिलों से आए किसानों ने संकट मोचन के पास धरना देकर आंदोलन की शुरूआत की। अध्यक्ष ने कहा कि भ्रष्टाचारी और किसानों से अभद्रता व शोषण करने वाले अधिकारियों को टिकने नहीं देंगे। बुंदेलखंड को सूखा ग्रस्त घोषित कराकर ही दम लेंगे। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रवण कुमार ने कहा कि अधिकारी गलत रिपोर्ट भेजकर शासन को गुमराह कर रहे हैं। कम बारिश से इस वर्ष सूखे के हालात हैं। रोष जताया कि किसान हित की आवाज उठाने वालों पर मुकदमा थोप दिया जाता है। जिला प्रवक्ता मुन्ना सिंह सेंगर (महोबा), जिलाध्यक्ष राकेश साहू (झांसी) ने भी भाषण दिए।
दोपहर बाद किसानों का हुजूम कमिश्नरी कार्यालय को चल पड़ा। रास्ते में सदर तहसील में घेराबंदी कर तहसीलदार को निलंबित या स्थानांतरित करने की मांग की। महिला किसान नेता तहसीलदार के दफ्तर में घुस गईं। लेकिन तहसीलदार वहां नहीं मिले। यहां के बाद किसानों ने मंडलायुक्त कार्यालय के सामने जाम लगा दिया।
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कमिश्नर अजय कुमार शुक्ला ने किसानों के प्रतिनिधि मंडल से वार्ता कर शासन को मांग पत्र भेजने का भरोसा दिया, लेकिन किसान तुरंत कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। देर शाम तक किसानों का धरना जारी था। सिटी मजिस्ट्रेट रमेशचंद्र तिवारी, एसडीएम सुरेंद्र प्रसाद यादव, सीओ सिटी राघवेंद्र सिंह व सोहराब आलम ने किसान नेताओं को काफी समझाया। पूरे समय बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी बल किसानों के आगे-पीछे लगा रहा। आंदोलन में गजबंदन शुक्ला, लक्ष्मीकांत, कृपाराम पटेल, चतुर्भुज पटेल, किरन पाठक, अखिलेश रावत, उमा सिंह, बाला प्रसाद, मंगल सिंह, बालकृष्ण पटेल, पुष्पेंद्र पाठक (झांसी), रामूलाल गौतम (नरैनी), भानू प्रताप रिछारिया (टीकमगढ़), परशुराम राजपूत (जैतपुर), कुरैशा बानो (गरौठा), रामनरेश (रानीपुर), अमान सिंह (महोबा) आदि मौजूद रहे।
किसानों के उग्र बर्ताव और अधिकारियों को लेकर अमर्यादित टिप्पणी पर कई बार माहौल बिगड़ते बचा। तहसील परिसर और कमिश्नर कार्यालय में मंडलायुक्त व डीएम को लेकर किसानों द्वारा की जा रही अभद्र टिप्पणी पर प्रशासनिक अधिकारियों ने आक्रोश व्यक्त किया। इस पर किसानों का पारा भी चढ़ गया। वरिष्ठ अधिकारियों के समझाने पर किसान शांत हुए।
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यूनियन राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल कुमार शर्मा की अगुवाई में बुंदेलखंड के सातों जिलों से आए किसानों ने संकट मोचन के पास धरना देकर आंदोलन की शुरूआत की। अध्यक्ष ने कहा कि भ्रष्टाचारी और किसानों से अभद्रता व शोषण करने वाले अधिकारियों को टिकने नहीं देंगे। बुंदेलखंड को सूखा ग्रस्त घोषित कराकर ही दम लेंगे। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रवण कुमार ने कहा कि अधिकारी गलत रिपोर्ट भेजकर शासन को गुमराह कर रहे हैं। कम बारिश से इस वर्ष सूखे के हालात हैं। रोष जताया कि किसान हित की आवाज उठाने वालों पर मुकदमा थोप दिया जाता है। जिला प्रवक्ता मुन्ना सिंह सेंगर (महोबा), जिलाध्यक्ष राकेश साहू (झांसी) ने भी भाषण दिए।
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दोपहर बाद किसानों का हुजूम कमिश्नरी कार्यालय को चल पड़ा। रास्ते में सदर तहसील में घेराबंदी कर तहसीलदार को निलंबित या स्थानांतरित करने की मांग की। महिला किसान नेता तहसीलदार के दफ्तर में घुस गईं। लेकिन तहसीलदार वहां नहीं मिले। यहां के बाद किसानों ने मंडलायुक्त कार्यालय के सामने जाम लगा दिया।
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कमिश्नर अजय कुमार शुक्ला ने किसानों के प्रतिनिधि मंडल से वार्ता कर शासन को मांग पत्र भेजने का भरोसा दिया, लेकिन किसान तुरंत कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। देर शाम तक किसानों का धरना जारी था। सिटी मजिस्ट्रेट रमेशचंद्र तिवारी, एसडीएम सुरेंद्र प्रसाद यादव, सीओ सिटी राघवेंद्र सिंह व सोहराब आलम ने किसान नेताओं को काफी समझाया। पूरे समय बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी बल किसानों के आगे-पीछे लगा रहा। आंदोलन में गजबंदन शुक्ला, लक्ष्मीकांत, कृपाराम पटेल, चतुर्भुज पटेल, किरन पाठक, अखिलेश रावत, उमा सिंह, बाला प्रसाद, मंगल सिंह, बालकृष्ण पटेल, पुष्पेंद्र पाठक (झांसी), रामूलाल गौतम (नरैनी), भानू प्रताप रिछारिया (टीकमगढ़), परशुराम राजपूत (जैतपुर), कुरैशा बानो (गरौठा), रामनरेश (रानीपुर), अमान सिंह (महोबा) आदि मौजूद रहे।
किसानों के उग्र बर्ताव और अधिकारियों को लेकर अमर्यादित टिप्पणी पर कई बार माहौल बिगड़ते बचा। तहसील परिसर और कमिश्नर कार्यालय में मंडलायुक्त व डीएम को लेकर किसानों द्वारा की जा रही अभद्र टिप्पणी पर प्रशासनिक अधिकारियों ने आक्रोश व्यक्त किया। इस पर किसानों का पारा भी चढ़ गया। वरिष्ठ अधिकारियों के समझाने पर किसान शांत हुए।