{"_id":"60071cb68ebc3e34462c6cce","slug":"cultural-banda-news-knp606966695","type":"story","status":"publish","title_hn":"फोटो 19 बीएनडीपी 14- मंडलीय दीवारी नृत्य में मौजूद अपर आयुक्त (प्रशासन) व उप निदेशक सूचना।","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फोटो 19 बीएनडीपी 14- मंडलीय दीवारी नृत्य में मौजूद अपर आयुक्त (प्रशासन) व उप निदेशक सूचना।
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बांदा। मंडल स्तरीय दिवारी पाई डंडा प्रतियोगिता में कलाकारों ने धाक जमाई। हैरतअंगेज और आकर्षक प्रस्तुतियों से समा बांध दिया। मंडल के अपर आयुक्त (प्रशासन) चंद्रशेखर ने कहा कि बुंदेलखंड का दिवारी नृत्य विदेशों तक धूम मचाए हुए है। यहां के कलाकार इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं।
नटराज संगीत महाविद्यालय में आयोजित प्रतियोगिता में सिटी मजिस्ट्रेट केशव नाथ ने कहा कि बुंदेलखंड और बांदा के कलाकार दिवारी नृत्य को लगातार बुलंदी पर पहुंचा रहे हैं। इस नृत्य की प्रक्रिया एकाग्रता और संतुलन की होती है। उप निदेशक सूचना भूपेंद्र सिंह यादव ने कहा कि यहां के कलाकार लोक कला को जिंदा रखे हुए हैं। कहा कि पाई डंडा एवं दिवारी नृत्य में युद्ध के समय प्रयोग होने वाले वाद्य यंत्र नगाड़ा और उसका लघु रूप नगड़िया का प्रयोग होता है। पैर और कमर में घुंघरू की पाजेब एवं पेटी का प्रयोग होता है। पाई डंडा और दिवारी नृत्य मार्शल आर्ट का जन्मदाता है।
उन्होंने इसकी तुलना शिव के तांडव नृत्य से की। कृषि विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. वीके गुप्ता ने कहा कि यहां के कलाकारों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। दूरदर्शन के सहायक अभियंता घनश्याम गुप्ता ने भी संबोधित किया। संचालन महाविद्यालय के प्रबंधक धनंजय सिंह ने किया। इस मौके पर दिनेश कुमार मिश्र उर्फ सुमन, दीनदयाल सोनी आदि मौजूद थे। सांस्कृतिक प्रतियोगिता में अहिल्या कुशवाहा की टीम प्रथम, चंद्रपाल सिंह की टीम द्वितीय, रमेश पाल की टीम तीसरे स्थान पर रही।
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नटराज संगीत महाविद्यालय में आयोजित प्रतियोगिता में सिटी मजिस्ट्रेट केशव नाथ ने कहा कि बुंदेलखंड और बांदा के कलाकार दिवारी नृत्य को लगातार बुलंदी पर पहुंचा रहे हैं। इस नृत्य की प्रक्रिया एकाग्रता और संतुलन की होती है। उप निदेशक सूचना भूपेंद्र सिंह यादव ने कहा कि यहां के कलाकार लोक कला को जिंदा रखे हुए हैं। कहा कि पाई डंडा एवं दिवारी नृत्य में युद्ध के समय प्रयोग होने वाले वाद्य यंत्र नगाड़ा और उसका लघु रूप नगड़िया का प्रयोग होता है। पैर और कमर में घुंघरू की पाजेब एवं पेटी का प्रयोग होता है। पाई डंडा और दिवारी नृत्य मार्शल आर्ट का जन्मदाता है।
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उन्होंने इसकी तुलना शिव के तांडव नृत्य से की। कृषि विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. वीके गुप्ता ने कहा कि यहां के कलाकारों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। दूरदर्शन के सहायक अभियंता घनश्याम गुप्ता ने भी संबोधित किया। संचालन महाविद्यालय के प्रबंधक धनंजय सिंह ने किया। इस मौके पर दिनेश कुमार मिश्र उर्फ सुमन, दीनदयाल सोनी आदि मौजूद थे। सांस्कृतिक प्रतियोगिता में अहिल्या कुशवाहा की टीम प्रथम, चंद्रपाल सिंह की टीम द्वितीय, रमेश पाल की टीम तीसरे स्थान पर रही।
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